Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Coaching Guidelines: कितनी कारगर होगी कोचिंग संस्थानों के लिए नई गाइड लाइन

Coaching Guidelines: केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय ने देश भर में चल रहे कोचिंग संस्थानों के लिए नई गाइड लाइन जारी कर दी है। अब 16 साल से कम उम्र के किसी भी छात्र को कोचिंग सेंटरों द्वारा प्रवेश नहीं दिया जाएगा और न अब कोचिंग सेंटर मनमानी फीस ही वसूल कर पाएंगे।

कोचिंग संस्थान ना तो भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित कर पाएंगे और ना ही माता-पिता और छात्रों को ऊंचे अंक या रैंक की गारंटी ही दे सकेंगे। केंद्र ने यह कदम कोचिंग संस्थानों में पढ़ रहे बच्चों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटनाओं को देखते हुए उठाया है।

Coaching Guidelines: How effective will the new guidelines be for coaching institutes?

लेकिन क्या इन उपायों से कोचिंग संस्थानों की मनमानी रुक जाएगी? क्या बच्चों और उनके अभिभावकों के मन में कोचिंग संस्थान की अहमियत पहले जैसी बनी रहेगी? और क्या प्रतियोगिता वाली परीक्षाओं में तैयारी के लिए कोचिंग संस्थानों पर निर्भरता कम हो सकेगी? इन सभी सवालों का क्या जवाब होगा?

आखिर कोचिंग सेंटर की क्यों पड़ती हैं जरूरत?

पिछले कुछ सालों में कोचिंग सेंटरों की संख्या तेजी से बढ़ी है तो उसका मुख्य कारण प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रति अभिभावकों और छात्रों में सफलता को लेकर भय है। अभिभावक इसे आसान रास्ता समझ कर और दूसरों को ऐसा करते देख कर अपने बच्चे को भी कोचिंग सेंटर में भेजने के लिए सहज तैयार हो जाते हैं।

कोचिंग सेंटर भी डिस्टेंस लर्निंग और क्लासरूम छात्रों के नाम पर लोगों को भ्रमित करते हैं। विज्ञापनों की भरमार के आगे कोई इतनी गहराई से नहीं देखता कि उस कोचिंग सेंटर के परिणामों की हकीकत क्या है। नीट, आईआईटी-जेईई, क्लैट, सीए, कैट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोर्स चलाने वाले कोचिंग सेंटर्स ऐसे दावा करते हैं, जैसे सफलता केवल वही दिला सकते हैं।

कोचिंग सेंटर अपने विज्ञापनों के जरिए छात्रों को पूरी तरह से गुमराह करते हैं। वास्तव में वे केवल कुछ ही छात्रों पर ध्यान केंद्रित करते हैं और उनसे परिणाम प्राप्त कर उसकी कई साल तक मार्केटिंग करते हैं। अधिकांश लोग टॉपर्स के आकर्षक और झूठे विज्ञापन को देखकर कोचिंग चुनते हैं जबकि सच्चाई यह है कि 99 प्रतिशत टॉपर्स कोचिंग के कारण नहीं बल्कि अपनी प्रतिभा, बुद्धिमत्ता और कड़ी मेहनत से बनते हैं। वास्तव में कोचिंग सेंटर अब उद्योग बन गए हैं।

कमजोर शिक्षा तंत्र वाले राज्य भी जिम्मेदार

कोटा, जयपुर और दिल्ली जैसे बड़े कोचिंग सेंटर वाले शहरों को देख लीजिए, हर जगह बिहार, यूपी और झारखंड जैसे राज्यों के छात्र सबसे अधिक संख्या में मिल जाएंगे। उनके राज्य में शिक्षा तंत्र की यह विफलता ही है, जो कि इन कोचिंग संस्थानों की वास्तविकता जाने बिना उच्ची फीस देकर यहां सफलता की तलाश में चले आते हैं।

इनमें से एक तिहाई से अधिक खुद को ठगा हुआ मानकर कोचिंग छोड़ भी देते हैं। इनकी जमा फीस कोचिंग वाले कभी नहीं लौटाते। अब नई गाइड लाइन में यह प्रावधान किया गया है कि यदि छात्र बीच में कोचिंग छोड़ते हैं तो संस्थानों को उसी अनुपात में पैसा वापस करना पड़ेगा।

कोचिंग संस्थान ज्ञान के बजाय टूल्स पर ज्यादा ध्यान देते हैं

अधिकतर कोचिंग संस्थान पुस्तकों या स्टडी मटीरीअल के नाम पर एक एक सेट और पढ़ाई में आसान सूत्रों का उपयोग करते हैं। वर्षों से पढ़ा रहे शिक्षक भी वास्तविक जानकारी देने के बजाय केवल परीक्षा में सफल होने के लिए तथ्यों और तरीकों, रणनीतियों को समझाते रहते हैं। एक वाक्य में कहे तो कोचिंग सेंटर सीखने और शिक्षा के मूल सार को ही नष्ट कर देते हैं।

यही नहीं कोचिंग सेंटर्स अपने यहां प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को डमी स्कूल में डाल देते हैं और स्कूलों पर से बच्चों का भरोसा खत्म करने का काम करते हैं। सरकारें भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं करतीं। इसी से पता चलता है कि स्कूलों में दी जाने वाली शिक्षा की गुणवत्ता कितनी खराब है। यह जानते हुए भी कि कोचिंग सेंटर बच्चों को ज्ञान या कौशल से दूर कर रहे हैं, सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं व्यक्त की जाती। समाज विज्ञानी बार बार यह कह रहे हैं कि कोचिंग सेंटर नवाचार, वैज्ञानिक स्वभाव, विचार की स्वतंत्रता के बजाय युवाओं को भीड़तंत्र का हिस्सा बना रहे हैं।

कोचिंग सेंटरों की बढ़ी लोकप्रियता के कारण

बच्चों में कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण एक डर समाया रहता है और वे सोचते हैं बिना कोचिंग के वे प्रतिस्पर्धा में सफल नहीं हो सकते हैं।

माता-पिता के भी मन में यह अवधारणा है कि उनके अपने सपने को साकार करने के लिए यदि बच्चे को कोचिंग के लिए महंगे संस्थान में भेजते हैं तो उनकी सफलता की गारंटी होगी।

बड़े विज्ञापन देकर उत्कृष्ट परिणामों के दावे करने वाले विशाल कोचिंग संस्थान में शामिल होने के बाद छात्र अधिक आत्मविश्वास महसूस करते हैं।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+