#TajMahalrow: बस पत्थर बन के रह जाता 'ताजमहल', गर इश्क इसे अपनी पहचान ना देता, जानिए खास बातें

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    आगरा। इस वक्त सरधना से बीजेपी के विधायक संगीत सोम की ओर से इश्क की इबादत के लिए मशहूर ताजमहल पर दिए गए विवादित बयान पर जमकर सियासी बवाल मचा है। एक बार फिर से इस पर हिंदू-मुस्लिम को लेकर सियासत हो रही है लेकिन बयान देने वाले और बयान पर बवाल पैदा करने वाले शायद ये भूल गए कि ताजमहल केवल इश्क की ही भाषा बोलता है। आपको बता दें कि संगीत सोम ने कहा था कि बहुत-से लोग इस बात से चिंतित हैं कि ताजमहल को यूपी टूरिज़्म बुकलेट में से ऐतिहासिक स्थानों की सूची से हटा दिया गया... किस इतिहास की बात कर रहे हैं हम...? जिस शख्स (शाहजहां) ने ताजमहल बनवाया था, उसने अपने पिता को कैद कर लिया था... वह हिन्दुओं का कत्लेआम करना चाहता था... अगर यही इतिहास है, तो यह बहुत दुःखद है, और हम इतिहास बदल डालेंगे... मैं आपको गारंटी देता हूं...।

    इश्क एक इबादत है तो...

    लेकिन शायद संगीत सोम ये भूल गए कि अगर इश्क एक इबादत है तो ताजमहल उस इबादत की जानदार तस्वीर, मोहब्बत की इस अजीमो-शान इमारत को देखकर लोग आज भी प्यार पर भरोसा करते हैं क्योंकि इस प्यार में समर्पण, त्याग, खुशी और वो सबकुछ है जो कि इश्क को मुक्म्मल जहां देता है। शाहजहां द्वारा बनवायी गई इस बेमिसाल खूबसूरत और विश्व के 8 अजूबों में से एक ताजमहल के बारे में आज भी कुछ बातें काफी अनजानी हैं।

     शाहजहां की तीसरी पत्नी

    शाहजहां की तीसरी पत्नी

    बेशक शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज की याद में ताजमहल बनवाया था लेकिन मुमताज, शाहजहां की तीसरी पत्नी थीं। इतिहास की कुछ किताबों पर नजर डालें तो मुमताज, शाहजहां की 14वीं संतान को जन्म देते वक्त स्वर्ग सिधार गयी थीं, उनके मरने के बाद शाहजहां ने उनकी याद में ताजमहल बनवाया था।

    'ममी' के रूप में रखा

    'ममी' के रूप में रखा

    माना जाता हैं कि बुरहानपुर में मुमताज की मृत्यु हुई थी, उन्हें वहीं दफना दिया गया था और 6 महीने बाद उनके शव को कब्र से निकाल कर शाहजहां अपने साथ आगरा ले गए और ताजमहल में उन्हें दफनाया गया।जब तक ताजमहल बनकर तैयार नहीं हुआ था, तब तक मुमताज के शव को लेप लगाकर 'ममी' के रूप में रखा गया था।

    ताजमहल का निर्माण 1632 में

    ताजमहल का निर्माण 1632 में

    ताजमहल का निर्माण 1632 में शुरु हुआ था और इसे बनाने में पूरे 22 साल लगे थे। ताजमहल की नींव में एक विशेष प्रकार की लकड़ी का प्रयोग हुआ है जो कि अब यमुना के जलस्तर कम होने के कारण सूखती जा रही है, जिसके कारण ताजमहल के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।

     दुनिया के आठ अजूबों में शामिल

    दुनिया के आठ अजूबों में शामिल

    ताजमहल के निर्माण के लिए आठ देशों से सामग्री मंगाई गई थी।बढ़ते प्रदूषण की वजह से ताजमहल की सफेदी पर असर हो रहा है।इसलिए उसके कुछ हिस्सों पर मुल्तानी मिट्टी का लेप लगाया गया लेकिन रंग पर असर नहीं हुआ। ताजमहल को दुनिया के आठ अजूबों में शामिल करने के लिए पूरी दुनिया में वोटिंग हुई थी, ताजमहल को इतने वोट मिले जिसके चलते यह दुनिया का पहला अजूबा बन गया। ताजमहल फारसी, तुर्क, भारतीय और इस्लामी वास्तुकला के घटकों का अनोखा संगम है। इसी के चलके यूनेस्को ने साल 1983 में विश्व धरोहर घोषित किया था।

    शाहजहां ने कटवा दिए हाथ

    शाहजहां ने कटवा दिए हाथ

    ऐसी कहानियां प्रचलित हैं कि ताजमहल बनाने वालों के हाथ शाहजहां ने कटवा दिए थे, जबकि सच्चाई ये है कि शाहजहां ने ताजमहल बनाने वाले मजदूरों के हाथ नहीं कटवाए थे. बल्कि उनसे एक वादा लिया था। इतिहासकारों के मुताबिक, शाहजहां ने मजदूरों से जिंदगीभर की पगार देकर उन्हें आजीवन काम ना करने का वादा करवाया था, जिससे ताजमहल जैसी कोई दूसरी इमारत दुनिया में दोबारा ना बन पाए।

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