Saif Ali Khan: पटौदी खानदान का 'साजिद' क्यों बना सैफ? जानिए 'आशिक आवारा' से 'लंगड़ा त्यागी' तक का सफर
Saif Ali Khan: बॉलीवुड के मशहूर एक्टर और चॉकलेटी स्टार सैफ अली खान पर बांद्रा स्थित उनके घर पर एक अज्ञात व्यक्ति ने कथित तौर पर हमला किया, जिसकी वजह से वो घायल हो गए, उन्हें लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी सर्जरी हुई है।
कहा जा रहा है कि सैफ को 6 जगहों पर हमलावर ने अटैक किया, जिसमें से दो चोट काफी गंभीर थी, जिसमें से एक उनकी रीढ़ की हड्डी में और एक उनकी गर्दन पर आई है।

फिलहाल डॉक्टरों का कहना है कि वो खतरे से बाहर हैं, गहन सुरक्षा के बीच उनकी देखभाल की जा रही है। इस वक्त सैफ का पूरा परिवार उनके साथ अस्पताल में मौजूद है।
सैफ अली खान का असली नाम साजिद खान है (Saif Ali Khan)
आपको बता दें कि पटौदी खानदान के 10वें नवाब सैफ अली खान का असली नाम सैफ नहीं है, ये उनका केवल स्क्रीन नेम है, उनका असली नाम साजिद खान हैं।
रीयल और रील नाम हैं अलग-अलग (Saif Ali Khan)
वो मशहूर क्रिकेटर मंसूर अली खान और अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के बेटे हैं और फिल्मों में आने से पहले साजिद खान के नाम से जाने जाते थे, कागजी दस्तावेजों और पासपोर्ट में वो आज भी साजिद खान ही हैं लेकिन बॉलीवुड में एंट्री करने से पहले उन्होंने अपना नाम सैफ रख लिया इसलिए सैफ उनका रीयल नहीं बल्कि रील नेम है, हालांकि आज तक सैफ ने ये राज नहीं बताया कि उन्होंने अपना नाम बदला क्यों?
फिल्म 'आशिक आवारा' से खींचा लोगों का ध्यान (Saif Ali Khan)
एक संभ्रात परिवार में पैदा होने वाले सैफ ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा हिमाचल प्रदेश के लॉरेंस स्कूल से की और इसके बाद उन्होंने इंग्लैंड के विंचेस्टर कॉलेज से अपनी शिक्षा पूरी की। सभी सोचते थे कि वो पापा 'टाइगर' की तरह क्रिकेट में करियर बनाएंगे लेकिन उन्होंने अपनी मम्मी शर्मिला का प्रोफेशन चुना और साल 1993 में उन्होंने फिल्म 'परंपरा' से बॉलीवुड में कदम रखा, हालांकि ये मल्टी स्टार फिल्म थी, जो कि फ्लॉप हो गई, लेकिन इसी साल आई फिल्म 'आशिक आवारा' से सैफ ने लोगों के दिलों में जगह बनाई।
अपने दम पर फिल्में नहीं चलवा सकते, लगा था आरोप (Saif Ali Khan)
सैफ ऐसे एक्टर हैं, जिन्होंने अपने साथ कई प्रयोग किए, इ्न्होंने रोमांटिक, कॉमेडी, एक्शन सब में हाथ आजमाया, 'ये दिल्लगी' और 'मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी' फिल्में आज भी लोग टीवी पर देखते हैं लेकिन सैफ की जितनी फिल्में नंबे के दशक में हिट हुईं वो सभी मल्टीस्टारर रहीं इसलिए उन पर आरोप भी लगते रहे कि 'वो अपने दम पर फिल्में नहीं चलवा सकते हैं।' नंबे के दशक में लगातार उनकी सोलो फिल्में फ्लॉप भी हो रही थीं।
'दिल चाहता है' करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई (Saif Ali Khan)
जिसके बाद उन्होंने फिल्मों से थोड़ा ब्रेक भी लिया और साल 2001 में इन्होंने फरहान अख्तर की मेगाहिट फिल्म 'दिल चाहता है' से वापसी की, जो कि इनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई, हालांकि इस फिल्म में भी वो आमिर खान और अक्षय खन्ना के साथ थे लेकिन अपनी सधी हुई एक्टिंग की वजह से उन्होंने लोगों के दिलों में खास जगह बनाई।
फिल्म 'ओमकारा' में निभाया निगेटिव रोल, जीता लोगों का दिल
2004 की बंपर हिट फिल्म 'हम तुम' के लिए सैफ ने नेशनल अवार्ड जीता और साल 2005 में आई फिल्म 'परिणिता' से उन्होंने खुद को गंभीर एक्टर साबित किया लेकिन साल 2006 की कल्ट फिल्म 'ओमकारा' में सैफ ने निगेटिव किरदार निभाकर हर किसी को हैरान कर दिया। फिल्म में उन्होंने 'लंगड़ा त्यागी' की भूमिका निभाई थी, जो कि लोगों के दिल-दिमाग पर इस कदर छाया कि लोग आज भी इस चरित्र को भूल नहीं पाए हैं। 'लव आज कल', 'कॉकटेल', और 'तन्हाजी' उनकी यादगार फिल्में हैं।
1,200 करोड़ रु की संपत्ति के मालिक हैं सैफ अली खान
तो वहीं सैफ ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी अपनी पहचान बनाई। अमेजन प्राइम की वेब सीरीज 'सेक्रेड गेम्स' में उनका अभिनय सराहनीय रहा। सैफ अली खान को 2010 में पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है। सैफ को गिटार बजाने का बहुत शौक है और वो पार्टी लवर भी हैं। वो 1,200 करोड़ रु की संपत्ति के मालिक हैं और एक फिल्म के लिए वो 10-15 करोड़ रुपये चार्ज करते हैं।












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