Harmful Beauty Products: ब्यूटी प्रोडक्ट में मिलाते हैं जानलेवा केमिकल, विरोध के बाद भी हो रही बिक्री
लोकप्रिय ब्यूटी प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी लॉरियल पर अमरीका में 57 मुकदमे दर्ज किए गए हैं।अमेरिका में एक महिला ने लॉरियल के प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करने से कैंसर होने का दावा किया है।

फ्रांस की कॉस्मैटिक कंपनी लॉरियल (L'Oréal) पर पिछले साल अक्टूबर 2022 में मिसौरी की रहने वाले एक महिला जैनी मिशेल ने मुकदमा दायर किया था। मिशेल को इस मुकदमे में सिविल राइट्स एटॉर्नी बेन क्रंप और काउंसेल डिंड्रा फू डेब्रोज समेत कई और महिलाओं ने साथ दिया था। मिशेल ने अपनी शिकायत में कहा था कि लॉरियल के हेयर स्ट्रेटनिंग प्रोडक्ट में इस्तेमाल होने वाले केमिकल की वजह से उसे यूट्रीन कैंसर हुआ है।
इस मुकदमे के बाद कॉस्मैटिक कंपनी ने अमेरिका में हुए इस मुकदमे की सफाई में स्टेटमेंट जारी करते हुए कहा कि हमारा मुख्य उदेश्य प्रोडक्ट उपयोगकर्ता का स्वास्थ्य रहता है और हम सभी ग्राहकों की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखते है। हमें विश्वास है कि हमारे खिलाफ जो मुकदमे दर्ज किए गए हैं वो कानूनी तौर पर गलत है। लॉरियल अपने सभी प्रोडक्ट्स के लिए उत्कृष्ट स्टैंडर्ड का पालन करता है।
57 मुकदमे हुए दर्ज
लॉरियल का यह स्टेटमेंट एक कवर अप की तरह है। पहले भी कई कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स की गुणवत्ता के बारे में इस तरह का दावा कर चुकी हैं। अक्टूबर 2022 में हुए केस के महज चार महीने बाद फ्रांस की इस कॉस्मैटिक कंपनी पर 57 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। लॉरियल के अमेरिका स्थित कंपनी पर शिकागो की अदालत में यह सभी मुकदमे दर्ज हुए हैं, जिनमें कहा गया है कि कंपनी और उनकी सहयोगी कंपनियां बालों को सीधा करने और मुलायम बनाने के लिए कई तरह के जानलेवा केमिकल का इस्तेमाल करती हैं। इन सौंदर्य प्रसाधनों का इस्तेमाल करने पर उपयोगकर्ता को कैंसर समेत कई तरह की गंभीर बीमारी हो सकती हैं।
भारत की दो कंपनियों पर भी मुकदमा
इन मुकदमों में लॉरियल के अमेरिकी घटक के साथ-साथ भारत की दो कंपनियां - गोदरेज सोन होल्डिंग्स इंक और डाबर इंटरनेशनल लिमिटेड शामिल हैं। कंपनी पर दायर किए गए मुकदमे में दावा किया गया है कि कंपनी को पता है कि उनके प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल होने वाले केमिकल की वजह से गंभीर बीमारी होने का खतरा रहता है। फिर भी कंपनी लगातार इनकी बिक्री कर रही हैं।
लॉरियल पर दायर मुकदमे के बाद डिस्ट्रिक्ट जज मैरी रोलैंड ने कॉस्मैटिक कंपनियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले केमिकल्स की जांच के आदेश जारी किए हैं। मुकदमा दर्ज होने के बाद एक बार फिर से लॉरियल ने अपने बचाव में कहा कि उसके प्रोडक्ट्स पर लगे सभी आरोप बेबुनियाद हैं। कंपनी किसी भी तरह के घातक केमिकल का इस्तेमाल अपने प्रोडक्ट्स में नहीं करती है।
क्या कहती है रिसर्च?
पिछले साल अक्टूबर 2022 में नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ द्वारा किए गए एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि बालों को हमेशा के लिए सीधा करने वाले उत्पादों में ऐसे केमिकल्स पाए जाते हैं, जिनकी वजह से महिलाओं को गर्भाशय (Uterine) का कैंसर हो सकता है। कई महिलाओं में इसकी वजह से कैंसर की शिकायतें देखने को मिली है।
नेशनल इंस्टिट्यूट ने यह रिसर्च ब्रेस्ट और ओवेरियन कैंसर के बीच लिंक का पता लगाने के लिए किया था। इस रिसर्च के बाद डॉक्टरों को पता चला कि हेयर स्ट्रेटनिंग प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल किए जाने वाले केमिकल की वजह से गर्भाशय के कैंसर की शिकायतें सामने आ रही हैं। दरअसल, अमेरिकी महिलाओं में गर्भाशय कैंसर के लक्षण बहुत कम देखे जाते हैं। केवल 3 प्रतिशत महिलाओं को ही गर्भाशय का कैंसर होता है, लेकिन इन केमिकल्स की वजह से यूटरिन कैंसर के मामले तेजी से बढ़े हैं।
नेशनल इंस्टिट्यूट द्वारा किए गए इस रिसर्च में 35 से 74 वर्ष की 33,497 अमेरिकी महिलाओं को शामिल किया गया था। इस रिसर्च में शामिल महिलाओं की सेहत की जांच 11 वर्षो तक की जाती रही। इनमें से 378 महिलाओं में कैंसर के लक्षण देखने को मिले थे। इस रिसर्च में डॉक्टरों की टीम ने जांच में पाया कि आमतौर पर महिलाओं को 70 साल की उम्र तक आते-आते कैंसर होने की संभावना 1.64 प्रतिशत है, लेकिन केमिकल वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने पर यह खतरा 4.05 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। रिसर्च के मुताबिक, जिन अमेरिकी महिलाओं ने लगातार अंतराल पर बालों को सीधा करने के लिए केमिकल्स वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल किया, उनमें कैंसर होने की संभावनाएं ज्यादा देखी गई है।
जॉनसन एंड जॉनसन टेलकम पाउडर विवाद
बच्चों के लिए कॉस्मेटिक उत्पाद बनाने वाली कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन (J&J) के टेलकम पाउडर में केमिकल होने से ओवरियन कैंसर की शिकायत मिली थी। साल 2020 में जहां दुनिया एक तरफ कोरोना महामारी की वजह से त्रस्त थी। वहीं, जॉनसन एंड जॉनसन के बेबी केयर प्रोडक्ट में पाए जाने वाले खतरनाक केमिकल की वजह से कई पैरेंट्स परेशान हो गए थे। हालांकि, कंपनी ने दो साल बाद यानी 2022 में घोषणा करते हुए कहा कि वो टेल्क आधारित बेबी पाउडर बनाना और बेचना बंद करेगी। जॉनसन एंड जॉनसन पर यह मुकदमा एक अमेरिकी महिला ने दायर किया था। महिला ने दावा किया था कि जॉनसन एंड जॉनसन के टेलकम पाउडर में एसबेस्टस होता है, जिसकी वजह से ओवरियन कैंस हो सकता है।
लॉरियल की तरह ही पहले जॉनसन एंड जॉनसन ने दावा किया था कि कंपनी ने दशकों रिसर्च करने के बाद प्रोडक्ट बनाया है और इसका इस्तेमाल पूरी तरह से सुरक्षित है। दो साल बाद कंपनी ने स्टेटमेंट जारी करते हुए कहा कि हमने वर्ल्डवाइड अपनो पोर्टफोलियो का असेसमेंट किया और इस फैसले पर पहुंचे हैं कि हम कॉर्न-स्टार्च बेस्ड बेबी पाउडर बनाना और बेचना बंद करेंगे। कंपनी ने अपनी स्टडी में पाया कि महिला द्वारा दायर किए गए मुकदमे की वजह से अमेरिका और कनाडा में कंपनी के टेल्क बेस्ड बेबी पाउडर की डिमांड कम हुई है। कंपनी पहले यूके फिर बाद में ग्लोबली इसका प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन बंद करेगी। इससे पहले साल 2018 में रायटर्स द्वारा की गई एक जांच में पाया गया था कि कंपनी को पता था कि उसके टेल्क बेस्ड प्रोडक्ट में एसबेस्टस मौजूद है, फिर भी कंपनी इसे बना और बेच रही है।
ट्रेसमे का विवाद
लॉरियल की तरह ही एक और ब्यूटी प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी ट्रेसमे (TRESemmé) पर पिछले साल 2022 में मुकदमा दायर किया गया। अमेरिकी ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट पेंसिलवेनिया में दायर मुकदमे को नार्दन डिस्ट्रिक्ट में ट्रांसफर किया। कंपनी के हेयर स्मूदनिंग कलर और हेयर स्ट्रेटनिंग शैम्पू में ये डिफेक्ट्स पाए गए थे। कंपनी इन शैम्पू का गलत विज्ञापन कर रही थी। इसमें मौजूद केमिलक्स की वजह से लोगों के बाल गिर सकते हैं। कंपनी द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले केमिकल (डीएमडीएम) DMDM हाइडानटिन एक प्रिजर्वेटिव है, जिसकी मात्रा 1 प्रतिशत तक होती है।
1987 में की गई एक स्टडी में पाया गया था डीएमडीएम हाइडानटिन के इस्तेमाल की वजह से उन लोगों को डर्मेटिटिस हो सकता है, जो फार्मलडिहाड से एलर्जिक है। 2015 में की गई एक स्टडी में पाया गया कि हाई टेम्परेचर की वजह से प्रिजर्वेटिव से फार्मल्डिहाइड की रिलीज बढ़ जाती है, जिसकी वजह से खतरनाक बीमारी हो सकती है। साल 2013 से कई उपभोक्ताओं ने ट्रेसमे के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज करवाई हैं। इन शिकायतों में बाल झड़ने के साथ-साथ रूखापन, खुजली और इरिटेशन की समस्याएं शामिल हैं।
भारत में धड़ल्ले से बिक रहे खतरनाक प्रोडक्ट्स
जहां अमेरिका, यूके और कनाडा जैसे देशों में बड़े ब्रांड्स के प्रोडक्ट्स में खामी पाए जाने पर कानूनी शिकंजा कसा जाता है, वहीं भारत में ऐसे ब्रांड्स के प्रोडक्ट्स धड़ल्ले से बिकते हैं। प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनियां लोगों के विरोध के बावजूद कोई न कोई तरकीब निकालकर अपने उत्पाद की बिक्री करती रहती हैं। कंपनियां अपने प्रोडक्ट में बदलाव करने का दावा करती हैं और उसे दोबारा बाजार में उतार देती हैं।
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