Janaki Janmbhoomi: माता सीता के मायके में भी उत्सव की तैयारी
Janaki Janmbhoomi: अयोध्या में रामलला की प्रतिमा की प्राणप्रतिष्ठा की तैयारी जितनी वृहद व्यवस्था से की जा रही है, उतनी ही श्रद्धा से माता जानकी के मायके में भी रामउत्सव की तैयारी की जा रही है। पूरे मिथिला अंचल के लोग जानकी और उनके पति प्रभु श्रीराम की 22 जनवरी 2024 को विशेष पूजा अर्चना करना चाहते हैं। उसी दिन अयोध्या में श्रीराम के मंदिर का अनावरण होगा। नेपाल और भारत दोनों तरफ के लोग अपने-अपने यहाँ जानकी का मायका होने का दावा करते हैं और अनुष्ठान करते हैं।
सीतामढ़ी में 22 जनवरी को मनेगी दीपावली
सीतामढ़ी के सांसद और बिहार के पूर्व पर्यटन मंत्री सुनील कुमार पिंटू वनइंडिया से बातचीत में कहते हैं कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हर हिन्दू के लिए गर्व का विषय है। हम मिथिला के लोगों के लिए तो यह और बड़े गौरव का क्षण हैं, क्योंकि भगवान राम फिर से अयोध्या में अपने भव्य रूप में विराजने जा रहे हैं। हम उस दिन यहाँ माँ सीता की जन्मस्थली पुनौरा गांव में दीपावली जैसा उत्सव मनाएंगे।

एक मान्यता यह भी है कि पुनौरा गाँव में ही सीता माता का जन्म हुआ था। यहाँ मां जानकी का जन्मभूमि मंदिर भी है, जिसे पुनौरा धाम कहा जाता है। इससे जुड़ी कथा है कि मिथिला में एक बार भीषण अकाल पड़ा और वहां के राजपुरोहित ने राजा जनक को खेत में हल चलाने की सलाह दी। जब राजा जनक हल चला रहे थे, तब जमीन से मिट्टी का एक पात्र निकला, जिसमें माता सीता शिशु अवस्था में प्रकट हुईं।
पुनौरा धाम में जानकी कुंड के नाम से एक सरोवर है। इस सरोवर को लेकर मान्यता है कि इसमें स्नान करने से संतान प्राप्ति की मनोकामना पूरी होती है। सांसद सुनील पिंटू कहते हैं कि माँ जानकी के प्रकट होने के बाद लोग श्रद्धा के रूप में यहाँ की मिट्टी ले जाने लगे और इस जगह गड्ढा बन गया और बाद में यही तलाब में परिवर्तित हो गया। 22 जनवरी को कुंड के चारों ओर दीपोत्सव का भव्य कार्यक्रम होगा। जिसमें हज़ारों लोग शामिल होंगे।
नेपाल में सीता के मायके में भव्य तैयारी
नेपाल का शहर जनकपुर मिथिला सभ्यता का हृदय स्थल कहा जाता है। यहाँ जानकी मंदिर के साथ 70 अन्य हिंदू मंदिर भी हैं। आज के भव्य जानकी मंदिर का निर्माण 1910 में टीकमगढ़ की रानी वृषभ भानु ने करवाया था। जानकी मंदिर को नौलखा मंदिर (नौ लाख का) भी कहा जाता है। रामायण के अनुसार जनकपुर ही राजा जनक की नगरी थी। यहीं देवी जानकी का जन्म हुआ और यहीं भगवान श्रीराम से उनका विवाह भी हुआ।
अब जबकि अयोध्या के भगवान रामचंद्र के विशाल मंदिर की स्थापना हो रही हैं तो जनकपुर वासी फूले नहीं समा रहे हैं। वैसे तो हर साल दुनिया भर से बड़ी संख्या में राम और सीता भक्त यहाँ आते है, पर इस बार 22 जनवरी 2024 को यहाँ बहुत बड़े आयोजन की तैयारी की जा रही है। जनकपुर में लगभग 90 तालाब हैं, जिन्हें खास तौर पर सजाया जा रहा है। यह भी मान्यता है कि राम भक्तों के लिए पवित्र जानकी मंदिर की यात्रा के बिना तीर्थयात्रा पूरी नहीं होती।
जनकपुरी में बढ़ रहे पर्यटक
पिछले कुछ वर्षों में जनकपुर में पर्यटकों का आना जाना काफी बढ़ गया है। पहले पर्यटक केवल बिभा पंचमी, राम नवमी, जानकी नवमी और झूलनोत्सव जैसे प्रमुख त्योहारों पर ही जनकपुर आते थे, लेकिन अब पूरे साल पर्यटक आ रहे हैं। अब हर साल राम के जन्मस्थान अयोध्या से एक बारात भी धूमधाम से जनकपुर पहुंचती है। इस विवाह जुलूस के साथ भी भारतीय पर्यटक काफी संख्या में आते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 2018 में माँ सीता के मायके जनकपुर आए थे। तब उन्होंने कहा था- "नेपाल के बिना राम अधूरे हैं। मोदी जब भी नेपाल आए पूरी तरह धार्मिक रंग में दिखे।
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण में नेपाल का सहयोग
नेपाल ने अयोध्या में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा बनाए जा रहे राम मंदिर के लिए विशेष सहयोग दिया है। भगवान राम और सीता की मूर्तियां बनाने के लिए नेपाल की काली गंडकी नदी से ही दो शालिग्राम की शिलाएं अयोध्या आईं हैं। माता सीता के जन्मस्थान जनकपुर के पास काली गंडकी नदी में शालिग्राम बहुतायत में पाए जाते हैं।
जानकी मंदिर के महंत राम तपेश्वर दास स्वयं इस साल की शुरुआत में शालिग्राम लेकर राम की नगरी अयोध्या पहुंचे थे। नेपाल से ही श्रीराम के लिए अष्टधातु से बना धनुष भी आ रहा है। राम और सीता की मूर्तियों को तराशने के लिए नेपाली कारीगर भी काम कर रहे हैं।












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