Poonam Pandey ने कैंसर अवेयरनेस के लिए फैलाई मौत की झूठी खबर, क्‍या होगी सजा? क्‍या कहता है कानून

Poonam pandey, Law for Fake Deth for awareness: मैं मरी नहीं जिंदा हूं.... एक्‍ट्रेस पूनम पांडे शनिवार को वीडियो जारी कर खुद सामने आईं और अपने जिंदा होने का सबूत देते हुए अपनी मौत की खबर को झूठा बताया है। जबकि एक दिन पहले एक्‍ट्रेस के पर्सनल इंस्‍टाग्राम पर एक पोस्‍ट के जरिए उन्‍हीं के मैनेजर ने पूनम पांडे की सर्वाइकल कैंसर से दर्दनाक मौत की दुखद सूचना दी थी।

Poonam pandey

एक्‍ट्रेस की अचानक मौत की खबर ने उनके फैंस ही नहीं बल्कि हर किसी को शॉक में डाल दिया था क्‍योंकि चार दिन पहले कैमरे के सामने अदाएं बिखेरती, ह‍ंसती-खिलखिलाती पूनम पांडे नजर आईं थी। लोग पूछ रहे थे क्‍या सच में पूनम पांडे नहीं रही या कोई ये कोई अफवाह है?

Poonam pandey

हालांकि मौत की खबर के 24 घंटे बाद ही पूनम पांडे इंस्‍टाग्राम पर आईं और बोलीं- मैं मरी नहीं जिंदा हूं, मैंने सर्वाइकल कैंसर के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए अपनी मौत की झूठी न्‍यूज पोस्‍ट की। मैंने केवल सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए ऐसा किया था...। पूनम पांडे की इस बात से फैंस काफी नाराज हो गए हैं और उनके फैंस अब हेटर्स बन चुके हैं।

इतना ही नहीं सोशल मीडिया पर मौत की खबर फैलाने के आरोप में ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन ने मॉडल पूनम पांडे और उनके मैनेजर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए मुंबई के विक्रोली पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक को पत्र लिखा है।

दावा किया जा रहा है कि अब एक्‍ट्रेस को सोशल मीडिया पर मौत की झूठी अफवाह फैलाने के लिए जेल हो सकती है कि उन पर जुर्माना लगाया जा सकता है। कुछ रिपोर्ट में आईटी एक्ट-2000 की धारा 67 का हवाला दिया गया कि पहली बार सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने का दोषी पाए जाने पर 5 लाख के जुर्माने के साथ दो साल की सजा की हो सकती है।

अब ऐसे में सवाल उठता है कि एक्‍ट्रेस पूनम पांडे ने कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्‍य से अपनी मौत की झूठी पोस्‍ट लिखी थी उसके लिए क्‍या सच में अब पूनम पांडे को जेल होगी? आइए जानते हैं क्‍या कहते है काूनन के जानकार?

इलाहाबाद हाईकोर्ट लखनऊ बेंच के वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता ने कहा

"अगर मौत की खबर फैलाने का उद्देश्‍य मौत की खबर फैलाकर अपराध की सजा से बचने या धोखाधड़ी करने या कोई अपराध करने के लिए है तो ये मौत की खबर कानून के विरुद्ध होगी और इसके लिए सजा होगी, लेकिन अगर किसी जागरूरकता अभियान के उद्देश्‍य से ऐसी अफवाह फैलाई गई है तो ऐसी अफवाह दंडनीय नहीं है।

उन्‍होंने कहा समाज में जागरूकता के लिए अगर कोई ऐसी अफवाह फैला रहा है और जिससे समाज को फायदा हो रहा है तो कानून में इसके लिए कोई सजा नहीं है और ऐसी अफवाह दंडनीय नहीं है। अगर ये ही अफवाह व्‍यक्तिगत फायदे के लिए फैलाई होती या जिससे समाज को नुकसान होता तो वो अपराध की श्रेणी में आता।

वहीं अगर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 67 की बात करें तो ये धारा आपत्तिजनक, उत्‍तेजक भावनाएं भड़काने वाली सामग्री पोस्‍ट करने से संबंधित है।

हालांकि आईटी एक्ट 2000 की धारा 66-ख-66 ड के अनुसार ऐसी अक्रामक या धमकाने की प्रकृति वाली झूठी सूचना है, उससे क्षोभ, असुविधा, खतरा, रुकावट, अपमान, क्षति या आपराधिक अभिश्राप, शत्रुता, घृणा या वैमन्‍स्‍य फैलाने का उद्देश्‍य है तो वो दंडनीय होगा।"

वरिठ पत्रकार और विधि विशेषज्ञ राजेश चौधरी ने कहा

"अगर किसी ने अपनी मौत की झूठी अफवाह फैलाई है तो उसमें देखना होगा कि उसने इसे खुद उसने फैलाई है है या किसी अन्‍य ने? इंस्‍टाग्राम या अन्‍य अकाउंट हैक करके अगर कोई अन्‍य या वो स्‍वयं मुख्‍यमंत्री या प्रधानमंत्री या अन्‍य किसी जानी-नामी हस्‍ती की मौत की झूठी अफवाह फैलाता है, जिससे समाज में अशांति या उन्‍माद फैलता है या होने की संभावना होती तो ये भारतीय कानून के अंतर्गत दंडनीय होगा।

उन्‍होंने कहा चूंकि एक्‍ट्रेस पूनम पांडे ने कैंसर के प्रति समाज में जागरूकता फैलाने के उद्देश्‍य से ऐसा किया तो वो गलत नहीं है। समाज की भलाई के लिए अगर कोई ऐसा कुछ करता है तो उसके खिलाफ कोई केस नहीं किया जा सकता। हालांकि अगर पूनम पांडे की मौत की झूठी पोस्‍ट पढ़कर या सुनकर किसी फैन की मौत हो गई होती तो एक्‍ट्रेस या कृत्‍य दंडनीय होता।"

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