Army Day: आर्मी डे के मौके पर जानिए सेना की रेजीमेंट्स और उनके जोशीले युद्ध उद्घोष के बारे में
नई दिल्ली। 'नाम, नमक और निशान,' के लिए लड़ने वाली भारतीय सेना की कई रेजीमेंट्स इसी को फॉलो करती हैं। नाम मतलब रेजीमेंट, नमक मतलब देश और निशान मतलब देश और पलटन का झंडा, यह एक बात इंडियन आर्मी का मुख्य सिद्धांत होता है। इसके अलावा भारतीय सेना की हर रेजीमेंट का अपना एक युद्ध उद्घोष या वॉर क्राइ होता है। वॉर क्राइ यानी युद्ध के समय पर एक सैनिक को प्रेरणा देने वाले वह शब्द जो दुश्मन पर भारी पड़ जाए। आज आर्मी डे के मौके पर हम आपको भारतीय सेना की कुछ रेजीमेंट्स की कुछ ऐसी वॉर क्राइ से रूबरू कराने जा रहे हैं, जिन्हें जानने के बाद निश्चित तौर पर आप भी जोश से भर जाएंगे।

गोरखा राइफल्स
जय मां काली, आयो गोरखाली। भारत की आजादी के बाद भारत, नेपाल और ब्रिटेन के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता साइन हुआ था। इसके तहत ब्रिटिश इंडियन आर्मी की 10 गोरखा रेजीमेंट्स में से छह इंडियन आर्मी का हिस्सा बन गई थीं।

गढ़वाल राइफल्स
बदरी विशाल लाल की जय, गढ़वाल राइफल्स की स्थापना बंगाल आर्मी के तहत सन् 1887 में हुई थी और यह बंगाल आर्मी की 39वीं रेजीमेंट थी। बाद में यह ब्रिटिश आर्मी का हिस्सा बनी और आजादी के बाद इंडियन आर्मी में शामिल हो गई।

ब्रिग्रेड ऑफ गार्ड्स
गरुण का हूं बोल प्यारे, यह इस रेजीमेंट की वॉर क्राइ है और इसका ध्येय है, 'पहला हमेशा पहला।' इस रेजीमेंट को इंडियन आर्मी के पहले फील्ड मार्शल केएम करियप्पा के दिमाग की उपज माना जाता है। उन्होंने ब्रिगेड ऑफ गार्ड्स की स्थापना की और इसके लिए, 'द गार्ड्स, द एलीट,' यह कथन शुरू किया।

पंजाब रेजीमेंट
जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल, बोल ज्वाला मां की जय। पंजाब रेजीमेंट, इंडियन आर्मी की सबसे पुरानी रेजीमेंट्स में से एक है। इसकी स्थापना ब्रिटिश इंडियन आर्मी के तहत सन् 1947 में हुई थी और इसे ब्रिटिश आर्मी की दूसरी पंजाब रेजीमेंट के तहत तैयार किया गया था। इस रेजीमेंट ने तब से कई तरह के युद्धों में हिस्सा लिया और हमेशा अजेय रही।

मद्रास रेजीमेंट
वीरा मद्रासी, अदि कोल्लू, अदि कोल्लू, मद्रास रेजीमेंट सेना की सबसे पुरानी इंफ्रेंट्री रेजीमेंट है और इसकी शुरुआत सन् 1750 में हुई थी। इस रेजीमेंट ने ब्रिटिश इंडियन आर्मी के साथ मिलकर कई कैंपेन में हिस्सा लिया और आजादी के बाद भी यह सेना का अभिन्न अंग बन गई।

ग्रेनेडियर्स रेजीमेंट
इस रेजीमेंट का मोटो और वॉर क्राइ एक ही है यानी सर्वदा शक्तिशाली, ग्रेनेडियर्स का पहला जिक्र सन् 1684 में मिलता है। इस रेजीमेंट ने दूसरे एंग्लो-अफगान वॉर, तीसरे बर्मा वॉर, पहले और दूसरे विश्व युद्ध के अलावा भारत और पाकिस्तान के बीच सन् 1965 और 1971 में हुए युद्ध के अलावा सन् 1999 में हुई कारगिल संघर्ष में भी हिस्सा लिया था।

मराठा लाइट इंफ्रेट्री
बोल श्री छत्रपति शिवाजी महाराज की जय, इस युद्ध उदघोष वाली मराठा लाइट इंफ्रेंट्री 16वीं, 17वीं और 18वीं सदी से ही भारत की ताकत बनी हुई है। मुगलों और फिर ब्रिटिश शासकों के खिलाफ इस रेजीमेंट ने छत्रपति शिवाजी महाराज के नेतृत्व में बहादुरी से मोर्चा लिया था।

जाट रेजीमेंट
जाट बलवान, जय भगवान, जाट रेजीमेंट एक इंफ्रेंट्री रेजीमेंट है। इस रेजीमेंट ने सन् 1839 से 1947 के बीच 19 युद्ध सम्मान जीते और आजादी के बाद इसे पांच युद्ध सम्मानों से नवाज गया। रेजीमेंट के हिस्से आठ महावीर चक्र, आठ कीर्ति चक्र, 32 शौर्य चक्र, 39 वीर चक्र और 170 सेना मेडल्स अब तक आ चुके हैं।

सिख रेजीमेंट
जो बोले सो निहाल सत श्री अकाल, सिख रेजीमेंट ने कारगिल की जंग में टाइगर हिल, हेलमेट और इंडिया गेट जो टाइगर हिल का पश्चिमी हिस्सा है, वहां से दुश्मनों को द्रास में सात और आठ जुलाई की रात को हटाया था। इस रेजीमेंट के हिस्से 1652 गैलेंट्री अवॉर्ड्स हैं।

डोगरा रेजीमेंट
ज्वाला माता की जय, इस रेजीमेंट को सन् 1922 में संगठित किया गया था।

कुमांऊ रेजीमेंट
कालिका माता की जय बजरंग बली की जय दादा किशन की जय।
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