'काश मैं गोरा हो सकता' जब मिथुन चक्रवर्ती के लिए 'काला रंग' बना अभिशाप, सालों बाद एक्टर का छलका दर्द
Mithun Chakraborty: बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर मिथुन चक्रवर्ती को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। जो भारतीय सिनेमा में जीवन भर की उपलब्धियों का सबसे बड़ा पुरस्कार है। यह पुरस्कार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिया। ऐसे में एक्टर ने अपने करियर में किए संघर्ष पर बात की।
अवॉर्ड मिलने के बाद मिथुन चक्रवर्ती ने शुरुआती करियर की कुछ बातें साझा की। एक्टर ने बताया कि सांवले रंग की वजह से उन्हें एक्टर बनने के लिए किन दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, "बहुत लोगों ने मुझे बताया कि सांवले रंग के अभिनेता बॉलीवुड में नहीं टिकेंगे।"

मिथुन चक्रवर्ती ने आगे कहा कि, मैंने भगवान से प्रार्थना की, 'क्या आप मेरा रंग बदल सकते हैं?' लेकिन अंत में मैंने स्वीकार किया कि मैं अपने रंग को नहीं बदल सकता। इसके बजाय, मैंने अपने डांस पर काम किया और ठान लिया कि मैं इतना बेहतरीन डांसर बनूंगा कि दर्शक मेरे रंग को भुला देंगे। इसी तरह मैं 'सेक्सी, डस्की बांगाली बाबू' बना।"
मिथुन ने इंडस्ट्री में अपने उतार-चढ़ाव के बारे में भी बात की। जब एक्टर को पहली बार राष्ट्रीय पुरस्कार मिल था तो उनके व्यवहार में काफी बदलाव आ गए थे। मिथुन ने कहा, "मैंने सोचा कि मैं अल पचीनो बन गया हूँ। मैंने निर्माताओं के साथ बेवजह व्यवहार करना शुरू कर दिया। लेकिन एक दिन एक निर्माता ने मुझे सेट से निकाल दिया। उस दिन, मैंने महसूस किया कि मैं अल पचीनो नहीं हूँ, और यह मेरी गलतफहमियों का अंत था।"
बता दें कि, मिथुन चक्रवर्ती ने 1976 में फिल्म 'मृगया' से अपने करियर की शुरुआत की। जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सम्मानित किया गया था। इसके बाद 'ताहादेर कथा' (1992) और 'स्वामी विवेकानंद' (1998) के लिए दो और राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त किए। इसके अलावा उन्होंने कई सुपरहिट फिल्में दी और फैंस के पसंदीदा एक्टर बन गए। मिथुन दा को डिस्को डांसर के नाम से भी जाना जाता है।
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