Vicky Vidya Ka Woh Wala Video Movie Review: राज शांडिल्य की पेशकश करती है निराश
कास्ट- राजकुमार राव, तृप्ति डिमरी, अर्चना पूरन सिंह, टीकू तलसानिया, विजय राज और मल्लिका शेरावत
डायरेक्टर- राज शांडिल्य
रेटिग- 1.5 स्टार
विक्की विद्या का वो वाला वीडियो की कहानी विक्की और विद्या की है। इसमें दोनों बचपन से एक दूसरे को प्यार करते हैं। शादी करना चाहते हैं। विक्की ऋषिकेश में मेहंदी लगाता है। वहीं विद्या डॉक्टर है। एक दिन विक्की घर लौटता है पता चलता है कि विद्या की सगाई हो रही है। जिसे वो तुड़वा देता है। फिर दोनों की शादी हो जाती है। दोनों हनीमून पर जाता हैं वहां विक्की एक खबर पढ़ता है। जिसमें लिखा होता है कि विदेशों में जोड़े शादी की पहली रात का वीडियो बनाते हैं। इस बात के लिए विक्की भी विद्या को मनाता है। थोड़ी ना नुकुर के बाद विद्या भी मान जाती है। दोनों घर लौटते हैं, रात में अपना वीडियो देखते हैं। उसी रात घर में चोरी होती है। चोर वीडियो प्लेयर के साथ सीडी भी ले जाता है। इसके बाद फिल्म में ड्रामा शुरू होता है। यही फिल्म की मोटा माटी कहानी है।
राजकुमार राव ने विक्की का रोल निभाया है। वो अच्छे एक्टर हैं। उनके हिस्से जो पंचेस आए उसे उन्होंने अच्छी तरह से लैंड कराए हैं। लेकिन यहां उनका कुछ खास काम नज़र नहीं आया है। ऐसा लगता है कि वो इस फिल्म में स्त्री 2 के एक्सटेंडेड वर्जन में काम कर रहे हैं।विद्या के रोल में तृप्ति भी ठीक ही हैं। तृप्ती ने बुलबुल और कला जैसी फिल्मों में काम किया है। लेकिन एनिमल के बाद जैसे उनकी छवि ही बदल गई है। अब उन्हें रोल वैसे ही मिल रहे हैं। इस फिल्म में लीड एक्टर से ज्यादा हाइलाइट सपोर्टिंग कास्ट रही। इसमें टीकू तुलसानिया, राकेश बेदी, विजय राज और मल्लिका शेरावत। इन सभी ने फिल्म में जान डाली है। अगर एक लाइन में कहें तो 149 मिनट की फिल्म इन्हीं की वजह से ही आप देख पाएंगे। बाकी फिल्म में बहुत कुछ खास नहीं है।

फिल्म को लिखा और डायरेक्ट राज शांडिल्या ने किया है। राज ने इस कहानी को युसुफ अली खान, इसरत खान और राजन अग्रवाल के साथ मिलकर आकार दिया है। डायलॉग्स भी राज ने बढ़िया लिखे हैं। वन लाइनर पंचेस उनकी राइटिंग का हम हिस्सा है। जिसे वो 2007 से दर्शकों के सामने पेश कर रहे हैं। लेकिन विक्की विद्या का वो वाला विडियो की कहानी में कुछ भी ऐसा नहीं था कि जिसे इतना लंबा खीचा जाए। राज ने फिल्म को जिस पेस के साथ खोला, वो इंटरवल आते आते थकने सी लगती है। लगता है कि अब इसे कहानी को खीचा जा रहा है। टू द पॉइंट जैसा इसमें कुछ नहीं है। फिल्म में ऐसे कई सीक्वेंस हैं, जो फालतू लगते हैं। इसमें वो कब्रिस्तान में भूत वाला सीक्वेंस है। जिसे राज ने स्त्री से जोड़ा है। जो फिल्म में बिल्कुल भी फिट नहीं बैठता है। विजय राज और मल्लिका शेरावता का डांस सीक्वेंस भी समझ नहीं आता वो क्यों था। ड्रीम गर्ल बनाने वाले राज यहां चूक गए हैं।
फिल्म को असीम मिश्रा ने शूट किया है। इस फिल्म में बहुत कुछ कमाल दिखाने जैसा कुछ था नहीं। लेकिन असीम ने अपना काम ठीक किया है। वहीं फिल्म के एडिटिंग की जिम्मेदारी प्रकाश चंद्र साहू की थी। जो बहुत कुछ कर सकते थे। लेकिन उन्होंने अपनी कैंची फिल्म में बहुत सही तरीके से नहीं चलाई। ये भी हो सकता है कि उनपर डायरेक्टर का दबाव हो। जिस वजह से वो फिल्म को अपनी एडिटिंग से वो कसावट नहीं दे पाए। इस वजह से फिल्म देखते देखते आप अपना मोबाइल चलाना शुरू कर देते हैं।
फिल्म 149 मिनट की है। इसमें राज ने जो वन लाइनर और पंचेस लिखे हैं, वो अच्छे हैं। लेकिन एक वक्त के बाद आपको फिल्म बहुत खिंची हुई और लंबी लगने लगती है। इस फिल्म को आप देख सकते हैं। ये फिल्म हंसाती है, अंत में मैसेज भी देने की कोशिश करती है। राज शांडिल्या अपने राइटिंग से कॉमेडी के लिए जाने जाते हैं। लेकिन आपको लगेगा ये फिल्म उन्होंने क्यों बनाई है। यहां भी वही हुआ है। बाकी आप फिल्म देखें और अपनी भी राय बनाएं। फिल्म पर मेरी बात यहीं तक।












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