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ब्राजील में बॉलीवुड की दिवानगी से रूबरू होगें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

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मुंबई। बॉलीवुड की दिवानगी सिर्फ भारतीयों के ही नहीं, बल्कि दूसरे देशों में भी सर चढ़कर बोलती है। शायद इसीलिए, जहां अभी भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तक नहीं पहुंच पाए, वहां बॉलीवुड का बोलबाला है।

यहां बात हो रही है लेटिन अमेरिका की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अगले सप्ताह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए ब्राजील जाने वाले हैं, जहां वे लेटिन अमेरिकी मुल्कों के प्रमुखों से मुलाकात करेगें। लेकिन नरेन्द्र मोदी के जाने से पहले 'नीति सेंट्रल' की टीम ने लेटिन अमेरिका में भारत के साफ्ट पॉवर 'बॉलीवुड' के प्रभाव पर एक नजर डाला। उन्होंने पाया कि वहां बॉलीवुड ने उन क्षेत्रों में भी अपनी पैठ जमाई हुई है, जहां भारतीय कूटनीति प्रत्यक्ष रूप से नहीं पहुंच पाई है।

ब्राजील में बॉलीवुड

आपको बता दें कि हमारे सिनेमा जगत के कई फिल्मों की शूटिंग लेटिन अमेरिकी देशों में हो चुकी है। जिनमें से ताजा उदाहरण यशराज फिलम्स के बैनक तले बनी 'धूम-2' है। जो ब्राजील में फिल्माई बॉलीवुड की पहली फिल्मों में से एक है। वहीं, बहुत कम लोगों को यह बात पता होगी कि भारत की पॉपुलर टेली सीरियल 'जस्सी जैसी कोई नहीं' भी कोलंबिया के टेली सोप के आधार पर बनाई गई थी। वहीं, बॉलीवुड ने यहां की कई प्रतिभाओं को भी सामने आने का मौका दिया है। पेरु की गायिका ने 'धूम-3' का स्पानिश टाइटल ट्रैक गाया है, जो कि यहां बहुत ही पसंद किया गया।

शाहरूख खान का क्रेज

लेटिन अमेरिका में बॉलीवुड के बादशाह शाहरूख खान का क्रेज भी देखने लायक है। शायद इसीलिए पेरु में शाहरूख की चेन्नई एक्सप्रेस रिलीज किए जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। पेरू की राजधानी लीमा में रहने वाले बेल्लिडो, लीमा में भारतीय सिमेना फैन एसोशिएशन के अध्यक्ष हैं, और खुद भी शाहरूख खान के एक बड़े फैन हैं। बेल्लिडो के अनुसार बॉलीवुड पेरु एवं कोलंबिया में बहुत लोकप्रिय है।

वहीं, वेनेजुएला सरकार ने प्रोडक्शन की दुनिया में कामयाब होने के लिए बॉलीवुड के पेशेवर लोगों से सलाह मांगी है। वेनेजुएला के विदेश मंत्री ने एक यात्रा के दौरान नई दिल्ली में कहा था कि 'हमारा लक्ष्य है कि बॉलीवुड उभरते हुए वेनेजुएला फिल्म जगत को तकनीकि ज्ञान के साथ साथ पटकथा लेखन और फिल्म निर्माण के लिए भी प्रशिक्षित करे।'

नीतियों में है बदलाव की जरूरत

हालांकि, इस रिपोर्ट के अनुसार लेटिन अमेरिका के कई ऐसे देश जो भारत के लिए संभावित रूप से बड़ा बाजार बन सकता है, उन देशों को भारत की ओर से तवज्जो नहीं दी जा रही। साथ ही भारत को इस मामले में अपनी नीतियों को भी नए ढ़र्रे में लाने की जरूरत है।

लिहाजा, ब्रिक्स सम्मेलन में जा रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, लेटिन अमेरिका में लोकप्रिय भारत के इस सॉफ्ट पॉवर को किस तरह प्रोत्साहित और प्रचारित करते हैं, यह देखने वाली बात होगी।

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