जानिए रील नहीं रीयल 'रूस्तम' केएम नानावटी की असली कहानी
मुंबई। जल्द ही एक फिल्म रिलीज होने वाली है 'रूस्तम,' जिसमें अक्षय कुमार इंडियन नेवी के ऑफिसर का रोल निभा रहे हैं। ट्रेंड की ही तरह यह फिल्म भी एक सच्ची घटना पर आधारित है। 50 के दशक में इंडियन नेवी के एक ऑफिसर कमांडर केएम नानावटी ने अपने ही एक दोस्त का मर्डर कर दिया था। फिल्म की कहानी उसी घटना का पर्दे पर उतारती है।

यह एक ऐसा केस था जिसने उस समय काफी सुर्खियां बटोरी थीं। उस समय पब्लिश होने वाले टेबलॉयड ब्लिट्ज ने इस केस को 'थ्री शॉट्स दैट शूक द नेशन,' इस हेडलाइन के साथ पहली बार जगह दी।
आइए आज आपको उसी दौर में लेकर चलते हैं और उसी केस के बारे में बताते हैं।
क्या हुआ था उस समय
- पारसी कमांडर कवास मानेकशॉ नानावटी इंग्लिश पत्नी सिल्विया और बच्चों के साथ मुंबई में रहते थे।
- नानावटी घर से दूर रहते थे औरपत्नी सिल्विया का अफेयर पति के दोस्त प्रेम आहूजा के साथ शुरू हो गया।
- 21 अप्रैल 1959 को सिल्विया ने नानावटी को सब कुछ बताया और कहा कि प्रेम उनसे शादी नहीं करना चाहते हैं।
- नानावटी ने अपने परिवार मेट्रो सिनेमा पर ड्रॉप किया और खुद नेवल बेस पहुंच गए।
- यहां पर उन्होंने अपनी पिस्टल ली और बहाना बनाकर छह बुलेट्स लीं।
- नानावटी आहूजा के घर और सिल्विया के साथ शादी से इंकार पर नानावटी ने तीन बार आहूजा पर फायर किया।
- वेस्टर्न नेवल कमांड के मार्शल की सलाह पर नानावटी ने मुंबई के डिप्टी कमिश्नर के सामने सरेंडर कर दिया।
- नानावटी को एक सच्चा देशभक्त माना जाता था और उनके इस गुनाह का कोई और गवाह नहीं था।
- आहूजा की बहन मैमी नेइस बात को खारिज कर दिया कि गुस्से में उनके भाई की हत्या नहीं हुई थी।
- बांबे हाईकोर्ट में उस समय आहूजा का केस मशहूर वकील राम जेठमलानी लड़ रहे थे।
- बांबे हाईकोर्ट ने नानावटी को दोषी पाया और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई।
- इसके बाद नानावटी ने सजा के खिलाफ वर्ष 1961 में सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
- सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 1961 पर हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
- नानावटी पारसी थे तो आहूजा सिंधी और केस की वजह से दोनों समुदायों के बीच तनाव का माहौल था।
- महाराष्ट्र की राज्यपाल विजय लक्ष्मी पंडित को एकसिंधी बिजनेसमैन भाई प्रताप की दया याचिका मिली थी।
- भाई प्रताप को माफी देने की बात पर ब्यूरोक्रेट्स सहमत थे और फिर नानावटी को भी माफी देने की बात हुई।
- विजय लक्ष्मी पंडित ने कहा कि भाई प्रताप को नानावटी को माफी मिलने के बाद माफी दी जाएगी।
- उन्होंने यह फैसला दोनों समुदायों में शांति और सौहार्द स्थापित हो सके इस वजह से दिया था।
- मैमी आहूजा ने सरकार के अनुरोध को माना और नानावटी तीन वर्ष जेल में बिताने के बाद रिहा हो गए।
- इसके बाद वह पत्नी सिल्विया और बच्चों के साथ कनाडा चले गए और फिर किसी ने उनका नाम नहीं सुना।
- वर्ष 2003 में जब उनकी मौत हुई तो कई वर्षों बाद उनकी खबर भारत आई।
- आज भी सिल्विया अपने बच्चों के साथ कनाडा में ही हैं।












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