45 साल पहले पाक ने आज की थी बड़ी गलती, इंदिरा बन गईं थी दुर्गा

भारत और पाकिस्‍तान के बीच बढ़े तनाव के बीच ही दोनों देशों के बीच1971 में हुई जंग ने अपने 45 वर्ष पूरे कर लिए हैं। जंग के 45 वर्ष पूरे होने के दिन ही पाकिस्‍तान से आ रहे हैं सरताज अजीज।

नई दिल्‍ली। भारत और पाकिस्‍तान के बीच उरी आतंकी हमले के बाद तनाव एक नए अलग ही स्‍तर पर है। दोनों देशों के बीच बातचीत बंद है लेकिन आरोपों का दौर जारी है। इस बीच नगरोटा आतंकी हमले ने कड़वाहट को और बढ़ा दिया है।

इन सबके बीच ही दोनों देशों के बीच 1971 में हुई जंग के 45 वर्ष पूरे हो गए हैं। भारत और पाक के बीच तीन दिसंबर 1971 को दूसरी जंग का ऐलान हुआ था।

इस जंग में पाकिस्‍तान को हार का सामना करना पड़ा था और जंग के बाद उस समय भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी एक नए आदर्श के तौर पर सामने आई थीं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने तो उन्‍हें देवी दुर्गा की तरह बता डाला था।

आइए आज हम आपको इस जंग से जुड़े कुछ रोचक तथ्‍यों और कुछ खास तस्‍वीरों से रूबरू करवाते हैं। आज के माहौल में इन तथ्‍यों को जानना काफी जरूरी है।

पाक ने शुरू किए थे हमले

पाक ने शुरू किए थे हमले

तीन दिसंबर 1971 को पाक ने ऑपरेशन चंगेज खान के तहत इंडियन एयरफोर्स के 11 एयरबेस पर हमले शुरू कर दिए थे। पाक ने ईस्‍ट पाकिस्‍तान में छिड़े बांग्‍लादेशी नेशनलिस्‍ट मूवमेंट में भारत की एंट्री से चिढ़कर इन हमलों का आगाज किया था। पाकिस्‍तान ने करीब 50 एयरक्राफ्ट्स भारत की ओर भेजे थे जिनसे श्रीनगर, अंबाला, अमृतसर, पठानकोट, आगरा, जोधपुर, उत्‍तरलई, अवंतिपुर, हलवारा और फरीदकोट जैसे एयरबेस पर हमले किए गए।

इजरायल की तर्ज पर पाक के हमले

इजरायल की तर्ज पर पाक के हमले

पाक ने भारत पर जो हमले के लिए उसमें उसने इजरायल के अरब-इजरायली एयर ऑपरेशन, ऑपरेशन फोकस से प्रेरणा ली थी जो छह दिन तक चला था। वर्ष 1967 में इजरायल ने अरब के कई एयरबेसेज पर हमले किए थे। पाक ने इसी से प्रेरणा लेकर भारत पर हमले शुरू किए थे।

इतिहास का सबसे छोटा युद्ध

इतिहास का सबसे छोटा युद्ध

यह जंग 13 दिन तक चली थी और 16 दिसंबर को भारत की जीत के साथ यह अपने अंजाम पर पहुंची थी। इस वजह से इसे इतिहास के सबसे छोटे युद्ध का दर्जा मिला हुआ है। इस युद्ध के दौरान भारत और पाक दोनों ही ईस्टर्न और वेस्‍टर्न फ्रंट पर जंग लड़ रहे थे।

4,000 सॉर्टीज और पाक तबाह

4,000 सॉर्टीज और पाक तबाह

इस युद्ध में इंडियन एयरफोर्स के पायलट्स ने करीब 4,000 सॉर्टीज के बाद पाकिस्‍तान एयरफोर्स की 14 स्‍क्‍वाड्रन को तबाह करके रख दिया था। इंडियन एयरफोर्स ने इस दौरान मिग-21 और हंटर जैसे जेट्स की मदद से पाक को करारा जवाब दिया था। उस समय मिग-21 ने पाकिस्‍तान एयरफोर्स के तेजगांव जैसे एयरबेस पर 500 किलो बम और 57 एमएम के रॉकेट से हमले किए थे।

पाक के कितने सैनिक

पाक के कितने सैनिक

पाकिस्‍तान के 93,000 गिरफ्तार लोगों में 76,676 से 81,000 सैनिकों को इंडियन आर्मी ने हिरासत में लिया था जिसमें कुछ बंगाली सैनिक भी शामिल थे। ये बंगाली सैनिक वे सैनिक थे जो आखिरी तक पाक के साथ ही ही थे। 10,324 से 15,000 आम पाक नागरिक थे। बांग्‍लादेश में करीब 300,000 से 3,000,000 नागरिकों की मौत इसमें हुई थी। करीब 10 मिलियन बांग्‍लादेशी नागरिकों ने भारत में शरण ली जिनमें ज्‍यादातर हिंदु थे।

सरकार और सेना का टकराव

सरकार और सेना का टकराव

1971 अप्रैल के अंत में पीएम इंदिरा गांधी ने उस समय के इंडियन आर्मी चीफ सैम मानेकशॉ से पूछा कि क्‍या वह युद्ध के लिए तैयार हैं। मानेकशॉ ने एक इंटरव्‍यू में बताया था कि उन्‍होंने पीएम को युद्ध के लिए कुछ मुश्किलों की वजह से मना कर दिया था जिसमें मौसम सबसे अहम वजह था। मानेकशॉ ने इस्‍तीफे तक की पेशकश कर डाली थी और इंदिरा ने मना कर दिया था। तब मानेकशॉ ने कहा कि वह सिर्फ एक शर्त पर जीत की गारंटी दे सकते हैं अगर उन्हें युद्ध के लिए अपनी शर्तों पर तैयारी करने दी जाएगी।

आर्मी और एयरफोर्स के बाद नेवी की ताकत

आर्मी और एयरफोर्स के बाद नेवी की ताकत

इस युद्ध में इंडियन नेवी ने ऑपरेशन ट्राइडेंट की शुरुआत की थी। चार और पांच दिसंबर को इंडियन नेवी कराची के पोर्ट पर हमला किया और इस हमले में पाक नेवी के पीएनएस खैबर और पीएनएस मुहाफिज पूरी तरह से खत्‍म हो गए थे तो पीएनएस शाहजहां पूरा बर्बाद हो गया था।

किसके कितने सैनिक

किसके कितने सैनिक

71 की जंग में भारतीय सेनाओं के 500,000 सैनिकों ने हिस्‍सा लिया था तो वहीं मुक्ति वाहिनी के 175,000 सैनिकों ने भारत की मदद की। वहीं अगर पाकिस्‍तान की बात करें तो यह आंकड़ा 365,000 सैनिकों था।

 पाक को समर्थन कर रहा था अमेरिका

पाक को समर्थन कर रहा था अमेरिका

नौ दिसंबर को तत्‍कालीन अमेरिकी राष्‍ट्रपति रिचर्ड निक्‍सन ने बंगाल की खाड़ी में भारत को डराने के मकसद से एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस एंटरप्राइज को भेजा। योजना भारत को चारों ओर से घेरने की थी ताकि भारत की सेनाएं ईस्‍ट पाकिस्‍तान से चली जाएं।

 आईएनएस विक्रांत का हमला

आईएनएस विक्रांत का हमला

युद्ध के दौरान आईएनएस विक्रांत ने ईस्‍ट पाकिस्‍तान के कई तटीय इलाकों पर हमले किए। वहीं नौ दिसंबर को इंडियन नेवी को अपने सबसे बड़े नुकसान से रूबरू होना पड़ा जब आईएनएस खुकरी पानी में डूब गया था।

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