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G20 Summit: क्या है जी-20 का इतिहास और भविष्य

G20 Summit: भारत विश्व के सबसे मजबूत आर्थिक संगठनों में से एक जी-20 सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। इस शिखर सम्मेलन में दुनिया के 40 से ज्यादा देश और उनके राष्ट्राध्यक्षों के शामिल होने की संभावना है। पूरी दुनिया की नजर इस वक्त भारत पर है। ऐसे में यह जानना कम दिलचस्प नहीं होगा कि जी 20 कैसे अस्तित्व में आया और अभी तक की इसकी यात्रा में कितने पड़ाव आए।

जी-20 शिखर सम्मेलन का आयोजन पहली बार साल 2008 में 14-15 नवंबर को अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में हुआ था। तब अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश थे। भारत में यह जी-20 का 18वां शिखर सम्मेलन है।

G20 Summit: What is the history and future of G-20?

G20 की स्थापना कैसे हुई ?

जी20 की स्थापना 1999 में एशियाई वित्तीय संकट के बाद वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों के लिए वैश्विक आर्थिक और वित्तीय मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक मंच के रूप में की गई थी। तब इसमें सिर्फ 7 देशों अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान, फ्रांस और इटली के विदेश मंत्रियों ने ही शिरकत की थी। आज इसमें 19 देश और यूरोपीय संघ शामिल हैं। इनमें अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, कोरिया गणराज्य, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ यूरोपीय संघ भी है। जी 20 का मतलब ग्रुप ऑफ ट्वेंटी है और यह अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग का प्रमुख मंच है। सभी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मुद्दों पर वैश्विक संरचना और अधिशासन निर्धारित करने तथा उसे मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जी-20 सदस्य देशों की सामूहिक आर्थिक ताकत वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 85% और वैश्विक व्यापार का 75% से अधिक है। यह संगठन विश्व जनसंख्या का लगभग दो-तिहाई भाग का प्रतिनिधित्व करता है।

भारत जी-20 का सदस्य साल 2008 में बना था। भारत जी-20 का सदस्य बनने वाला 8वां देश था। सदस्य बनने के 15वें वर्ष में भारत जी-20 का न सिर्फ शिखर सम्मेलन आयोजित कर रहा है, बल्कि भारत इस समय इसकी अध्यक्षता भी कर रहा है। इस समय भारत वैश्विक मंच पर एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित हो चुका है और यह शिखर समेल्लन वैश्विक नेतृत्व के भारत के दावे को और मजबूती प्रदान करेगा।

जी-20 कैसे काम करता है?

जी-20 प्रेसीडेंसी एक साल के लिए एजेंडा का संचालन करती है। साथ ही शिखर सम्मेलन की मेजबानी करती है। जी-20 में दो समानांतर ट्रैक शामिल हैं। (1) फाइनेंस ट्रैक और (2) शेरपा ट्रैक। वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक के गवर्नर फाइनेंस ट्रैक का नेतृत्व करते हैं, जबकि शेरपा, शेरपा ट्रैक का नेतृत्व करते हैं। इस जी 20 सम्मेलन में भारत के अमिताभ कांत जी 20 शेरपा का नेतृत्व कर रहे हैं। इन दो ट्रैकों के भीतर, विषयगत रूप से कार्य समूह बनाए गए हैं ,जिनमें सदस्यों के संबंधित मंत्रालयों के साथ-साथ आमंत्रित/अतिथि देशों और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि भाग लेते हैं।

वहीं शेरपा ट्रैक से जी-20 प्रक्रिया का समन्वय सदस्य देशों के शेरपाओं द्वारा किया जाता है। जो नेताओं के निजी दूत होते हैं। शेरपा ट्रैक 13 कार्य समूहों में 2 खास पहल- रिसर्च इनोवेशन इनिशिएटिव गैदरिंग (आरआईआईजी) और जी-20 एम्पावर और विभिन्न एंगेजमेंट समूहों के इनपुट की देखरेख करता है। ये सभी पूरे साल मिलते हैं और समानांतर रूप से अपने नोट्स और परिणाम दस्तावेज तैयार करते हैं। शेरपा की बैठकों को आम सहमति-आधारित सिफारिशें तय होती हैं। शेरपा-स्तरीय बैठकों का परिणाम दस्तावेज अंततः नेताओं की घोषणा का आधार बनता है। इसी के आधार पर जी-20 सदस्य देशों के नेताओं द्वारा अपने पक्ष रखे जाते हैं और सहमति के आधार पर दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए जाते हैं।

इसके अलावा, ऐसे एंगेजमेंट समूह भी हैं, जो जी-20 देशों के नागरिक समाजों, सांसदों, थिंक टैंकों, महिलाओं, युवाओं, श्रमिकों, व्यवसायों और शोधकर्ताओं को एक साथ लाते हैं। दरअसल स्टार्टअप20 एंगेजमेंट ग्रुप पहली बार भारत की जी-20 प्रेसीडेंसी के तहत स्थापित किया गया है। जो तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य पर प्रतिक्रिया देने वाले नवाचार को चलाने में स्टार्टअप की भूमिका को पहचानता है।

जी-20 में भारत की स्थिति

भारत जी-20 के भीतर एक जिम्मेदार और विश्वसनीय सदस्य है। भारत जी-20 के सिद्धांतों और मूल्यों का सम्मान करता है और यह जी-20 के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसलिए भारत जी-20 के माध्यम से जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, आर्थिक विकास जैसे मुद्दों पर काम करता है। भारत अपनी अध्यक्षता में वैश्विक चुनौतियों के समाधान में जी-20 देशों के बीच आपसी सहयोग कैसे बढे, इस पर ध्यान केंद्रित किया है। भारत की जी-20 अध्यक्षता को अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा सकारात्मक रूप से देखा गया है। रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को फ़ोन कर अग्रिम बधाई दी है। 2023 में भारत की जी-20 की अध्यक्षता खत्म होने के बाद अगले शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता ब्राजील के पास चली जाएगी।

जी-20 और भारत का भविष्य

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में जी-20 बैठक से पहले समाचार एजेंसी पीटीआई को एक साक्षात्कार में कहा था कि भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बन जाएगा। भ्रष्टाचार, जातिवाद और सांप्रदायिकता की हमारे राष्ट्रीय जीवन में कोई जगह नहीं होगी। उन्होंने जी-20 में भारत की भूमिका और उसके महत्व को रेखांकित करते हुए कहा था कि जी-20 में हमारे शब्दों और दृष्टिकोण को दुनिया भविष्य के रोडमैप के रूप में देखती है, न कि केवल विचारों के रूप में।

पीएम मोदी ने ये भी कहा कि भारत को अब भूखे पेट के देश के रूप में नहीं देखा जाता है। अब भारत करोड़ महत्वाकांक्षी मस्तिष्कों और कुशल हाथों का देश है। भारत की जी-20 अध्यक्षता की थीम 'वसुधैव कुटुंबकम' है। जिसका मतलब दुनिया एक परिवार है। ये सिर्फ एक नारा भर नहीं है नहीं, बल्कि ये भारत के सांस्कृतिक लोकाचार से निकला एक व्यापक दर्शन है।

भारत ने कुछ नए देशों को भी निमंत्रित किया है।

जी-20 की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक भारत द्वारा 9 देशों को आमंत्रित किया गया है। जिसमें बांग्लादेश, मिस्त्र, मॉरिशस, नीदरलैंड, नाइजीरिया, ओमान, सिंगापुर, स्पेन और संयुक्त अरब अमीरात है।

वहीं आमंत्रित किए गए नियमित अंतरराष्ट्रीय संगठनों (यूएन, आईएमएफ, डब्ल्यूबी, डब्ल्यूएचओ, डब्ल्यूटीओ, आईएलओ, एफएसबी और ओईसीडी) और क्षेत्रीय संगठनों (एयू, एयूडीए-एनईपीएडी और आसियान) की पीठों के अतिरिक्त जी-20 के अध्यक्ष के रूप में भारत द्वारा आईएसए, सीडीआरआई और एडीबी को अतिथि अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के रूप में आमंत्रित किया गया है।

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