पापोरी हर्ष के संगीत का सफर - जुनून, कला और अनुशासन का अनूठा संगम
OI Exclusive: 'संगीत में वो ताकत है जो किसी भी उम्र को लोगों के तन-मन को तरंगित कर देती है और इंसान खुशी में झूम उठता है', ये कथन हमारा नहीं बल्कि संगीत की उस पुरोधा का है जिनकी आवाज सीधा दिलों पर दस्तक देती है। जी हां, हम यहां बात कर रहे हैं बहुमुखी प्रतिभा की धनी और मशहूर गायिका पापोरी हर्ष की जिन्होंने वनइंडिया से एक्सक्लूसिव बातचीत में अपने अब तक के खूबसूरत सफर पर खुलकर बात की।

श्रुति सरकार द्वारा साक्षात्कार में उन्होंने संगीत दर्शन और संगीत के माध्यम से समाज में अपने योगदान के बारे में विस्तारपूर्वक बताया। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि उन्होंने आठ साल पहले ही अपने संगीत के सफर को आगे बढ़ाने का फैसला किया इससे पहले वो 15 से अधिक वर्षों तक प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थानों में मानव संसाधन विशेषज्ञ और संकाय सदस्य के रूप में काम कर चुकी हैं।
'मैं आर्ट फील को शुरू से ही तवज्जो देती आई हूं'
उन्होंने कहा कि वो एक ऐसे परिवार से आती हैं, जहां शिक्षा पर सबसे ज्यादा जोर दिया जाता है, मैं एक गणित की छात्रा रही हूं मैंने पुणे से बिजनेस मैनेजमेंट का कोर्स किया और उसके बाद मैंने कई प्रतिष्ठित संस्थानों में काम किया, फिर शादी हो गई, बच्चे हो गए और जिम्मेदारियां बढ़ गईं लेकिन अब घर से बाहर जाकर रेगुलर जॉब करना मुश्किल था तो मैंने अपने काम से ब्रेक लेने की सोची। मेरी बहुत सारी हॉबी है, मैं आर्ट फील को शुरू से ही तवज्जो देती आई हूं।
'मैंने संगीत में अपने आप को आगे बढ़ाने के बारे में सोचा'
'पेंटिंग और बेकिंग जैसे विभिन्न शौक तलाशने के बाद, मुझे संगीत में अपनी असली रुचि का पता चला, मुझे लगा कि ये मुझे राहत देता है और इस तरह से मैंने संगीत में अपने आप को आगे बढ़ाने के बारे में सोचा क्योंकि जब मैं बहुत छोटी थी तो संगीत में मेरी काफी रूचि थी।'
'आठ-नौ साल पहले मैं इसे गंभीरता से लेना शुरू किया'
'घर-परिवार के लोग कहते थे कि पापोरी अच्छा गाती है लेकिन आठ-नौ साल पहले मैं इसे गंभीरता से लेना शुरू किया, मैं बच्चों को स्कूल भेजने के बाद दिन भर संगीत सुना करती थी फिर मैंने क्लासिकल म्यूजिक को सीखना शुरू किया क्योंकि मुझे लगा कि जब तक मैं इसे अच्छी से सीखूंगी नहीं तब तक मैं अच्छा गा नहीं सकती हूं।'

'क्लासिकल संगीत हर म्यूजिक का बेस है'
पापोरी ने कहा कि ' क्लासिकल संगीत हर म्यूजिक का बेस है, चाहे वो बॉलीवुड संगीत हो, जैज़ हो या सूफी हो, हर म्यूजिक कुछ कहता है और मैसेज देता है और ये मैंने अपने गायन के दौरान अनुभव किया है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि संगीत समारोहों, त्यौहारों और OTT प्लेटफ़ॉर्म में इसकी उपस्थिति बढ़ रही है। बडाख्याल और सरगम गायन जैसे जटिल रूपों को लोकप्रिय बनाने में चुनौतियों को स्वीकार करते हुए पापोरी ने कहा कि वे भारत में क्लासिकल संगीत का एक खूबसूरत भविष्य देखती हैं। '
संगीत और वेलनेस कोच के रूप में प्रमाणित
क्लासिकल संगीत को तकनीकी और भावनात्मक गहराई को समझने का एक द्वार मानने वाली पापोरी ने बर्कली कॉलेज ऑफ़ म्यूज़िक, बोस्टन से संगीत और वेलनेस कोच के रूप में प्रमाण-पत्र प्राप्त किया है। वो प्रयाग संगीत समिति, इलाहाबाद से संगीत विशारद हैं। किराना घराने वाले ओंकारनाथ हवलदार के संरक्षण में वह अपने शास्त्रीय प्रशिक्षण को और अग्रसर करती जा रही हैं, संगीत के प्रति उनका जुनून सिर्फ़ प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। वे द म्यूज़िक विलेज (TMV) की संस्थापक भी हैं, जो संगीत के जरिए लोगों को आनंदित तो करता ही है, साथ ही स्वास्थ के प्रति जागरुक भी करता है।
लोक संगीत का मेरे दिल में खास स्थान: पापोरी
भारतीय संस्कृति की आत्मा लोक संगीत पापोरी के दिल में एक खास जगह रखता है। उनका फेमस गीत "जुगनी" लोक परंपराओं के प्रति उनके लगाव को बखूबी दर्शाता है। इस बारे में बात करते हुए गायिका ने कहा कि 'लोक गीत अतीत की कहानियां हैं, जिन्हें दिल से गाया जाता है और ये हमें जड़ों से जोड़ता है और जब आपकी रूट मजबूत होती है तो निश्चित तौर पर आप सफल होते हैं।'
'फ़्यूज़न का मतलब कहानियों को मिलाना है'
पापोरी का आगामी शो 'दिल ही तो है', जो कि ग़ालिब और नुसरत फ़तेह अली खान जैसे दिग्गजों को श्रद्धांजलि है। उन्होंने कहा कि फ्यूजन का मतलब होता है कहानियो को मिलाना, मतलब ये कि इसके जरिए हम पारंपरिक संगीत को समकालीन संवेदनाओं से जोड़ पाते हैं। यह कॉन्सर्ट एक निर्माता के रूप में उनकी पहली प्रस्तुति भी है।
यहां देखें पूरा इंटरव्यू
दलजीत दोसांझ जैसे कलाकारों से काफी प्रभावित हैं
आपको बता दें कि वो दलजीत दोसांझ जैसे कलाकारों से काफी प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि वो इस शो के जरिए एक रूहानी संगीत से लोगों को रूबरू करना चाहती हैं और इस शो के मिलने वाले पैसों से अपने ट्रस्ट के माध्यम से वंचित समुदायों के लिए धन जुटाना उनका मकसद है।
सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है: पापोरी
संगीत के क्षेत्र में आने वाले युवा प्रतिभाओं के लिए उन्होंने कहा कि 'सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है, अपनी प्रतिभा में निवेश करें और मेहनत करते रहें , मंजिल निश्चित तौर पर मिलेगी।' अंत में उन्होंने निम्नलिखित लाइनों के जरिए दर्शकों से सुरमई विदाई ली, "हाय मर जाएंगे, हम तो लुट जाएंगे..ऐसी बातें किया ना करो, आज जाने की जिद ना करो।"












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