Cannes Film Festival: कब और क्यों शुरू हुआ कान फिल्म फेस्टिवल, जानें भारतीय कनेक्शन
फ्रांस के कान शहर में होने वाले दुनिया के सबसे बड़े फिल्म अवॉर्ड में शामिल कान फिल्म फेस्टिवल का इतिहास दशकों पुराना है और भारतीय सिनेमा के साथ भी उतना ही पुराना संबंध है।

Cannes Film Festival: 10 दिनों तक चलने वाला कान फिल्म फेस्टिवल हर साल फ्रांस के कान शहर में आयोजित होता है। इस बार 16 मई से 26 मई तक होने वाले इस इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल की चर्चा एक बार फिर से पूरी दुनिया में हो रही है। इस फिल्म फेस्टिवल को 'फेस्टिवल डे कान' के नाम से भी जाना जाता है।
यह दुनिया के सबसे बड़े और ग्लैमर्स से भरपूर एक फिल्म फेस्टिवल्स में से एक है। जहां दुनियाभर की फिल्मों, फीचर फिल्मों, डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट फिल्मों को प्रदर्शित किया जाता है। कान न केवल अपनी फिल्म स्क्रीनिंग के लिए जाना जाता है, बल्कि अपने ग्लैमरस रेड कार्पेट इवेंट्स के लिए भी जाना जाता है। जो सबसे ज्यादा चर्चा का विषय होता है। जहां दुनियाभर की मशहूर हस्तियां, फिल्मों से जुड़े अभिनेता और अभिनेत्रियां अपने फैशन और स्टाइल का प्रदर्शन करते हैं।
कब हुई कान फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत?
1938 में हिटलर और मुसोलिनी ने वेनिस फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत की ताकि वो अपने पंसदीदा लोगों को अवार्ड दे सकें। तब वेनिस फिल्म फेस्टिवल के कई ज्यूरी सदस्यों ने उनका विरोध करते हुए इस्तीफा दे दिया था।
इसके बाद फ्रांस के शिक्षा और ललित कला मंत्री, जीन जे ने 9 मई 1939 को वेनिस फिल्म फेस्टिवल को टक्कर देने के लिए कान फिल्म फेस्टिवल आयोजित करने का फैसला किया। फिर 31 मई को कान में फिल्म फेस्टिवल आयोजित करने के लिए फ्रेंच सरकार ने मुहर लगा दी। इसके साथ ही 1 सितंबर को इस फेस्टिवल की ओपनिंग सेरेमनी की तारीख तय हुई। इसे सफल बनाने के लिए एक दिन पहले 30 अगस्त को गाला नाइट का आयोजन भी हुआ और इसमें दुनियाभर के सेलेब्रिटी ने हिस्सा लिया लेकिन हिटलर ने 1 सितंबर 1939 को पौलेंड पर हमला बोल दिया।
इसके बाद दुनिया में युद्ध की स्थिति देखते हुए इसे कैंसिल कर दिया गया। फिर फ्रांस और ब्रिटेन के बीच वॉर शुरू हो गई और द्वितीय विश्व युद्ध की वजह से 6 साल तक कान फेस्टिवल टलता रहा। इसके बाद 20 सितंबर से 5 अक्टूबर 1946 तक कान फिल्म फेस्टिवल का पहली बार सफल आयोजन किया गया।
कान फिल्म फेस्टिवल से भारत का पुराना नाता
20 सितंबर 1946 को कान फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत हुई तब दुनियाभर के 21 देशों की फिल्मों को दिखाया गया था। इस कड़ी में भारत की फिल्म को भी कान में जगह मिली। साल 1946 में चेतन आनंद की फिल्म नीचा नगर से इसकी शुरुआत हुई। नीचा नगर को फिल्म फेस्टिवल में ग्रैंड प्रिक्स अवार्ड से सम्मानित किया गया था।
इसके बाद राजकपूर की आवारा (1951), दो बीघा जमीन (1953), बूट पॉलिश (1954), पाथेर पांचाली (1955), गाइड (1965), खार जी (1982), सलाम बॉम्बे (1988), उड़ान (2010) और लंच बॉक्स (2013) जैसी फिल्मों को कान फिल्म फेस्टिवल में सम्मानित किया जा चुका है।
कान फेस्टिवल में किसी भी फिल्म की स्क्रीनिंग बहुत मायने रखती है और यहां पर मिलने वाले अवॉर्ड्स को खूब सराहा जाता है। साल 1999 में मलयालम फिल्म मरण सिंहासनम ने Caméra d'Or अवॉर्ड जीता था। जबकि साल 2006 में पहली तमिल फिल्म Veyil की पहली बार कान फिल्म फेस्टिवल में स्क्रीनिंग हुई थी।
कान में इन भारतीयों को बनाया गया ज्यूरी
● साल 1950 में चेतन आनंद को भारत की तरफ से पहला इंटरनेशनल ज्यूरी मेंबर बनाया गया था।
● साल 1982 में मृणाल सेन को भारत की तरफ से इंटरनेशनल ज्यूरी मेंबर बनाया गया था।
● साल 1990 में निर्देशक मीरा नायर को इंटरनेशनल ज्यूरी मेंबर बनाया गया था।
● साल 2000 में कान फिल्म फेस्टिवल ज्यूरी के रूप में लेखिका अरुंधति रॉय को चुना गया था।
● साल 2003 में ऐश्वर्या राय को कान फिल्म फेस्टिवल में ज्यूरी मेंबर बनाया गया था। ऐसा करने वाली वो पहली अभिनेत्री थी।
● साल 2005 में अभिनेत्री और फिल्म निर्माता नंदिता दास को ज्यूरी सदस्य के रूप में चुना गया।
● साल 2009 में भारत की मशहूर अभिनेत्री शर्मिला टैगोर को इंटरनेशनल ज्यूरी में शामिल किया गया।
● साल 2010 में फिल्ममेकर शेखर कपूर को ज्यूरी मेंबर के रूप में शामिल किया गया।
● साल 2013 में अभिनेत्री विद्या बालन को ज्यूरी मेंबर बनाया गया।
● साल 2022 में दीपिका पादुकोण को कान फिल्म फेस्टिवल में इंटरनेशनल ज्यूरी मेंबर बनाया गया था।
2023 में कितने भारतीयों को निमंत्रण?
इस साल 21 मशहूर भारतीय हस्तियों को कान फिल्म फेस्टिवल के लिए आमंत्रित किया गया है। इनमें प्रियंका चोपड़ा, ऐश्वर्या राय बच्चन, अनुराग कश्यप, अनुष्का शर्मा, सारा अली खान, अदिति राव हैदरी, सनी लियोन, विजय वर्मा, मानुषी चिल्लर, मृणाल ठाकुर, अनिल कुमार, गुनीत मांगा, डॉली सिंह, एल मुरुगन, उर्वशी रौतेला, ईशा गुप्ता, किविनी शोहे, एंड्रिया केविचुसा, कंगबाम तोम्बा, राहुल भट्ट शामिल हैं।
इस वर्ष कान में डेब्यू कर रही सारा अली खान की दादी ने भी साल 1959 में कान फिल्म फेस्टिवल में शिरकत की थी। पिछले वर्ष लगभग 11 भारतीय शख्सियतों ने कान फिल्म फेस्टिवल में शिरकत की थी।
किन-किन देशों के लोग होते हैं शामिल?
इस फिल्म फेस्टिवल में लगभग 90 देशों की मशहूर हस्तियां शामिल होती हैं। जिसमें लगभग 100 देशों के 4000 से अधिक पत्रकार और 2000 से अधिक मीडिया आउटलेट्स शामिल हैं। कान फिल्म फेस्टिवल सबसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में से एक है। यह अंतरराष्ट्रीय सिनेमा के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है।
कान फिल्म फेस्टिवल में क्या अवॉर्ड मिलता है?
कान फिल्म फेस्टिवल में दुनियाभर की फिल्मों की स्क्रीनिंग की जाती है और बेस्ट फिल्म को पाम डिओर (Palm D'or) अवॉर्ड से सम्मानित किया जाता है। साल 1955 में फिल्म कमेटी ने पाम डिओर अवॉर्ड लॉन्च किया था और 1964 को इसे ग्रैंड प्रिक्स ने रिप्लेस कर दिया था। हालांकि, 1975 से फिर पाम डिओर अवॉर्ड दिया जाने लगा था और यह अवॉर्ड 18 कैरेट गोल्ड और एमराल्ड कट डायमंड से तैयार होता है। जिसकी कीमत 27 हजार डॉलर यानि 18 लाख रुपये होती है।
कान फिल्म फेस्टिवल और रेड कार्पेट का खेल
कान फिल्म फेस्टिवल में अवार्ड से भी अधिक चर्चा उसके रेड कार्पेट को लेकर होती है। क्योंकि रेड कार्पेट पर दुनियाभर के सेलेब्स दिनभर वॉक करते हैं जिसके चलते कार्पेट दिन में 3 बार बदला जाता है और इसकी लंबाई 2 किमी होती है।
वहीं रेड कार्पेट नियमानुसार, इवेंट में कोई भी फीमेल सेलेब्स बिना हील्स के वॉक नहीं कर सकती है यह नियम 2015 में लागू किया गया था। अगर कोई सेलेब्स हील्स नहीं पहनती है तो उसे सेरेमनी में नहीं घुसने दिया जाता है। इसके अलावा रेड कार्पेट पर हैंडबैग ले जाने की भी मनाही है और रेड कार्पेट पर कोई भी सेलेब्स सेल्फी नहीं खींच सकता है। केवल पैपराजी या मीडिया ही उनकी तस्वीरें खींच सकते हैं।












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