10 वजहें क्यों आम बजट का हिस्सा नहीं है रेलवे बजट
नई दिल्ली। 25 फरवरी को देश का एक और रेल बजट आपके सामने होगा। दुनिया का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क अपने नाम करने का रिकॉर्ड भारतीय रेल के नाम है। ऐसे में हर वर्ष आने वाला यह रेल बजट अपने आप में और भी खास हो जाता है।
जब इस बार रेल मंत्री सुरेश प्रभु रेल बजट पेश करेंग तो जहां एक ओर टिकट महंगे को लेकर कयास लगाए जाएंगे तो वहीं दूसरी सुविधाओं के मिलने या न मिलने पर भी चर्चा होगी।
इन सारी बातों से अलग क्या आप जानते हैं कि आखिर भारत में रेल बजट के लिए अलग से प्रावधान क्यों है और क्यों आम बजट से अलग हर वर्ष रेलवे के लिए एक तय रकम के तहत बजट की घोषणा की जाती है?
रेलवे देश की सबसे बड़ी ऑर्गनाइजेशन है जिसे मैनेज करना अपने आप में एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। आगे की स्लाइड्स पर क्लिक करिए और जानिए कि आखिर क्यों देश में रेल बजट अलग से पेश किया जाता है।

सबसे ज्यादा कर्मी
वर्ष 2009 में ऑल इंडिया ऑडिट एंड अकाउंट्स एसोसिएशन की ओर से पेश एक रिपोर्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार के अंतर्गत करीब 44 प्रतिशत ऐसे लोग हैं जिन्हें रेलवे ने रोजगार दिया हुआ है।

सबसे ज्यादा राजस्व
भारतीय रेलवे ने वर्ष 2013-2014 के दौरान करीब 23 बिलियन डॉलर का राजस्व कमाया और इसे 2.5 बिलियन डॉलर का फायदा हुआ।

सबसे बड़ा नेटवर्क
इंडियन रेलवे के ट्रैक्स का जाल 115,000 किमी तक फैला है और करीब 65,000 किमी का रूट रेलवे के तहत कवर होता है। रेल मंत्रालय 7,171 स्टेशनों को मैनेज करता है और करीब 12,617 पैसेंजर और 7421 मालगाड़ियों का संचालन करता है।

कितने यात्री
पैंसेजर ट्रेन्स के रोजाना करीब 23 मिलियन यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया जाता है।

केंद्र सरकार पर निर्भर रेलवे
निवेश और सुधारों के अभाव में रेलवे में सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर को काफी नुकसान हुआ। पूरी तरह से केंद्र सरकार पर निर्भर रेलवे को अगले पांच वर्षों तक करीब 300 बिलियन डॉलर के निवेश की जरूरत है।

धीमी गति से विकास
रेलवे में संसाधनों का विकास वाकई बहुत धीमी गति से हो रहा है। आजादी यानी वर्ष 1947 से पहले जहां 53,000 किमी का रूट इसके नाम था जो आजादी के बाद इसमें सिर्फ 12,000 का ही इजाफा हो सका है।

एक तिहाई माल ढुहाई रेल के जरिए
भारत में एक तिहाई माल ढुलाई अभी तक रेलवे के जरिए ही होती है जो सीधे तौर पर उत्पादन और विकास को प्रभावित करता है।

12 उत्पादन इकाईयां रेल मंत्रालय के पास
रोलिंग स्टॉक्स, इंजीनियरिंग उपकरण, इंजन और कोच के निमार्ण समेत कुछ और सुविधाओं के लिए रेलवे मंत्रालय को 12 उत्पादन क्षेत्रों को संचालन करना पड़ता है।

14 सहायक कंपनियां
इंडियन रेलवे के बैनर के तहत करीब 14 सहायक कंपनियां आती हैं। इनमें आईआरसीटीसी और कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड सबसे अहम हैं।

खुद का अपना एक अलग रिसर्च डिपार्टमेंट
भारतीय रेलवे के पास अपना खुद का एक रिसर्च एंड डिजाइन डिपार्टमेंट (आरडीएसओ) है जो कि लखनऊ में स्थित है। यहां पर रेलवे से जुड़ी सभी रिसर्च और डिजाइन को अंजाम दिया जाता है।












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