KBC 13: 'मिर्जापुर के कालीन भैया' ने खोले अपने राज, कहा- पटना के होटल में कुक भी रहा हूं, जहां...

KBC 13: 'मिर्जापुर के कालीन भैया' ने खोले अपने राज, कहा- पटना के होटल में कुक भी रहा हूं, जहां...

मुंबई, 03 अक्टूबर: मिर्जापुर वेब सीरीज के कालीन भैया उर्फ पंकज त्रिपाठी को आज कौन नहीं जानता हैं। पंकज त्रिपाठी बेजोड़ प्रतिभा के धनी है और उन्होंने बॉलीवुड में अपने लिए एक मुकम्मल जगह बनाई है। पंकज त्रिपाठी के हर रोल को काफी सराहा गया है तो वहीं, अब उनकी गिनती बॉलीवुड के सबसे डिमांडिग ऐक्टर्स में होती है। लेकिन क्या आप जानते उन्हें यहां तक पहुंचने के लिए क्या कुछ करना पड़ा। इस बात का खुलासा खुद पंकज त्रिपाठी ने कौन बनेगा करोड़पति के शानदार शुक्रवार एपिसोड में किया है। आइए जानते हैं क्या कहा उन्होंने...

प्रोफेशनल कुक रह चुके है पंकज त्रिपाठी

प्रोफेशनल कुक रह चुके है पंकज त्रिपाठी

कौन बनेगा करोड़पति शो के दौरान सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, पंकज त्रिपाठी और प्रतीक गांधी से सवाल के दौरान पूछते है कि उन्हें खाना बनाना आता है या नहीं। इसपर पंकज त्रिपाठी बताते हैं कि वे एक प्रोफेशनल कुक रह चुके हैं और पटना के एक होटल में कुकिंग का काम भी किया था। बताया कि वहां मैं नाइट की ड्यूटी करता था और दिन में थिएटर रिहर्सल करता था। पंकज त्रिपाठी का यह सीक्रेट अभिताभ बच्चन के लिए बेहद सरप्राइजिंग था। अमिताभ ने शॉकिंग रिएक्शन देते हुए कहा कि, 'मुझे तो इसकी जानकारी थी ही नहीं।'

पंकज त्रिपाठी ने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए किया पत्नी का जिक्र

पंकज त्रिपाठी ने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए किया पत्नी का जिक्र

केबीसी 13 शो के दौरन पंकज त्रिपाठी ने अपने स्ट्रगल (संघर्ष) के दिनों को याद करते हुए कहानी भी सुनाई। संघर्ष के दिनों को याद करते हुए पंकज ने अपनी मृदुला त्रिपाठी का भी जिक्र किया। बताया कि वे अपनी पत्नी मृदुला की बदौलत कभी अंधेरी स्टेशन पर नहीं सो पाए। उन्होंने कहा कि जब वह काम की तलाश में घूम रहे थे तब उसने मेरा खूब सपोर्ट किया। पंकज त्रिपाठी ने बताया कि मैं 2004 में मुंबई आ गया था, लेकिन मुझे बड़ा ब्रेक 2012 में फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' से मिला। बताया कि आठ सालों तक किसी को नहीं पता था कि मैं क्या कर रहा हूं।

'मेरे संघर्ष में अंधेरी स्टेशन कभी शामिल नहीं हुआ'

पंकज त्रिपाठी ने बताया कि उनके संघर्ष के दिन उनकी पत्नी की बदौलत आसान हो पाए। आज भी जब कभी वो उस वक्त को याद करते है या कोई उनसे पूछता है तो वो कहते है कि 'मैं सोचता हूं कि अच्छा वो मेरा संघर्ष के दिन थे। उस वक्त मुझे पता ही नहीं था कि वह मेरे मुश्किल दिनों का दौर है। मुझे उन मुश्किलों का अहसास ही नहीं हुआ क्योंकि मेरी पत्नी बच्चों को सिखाया कि हमारी जरूरतें सीमित हैं। हम एक छोटे से घर में रहते थे। वह कमाती थी और इसलिए मैं आराम से रहता था। मेरे संघर्ष में अंधेरी स्टेशन पर सोना शामिल नहीं हुआ, सिर्फ उनकी वजह से।'

6 सालों तक कुछ नहीं कमाया

6 सालों तक कुछ नहीं कमाया

पंकज त्रिपाठी ने संघर्ष के दिनों को याद करते बताया कि वे छह सालों तक बेरोजगार रहे, इस दौरान उन्होंने कुछ भी नहीं कमाया। इस दौरान उनकी पत्नी मृदुला ने ही घर चलाया। बताया कि ये वक्त 2004 से 2010 के बीच का था। बताया कि 'मैं अंधेरी में घूमता था और लोगों से कहता था कि 'कोई एक्टिंग करवा लो, कोई एक्टिंग करवा लो'। लेकिन उस वक्त मेरी किसी ने नहीं सुनी। अब, जब मैं घर जाता हूं, तो देखता हूं कि मुझे आज पार्किंग एरिया में फिल्में ऑफर की जाती हैं।'

गैंग्स ऑफ वासेपुर से खुली पंकज त्रिपाठी की किस्मत

गैंग्स ऑफ वासेपुर से खुली पंकज त्रिपाठी की किस्मत

बता दें, पंकज त्रिपाठी का जन्म बिहार के गोपालगंज जिले में हुआ था, उनके माता-पिता पेश से किसान है। उन्होंने अपनी शुरूआती पढ़ाई पटना से की है। पंकज ने कॉलेज के दिनों से पटना के एक थिएटर में एक्टिंग करना शुरू कर दिया था। उसके बाद उन्होंने अभिनय का प्रशिक्षण लेने के लिए नैशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में दाखिला ले लिया। नैशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से ग्रैजुएट होने के बाद 2004 में मुंबई का रुख किया। पहले वह एक ऐड में नजर आए और इसके बाद फिल्म 'रन' में एक छोटे से रोल में दिखे। हालांकि इस फिल्म में उन्हें कोई क्रेडिट नहीं दिया गया था। कुछ सालों के स्ट्रगल के बाद अनुराग कश्यप की फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' से पंकज त्रिपाठी की किस्मत खुली।

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