इतिहास के पन्नों से-आओ चले बाबा गरीब नवाज की नगरी में
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला)। अगर भारत में गंगा-जमुनी तहजीब को देखना है तो आपको अजमेर जरूर जाना चाहिए। ये पुरातन शहर है। ये गरीब नवाज का शहर है। आप इधर जाएं तो पहले दिन तो आप अजमेरशरीफ डेरा डालें और शाम को ख्वाजा की दरगाह पर चादर चढ़ाएं।

जब अकबर आया
कहते हैं कि मुग़ल सम्राट अकबर सूफी संत मुईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में जाते थे। कहा तो यहां तक जाता है कि वे एक बार आगरा से पैदल ही गरीब नवाज की दरगाह पर गए थे।मुईनुद्दीन चिश्ती 12वीं शती ई. में ईरान से भारत आए थे।
झील को जरूर देख लें
आप अजमेर जाएं और करीब की अनासागर झील को देखने ना जाएं यह नहीं हो सकता। इसकी सुन्दर गजब की है। यह झील अजमेर-पुष्कर मार्ग पर है।
और जाएं पुष्कर
वरिष्ठ लेखक शंभूनाथ शुक्ल ने बताया कि अजमेर के पास करीब 12 किमी दूर पुष्कर है। वहां पर इकलौता ब्रह्मा का मंदिर देखें और अगर श्रद्घा हो तो सरोवर में स्नान करें। वहां के पंडे को भी दान-दक्षिणा दें।
लेकिन अगर आप में सौंदर्य बोध है तो पुष्कर से सरोवर के किनारे के किसी ऊँचे स्थान पर खड़े होकर पहाडिय़ों के पार दूर मरुस्थल को निहारें। खासकर गोधूलि वेला में जब सूर्य डूब रहा हो।
क्षितिज में धीरे-धीरे बिलाते सूर्य को अलविदा करने और नमस्कार करने का मन तो करता ही है भले आप सूर्योपासना करते हों अथवा नहीं। ठीक उसी तरह जिस तरह जियारत के वक्त ख्वाजा गरीब नवाज से कुछ मांग लेने का मन करता है। अजमेर में लेक के ऊपर बना सरकिट हाउस शानदार है और आरामदेह भी।
सख्त सोहनहलवा
लेकिन ख्वाजा की गली में बिकने वाला सोहनहलवा को दांत से तोडऩा तो इतना मुश्किल है कि दांत कमजोर हों तो गए समझिए। अब आप समझ ही गए होंगे कि राजस्थान का ये शहर क्यों खास है। आखिर शी शहर में उस सूफी फकरी की दरगाह है, जहां पर दुनिया के बड़े से बड़े लोग आते है और जियारत करते हैं। इसलिए आपको भी इधर घूमने का कार्यक्रम बनाना चाहिए।












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