BRO: अमरनाथ और चारधाम यात्रा से लेकर सैन्य आवाजाही को आसान बनाता है बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन

चारधाम तथा अमरनाथ यात्रा से लेकर देश के सीमावर्ती इलाकों में इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

Border Road Organization eases military movement also with Amarnath and Chardham Yatra

BRO: बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय का एक अनुषांगिक संगठन है। यह भारत के सीमावर्ती और दूरगामी इलाकों में सड़कों की कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे के निर्माण का काम करता है। जिससे सैनिकों, हथियारों और रक्षा उपकरणों की आवाजाही इन क्षेत्रों में बनी रहे। यही नहीं, यह संगठन चारधाम यात्रा से लेकर अमरनाथ तीर्थयात्रा को सुविधाजनक बनाने का भी काम करता है। इन विनिर्माण के कामों को सुनिश्चित करने के लिए वित्तीय वर्ष 2022-23 में भारत सरकार ने बीआरओ को ₹6,004 करोड़ का बजट आवंटित किया था। वित्तीय वर्ष 2023-24 में बीआरओ के पूंजीगत बजट में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गयी थी।

चारधाम और अमरनाथ यात्रा

चारधाम यात्रा सर्किट पर सड़कों का निर्माण और उनके रखरखाव में बीआरओ महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह इन रास्तों पर सड़कों, पुलों और सुरंगों के निर्माण सहित मरम्मत का काम देख रहा है। साथ ही बर्फबारी होने पर रास्तों को साफ करने का जिम्मा भी इसके पास है। साल 2016 में बीआरओ ने उत्तराखंड में दो लेन राजमार्ग प्रोजेक्ट की शुरूआत की थी। चारधाम राजमार्ग बनाने के पीछे उद्देश्य तीर्थयात्रा को आसान बनाना है, और यह चार धामों बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री को एक-दूसरे से जोड़ता है। इस प्रोजेक्ट में 900 किलोमीटर का राष्ट्रीय राजमार्ग शामिल है। प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत ₹12,000 करोड़ है।

चारधाम यात्रा के अलावा, बीआरओ अमरनाथ यात्रा को भी तीर्थयात्रियों के लिए सुगम बनाने की तैयारियों में लगा है। बीते दिनों बीआरओ के अधिकारियों ने बताया कि 15 जून तक अमरनाथ यात्रा ट्रैक की मरम्मत हो जायेगी। 62 दिनों की वार्षिक अमरनाथ यात्रा इस वर्ष 1 जुलाई से शुरू होने जा रही है। इसी साल मार्च महीने में ट्रैक पर बहाली का काम शुरू किया गया था।

बीआरओ की स्थापना

देश के उत्तर और उत्तर-पूर्व राज्यों में इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए 7 मई 1960 को इसकी स्थापना की गयी थी। प्रोजेक्ट्स को पारदर्शिता के साथ जल्द-से-जल्द पूरा करनेके लिए सीमा सड़क विकास बोर्ड (बीआरडीबी) बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में प्रधानमंत्री और उपाध्यक्ष के रूप में रक्षामंत्री को चुना जाता है। बीआरओ का मोटो 'श्रमण सर्वम साधनम' है। जिसका अर्थ है 'कड़ी मेहनत के द्वारा सबकुछ प्राप्त किया जा सकता है'।

बीआरओ के मुख्य प्रोजेक्ट

रक्षा मंत्रालय यह फिलहाल 19 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में कार्यरत है। यह अफगानिस्तान, भूटान, म्यांमार, तजाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देशों में भी अपनी सेवायें दे चुका है। साल 2021 तक बीआरओ ने 60,000 किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण किया था। अभीतक इसमें 450 से अधिक स्थायी पुलों को भी बनाया जिनकी कुल लंबाई 60 किलोमीटर से भी अधिक है। बीआरओ ने मुख्य रणनीतिक स्थानों पर 19 हवाई पट्टियों का निर्माण भी किया है। बीआरओ को सशस्त्र बलों के साथ युद्ध की स्थिति में भी शामिल किया जाता है।

बीआरओ अरुणांक, बीकन, ब्रह्मंक, चेतक, दीपक, दांतक (भूटान), हिमांक, हीराक, पुष्पक, संपर्क, सेतुक, सेवक, शिवालिक, स्वास्तिक, उदयक, वर्तक, विजयक सहित 18 परियोजनाओं में काम कर रहा हैं। वित्तीय वर्ष 2021-22 में बीआरओ ने 102 इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को पूरा किया था, जिसमें दुनिया की सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग, रोहतांग में अटल सुरंग, और लद्दाख में दुनिया की सबसे ऊंची मोटर सड़क, उमलिंग ला पास का निर्माण शामिल हैं। जनवरी 2023 में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सात सीमावर्ती राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में पुलों और सड़कों सहित ₹724 करोड़ के 28 बीआरओ इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया था।

बीआरओ की प्रमुख उपलब्धियां

सड़कों का निर्माण - बीआरओ रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सड़कों के निर्माण में सहायता प्रदान करता है जो सीमावर्ती क्षेत्रों को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ती हैं। ये सड़कें सैनिकों, हथियारों और सेना की गाड़ियों की आवाजाही को आसान बनाती हैं। उदाहरण के लिए अटल टनल को लिया जा सकता है। यह टनल लद्दाख को 12 महीने देशभर से जोड़े रखती है।

सीमा पुलों का निर्माण - बीआरओ ने कई सीमावर्ती पुलों का निर्माण किया है। यह पुल सेना, स्थानीय लोगों, तीर्थयात्राओं और रसद आपूर्ति में सहायक हैं। अरुणाचल प्रदेश में दापोरिजो ब्रिज, जम्मू और कश्मीर में चिनाब नदी पर बेली ब्रिज और असम में ढोला-सदिया ब्रिज बीआरओ के पुल निर्माण के कुछ उदाहरण हैं।

रिमोट क्षेत्रों तक पहुंचना - बीआरओ ने देश के कई रिमोट अथवा दूरगामी इलाकों में सड़कों का निर्माण कर उन क्षेत्रों को देश-दुनिया के लिए खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हिमाचल प्रदेश में मनाली को लाहौल-स्पीति से जोड़ने वाला रोहतांग पास का निर्माण इसका एक उदाहरण है।

ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सड़क का निर्माण - बीआरओ ने ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण करके महारथ हासिल की है, जहां खराब मौसम एक बहुत बड़ी चुनौती बन जाता है। दुनिया की सबसे ऊंची मोटर सड़कों में से एक, लद्दाख में खारदुंग ला पास का निर्माण इसका एक उदाहरण है।

अंतरराष्ट्रीय परियोजनाएं - बीआरओ ने पड़ोसी देशों के बुनियादी ढांचे के विकास में योगदान करते हुए भारत की सीमाओं के अलावा भी प्रोजेक्ट्स शुरू किए हैं। उदाहरण के लिए, बीआरओ कलादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट में शामिल रहा है, जो मिजोरम को म्यांमार में सितवे पोर्ट से जोड़ता है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और कनेक्टिविटी बढ़ती है।

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