तस्वीरों में: ये हैं भारत के 6 स्पेशल फोर्सेज, जिनसे कांपते हैं दुश्मन
भारत दुनिया में सबसे तेजी से उभरता देश है। यहां की अर्थव्यवस्था विकसित देशों के पायदान को छूने क कगार पर है। लेकिन भारत अपने पड़ोसी देशों के कारण हमेशा से आंतकवाद की समस्याओं को जूझता रहा है।
दुनिया के 7वें सबसे बड़े देश की सुरक्षा करना इतना आसान नहीं होता अगर हमारे पास जबांज सिपाही न होते। जी हां भारत के पास भी उनके जाबांद सिपाही के साथ-साथ आतंक का खात्मा करने के लिए स्पेशल सिक्योरिटी फोर्सेज आगे आती हैं। देश के उन बहादुर सिपाहियों की फौज के बारे में आपको बताते है जिनके नाम से ही थर्राते हैं दुश्मन

नेशनल सिक्योरिटी गार्ड
नेशनल सिक्योरिटी गार्ड यानी एनएसजी। ये भारत की सबसे प्रमुख सिक्योरिटी फोर्स है। इसका इस्तेमाल टेररिस्ट एक्टीविटी को रोकने और राज्य में हो रहे इंटरल डिस्टरबेंस को संभालने के लिए किया जाता है। इसे आम भाषा में एनएसजी, ब्लैक कैट या कमांडो के नाम से जाना जाता है। 1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद इसकी की स्थापना की गई।

स्पेशल फ्रंटियर फोर्स
इस स्पेशल फोर्स का गठन 1962 में हुआ था। सीनो-इंडियन वॉर के दौरान इस फोर्स ने चाइनीज लाइन पर एक ऑपरेशन चलाया था। यह फोर्स भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के साथ रहकर काम करती है।

गार्ड
गार्ड इंडियन एयरफोर्स की एक स्पेशल फोर्स यूनिट है। जिसका गठन 2004 में किया गया था। इसका नाम गरुड़ पक्षी के नाम पर रखा गया। आंतकी गतिविधियों को रोकने के लिए इस फोर्स का इस्तेमाल होता है।

पारा कमांडो
पैरा कमांडो भारतीय सेना का हिस्सा है। ये फोर्स रेस्क्यू ऑपरेशन, आंतकी गतिविधियों, होस्टेज रेस्क्यू जैसे खास ऑपरेशन के लिए जानी जाती है। इसका गठन 1966 को किया गया था।

मार्कोज मैराइन कमांडो
ये कमांडो इंडियन नेवी का हिस्सा है। ये फोर्स काउंडर टैरेरिज्म, डायरेक्ट एक्शन, होस्टेज रेस्क्यू जैसे ऑपरेशन को अंजाम देती है। इसका गठन 1987 में किया गया था। यह लगभग यूएस की नेवी SEAL से मिलती-जुलती है।

स्पेशल प्रोजेक्शन फोर्स
इस स्पेशल फोर्स का गठन 1988 में किया गया था। इसका मुख्य काम पीएम, फॉर्मर पीएम और उनकी फैमिली को सुरक्षित रखना होता है। इन फोर्स के कमांडो के पास कई अत्याधुनिक हथियारों होते हैं।












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