Abu Dhabi Temple: अबू धाबी में मंदिर से सनातन को ग्लोबल धर्म की पहचान
Abu Dhabi Temple: अबू धाबी में पहले हिंदू मंदिर का उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी बुधवार को करेंगे। मंदिर में भगवान की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में वह मुख्य अतिथि होंगे। पारंपरिक भारतीय वास्तुकला के आधार पर संयुक्त अरब अमीरात सरकार के सहयोग से बने इस मंदिर को सहिष्णुता और सद्भाव का प्रतीक माना जा रहा है।
अरब मीडिया का मानना है कि इस मंदिर के कारण सनातन को एक ग्लोबल धर्म की भी पहचान मिलने वाली है। एक इस्लामी देश में बिना किसी पाबंदी या रोक टोक के विधिवत पूजा होगी।

करोड़ों लोग आते हैं अबू धाबी
अबू धाबी संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राजधानी है, जहां हर साल लगभग डेढ़ करोड़ विदेशी पर्यटक घूमने आते हैं। अन्य स्थलों की तरह अबू धाबी का मंदिर भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद होगा। अमीरात वैसे भी आधुनिक वास्तुकला और शानदार संस्कृति वाला देश है। यहां ऐतिहासिक स्मारक, थीम पार्क और बड़ी इमारतें लोग देखने आते हैं। अमीरात का इतिहास 3000 ईसा पूर्व का है। हाल के वर्षों में इसे चकाचौंध और ग्लैमर से भरपूर मेगासिटी के रूप में विकसित किया गया है।
अबू धाबी के संस्कृति और पर्यटन विभाग के आंकड़े के अनुसार इस समय अमीरात में लगभग 14 मिलियन अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आते हैं और हर साल इसमे लगभग 10.5% की वृद्धि हो रही है। अधिकांश मेहमान भारत, फिलीपींस, मिस्र, ब्रिटेन और यूरोप के अन्य देशों से आते हैं। अब मंदिर की अद्भुत छटा पर्यटकों को अबू धाबी आने के लिए प्रेरित करेगी।
मंदिर और मस्जिद दोनों का सह अस्तित्व रहेगा
अमीरात की सरकार ने कठोर इस्लामी कानून के बजाय अलग अलग संस्कृतियों के लिए ओपन-डोर नीति अपनाई है। इससे अन्य मतावलंबियों को भी यह देश आकर्षित करता है। दुनिया की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक मस्जिद अबू धाबी में है। इस मस्जिद में एक दिन में लगभग 55,000 आगंतुक नमाज अता कर सकते हैं। यह मस्जिद अपने संगमरमर के गुंबदों, नीलम और जैस्पर-एम्बेडेड स्तंभों, प्रतिबिंबित पूल, प्रतिष्ठित प्रार्थना कक्ष और साथ ही सोने की परत वाले झूमरों के लिए जानी जाती है।
अबू धाबी के मंदिर निर्माण में पर्यावरण और लोकाचार का भी पूरा पालन किया गया है। नींव में 55 प्रतिशत फ्लाई ऐश का उपयोग किया गया है। भारत के गुलाबी बलुआ पत्थरों के साथ इटली के सफेद संगमरमर ने इसकी खूबसूरती खूब बढ़ाई है। इसका डिजाइन इस तरह से तैयार किया गया है कि इसके निर्माण में लोहे या स्टील का कोई उपयोग नहीं हुआ है।
संयुक्त अरब अमीरात में सात अमीरातों के प्रतीक स्वरूप मंदिर के सात शिखर बने हैं। मंदिर परिसर 27 एकड़ भूमि पर बना है जिसे संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने दान किया है। यह दो संस्कृतियों के सह अस्तित्व का अनुपम उदाहरण है। 108 फीट की ऊंचाई पर स्थित, दुबई-अबू धाबी राजमार्ग से अबू मुरीखाह में मुड़ते हैं तो मंदिर के सातों शिखर दूर से देखे जा सकते हैं।
भारत-अमीरात मित्रता का प्रतीक बना यह मंदिर
अबू धाबी के इस मंदिर के प्रवेश द्वार पर भारत और संयुक्त अरब अमीरात के झंडे लगाए गए हैं। इसके साथ ही 'वॉल ऑफ हार्मनी' बनाई गई है। यह संयुक्त अरब अमीरात में बोहरा समुदाय की ओर से दी गई भेंट है। प्रबंधकों का कहना है कि मंदिर निर्माण का उद्देश्य संस्कृतियों और समुदायों को एक साथ लाना है, जो राष्ट्र में निहित सहिष्णुता की भावना को बढ़ावा देता है।
अरब से प्रकाशित खलीज टाइम्स ने लिखा है कि 14 फरवरी को उद्घाटन से पहले अबू धाबी बीएपीएस हिंदू मंदिर में धार्मिक उत्साह की लहर और उत्सव का माहौल है। आध्यात्मिक नेता महंत स्वामी महाराज का स्वागत करने के लिए समुदाय के सैकड़ों सदस्य और भक्त मंदिर के बाहर कतार में खड़े हैं। वह एक विशेष उड़ान से अबू धाबी में राज्य अतिथि के रूप में पहुंचे हैं।
महंत स्वामी महाराज मंदिर के उद्घाटन के लिए वैदिक समारोह का नेतृत्व करेंगे। उनकी अगुवानी करते हुए शेख नाहयान ने कहा- यूएई में आपका स्वागत है। हमारा राष्ट्र आपकी उपस्थिति से धन्य है। हम आपकी दयालुता से प्रभावित हैं और हम आपकी प्रार्थनाओं को महसूस करते है। सनातन का यह ग्लोबल होने का द्योतक है।












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