Shravana: 19 वर्ष बाद बन रहा श्रावण में अधिकमास का संयोग, दो चरणों में 59 दिन का होगा सावन
Shravana: इस वर्ष श्रावण (सावन) अधिकमास का संयोग 19 वर्ष बाद फिर बन रहा है। इसके चलते चातुर्मास पांच माह का होगा। विक्रम संवत 2080 यानी वर्ष 2023 में 19 वर्ष के बाद श्रावण अधिकमास होगा। इससे पहले 2004 में सावन दो माह का था। इस बार 4 जुलाई से सावन की शुरूआत होगी और 31 अगस्त को श्रावण के दो मास पूरे होंगे। अधिकमास 18 जुलाई से 16 अगस्त तक रहेगा। इस दौरान शुभ और मांगलिक कार्यों पर पूरी तरह से रोक रहेगी।
अधिकमास का संयोग
इससे पहले श्रावण अधिकमास का संयोग विक्रम संवत 1847, 1966, 1985, 2004, 2015, 2023, 2042 और 2061 में बना था। सावन के महीने का शिवभक्त इंतजार करते हैं। इस महीने में पूरा वातावरण शिवमय हो जाता है। साथ ही इस बार मलमास भी सावन महीने में आएगा। जिसे पुरूषोत्तममास और अधिकमास भी कहते हैं। सावन पहले 13 दिन यानी 4 जुलाई से 17 जुलाई तक रहेगा। इसके बाद 18 जुलाई से 16 अगस्त तक अधिक मास मलमास रहेगा। इसके बाद 17 अगस्त को फिर से सावन शुरू हो जाएगा। यानी दो चरणों में सावन का महीना मनाया जाएगा।

बहेगी शिव भक्ति की बयार
सावन का महीना तकरीबन दो माह का होगा। हर सावन में चार या पांच सोमवार ही आते हैं और शिवभक्त भगवान भोले की पूजा अर्चना करते थे। लेकिन इस बार सावन में आठ सोमवार आएंगे। इसलिए इस बार दो महीने तक शिव भक्ति की बयार रहेगी। इस दौरान भगवान भोलेनाथ का अभिषेक, रुद्राभिषेक, जलाभिषेक, गंगा जल व इक्षु रस से अभिषेक किया जाता है। साथ ही भक्त गंगा से कावंड भरकर भी लाते हैं और शिवजी को गंगा जल अर्पित करते हैं।
सावन में शिवजी पर जलाभिषेक का महत्व
शिव पुराण के अनुसार सावन में ही समुद्र मंथन हुआ था, जिसमें शिवजी ने विष पान कर समस्त सृष्टि की रक्षा की थी लेकिन इस हलाहल विष के कारण वह असहज हो गये और उनके गले में असहनीय दर्द उठा। विष के प्रभाव को कम करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने उन्हें जल अर्पित किया। यही वजह है कि सावन में शिवलिंग पर जलाभिषेक का विधान है। मान्यता है सावन में शुभ तिथियों पर शिवलिंग पर जलाभिषेक किया जाए तो व्यक्ति के सारे दुख, दोष व रोग दूर हो जाते हैं।
सावन सोमवार के व्रत का महत्व व पूजा विधि
सनातन धर्म शास्त्रों में निहित है कि चिरकाल में जगत जननी आदिशक्ति मां पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठिन तपस्या की। साथ ही सावन के महीने में सोमवार का व्रत-उपवास कर विधिवत शिवजी की पूजा की। उनकी कठिन भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें मनोवांछित वरदान दिया। बाद में सावन सोमवार व्रत के पुण्य-प्रताप से मां पार्वती और भगवान शिव का विवाह हुआ। अत: सावन सोमवार का विशेष महत्व है। इस वजह से मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए सावन सोमवार व्रत रखा जाता है। इसके अलावा शिव कृपा प्राप्ति के लिए सावन सोमवार व्रत रखते है। इस दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें और इसके बाद भगवान शिव का जलाभिषेक करें। साथ ही देवी पार्वती और नंदी को भी गंगाजल या दूध चढ़ाएं।
प्रदोष काल में पूजन करना श्रेष्ठ
सोमवार को पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 38 मिनट से शुरू होकर 7 बजकर 22 मिनट तक चलेगा। शास्त्रों के मुताबिक प्रदोष काल में पूजा करने से शिव प्रसन्न होते हैं। इसीलिए शाम के मुहूर्त में पूजा करने से बहुत ही शुभ फल मिलता है। पूजा के दौरान शिव को प्रिय बेलपत्र, धतूरा, भांग, फल और कच्चा दूध अर्पण करें। कुंवारी लड़कियां अगर इस मुहूर्त में महादेव को प्रसन्न करेंगी तो उनको मनचाहा वर प्राप्त होगा। इसके बाद शिव चालीसा, शिव तांडव स्त्रोत आदि का पाठ करें। अंत में आरती अर्चना कर इच्छा के अनुसार (सुख, समृद्धि, शीघ्र विवाह, दांपत्य जीवन में मिठास) कामना करें।
इस बार सावन के आठ सोमवार
● सावन का पहला सोमवार - 10 जुलाई
● सावन का दूसरा सोमवार - 17 जुलाई
● सावन का तीसरा सोमवार - 24 जुलाई
● सावन का चौथा सोमवार - 31 जुलाई
● सावन का पांचवा सोमवार - 07 अगस्त
● सावन का छठा सोमवार - 14 अगस्त
● सावन का सातवां सोमवार - 21 अगस्त
● सावन का आठवां सोमवार - 28 अगस्त
खास है सातवां व आठवां सोमवार
21 अगस्त सावन के सातवें सोमवार को शुभ योग बन रहा है। यह योग 20 अगस्त को रात 10:20 बजे से लेकर 21 अगस्त को रात 9 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। शुभ योग में योग के अनुसार भाग्यशाली या शुभ कार्य करना अत्यधिक लाभकारी होता है और अन्य कार्य जैसे यात्रा, गृहप्रवेश पार्टी, नया काम शुरू करना, विवाह आदि भी लाभकारी व शुभ माने जाते हैं। इसी प्रकार 28 अगस्त यानी सावन के आठवें सोमवार को आयुष्मान योग बन रहा है। यह योग 27 अगस्त को दोपहर 1:26 बजे से 28 अगस्त को सुबह 9:56 बजे तक रहेगा। इस योग में भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने और जलाभिषेक करने से दीर्घायु का लाभ मिलता है।
अधिकमास के चलते प्रमुख त्यौहारों की तिथियों में आया बदलाव
श्रावण अधिकमास के चलते विभिन्न त्यौहारों की तिथियों में भी बदलाव आएगा। व्रत की पूर्णिमा 1 अगस्त को होगी। संकष्टी चतुर्थी 4 अगस्त, पुरुषोत्तम मास का समापन 16 अगस्त को होगा। व्रत की पूर्णिमा, यजुर्वेदियों का उपाकर्म, रक्षाबंधन 30 अगस्त को होगा। ऋग्वेदियों का उपाकर्म 29 अगस्त को होगा। 31 अगस्त को माह का समापन होगा। आषाढ़ पूर्णिमा से एक माह बाद रक्षाबंधन होता है। इस बार रक्षाबंधन 30 अगस्त को होगा। बहनों को भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए आषाढ़ पूर्णिमा के बाद दो माह का इंतजार करना पड़ेगा।












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