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Maa Review: माइथोलॉजी और हॉरर ड्रामा से भरपूर है काजोल की 'मां', एक बार जरूर देखें, पढ़ लें रिव्यू

फिल्म- मां
स्टारकास्ट- काजोल, रोनित रॉय, इंद्रनील सेनगुप्ता, दिब्येंदु भट्टाचार्य, केरिन शर्मा
डायरेक्टर- विशाल फुरिया
स्टार- ***

Maa Review: बॉलीवुड में इन दिनों हॉरर कॉमेडी फिल्मों का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। 'स्त्री' और 'मुंजा' जैसी फिल्मों के बाद अब हर कोई इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन काजोल की फिल्म 'मां' इस भीड़ का हिस्सा नहीं है। ये फिल्म न तो कॉमिक है और न ही टिपिकल हॉरर, बल्कि ये एक माइथोलॉजिकल हॉरर ड्रामा है।

27 जून 2025 को रिलीज हुई काजोल की 'मां'
फिल्म का ट्रेलर देखकर लोगों की अपेक्षाएं काफी बढ़ गई थीं और फिल्म उन उम्मीदों पर पूरी तरह तो नहीं, लेकिन कुछ हद तक खरी जरूर उतरती है। आपको बता दें कि काजोल की फिल्म 'मां' आज यानी 27 जून 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है और लोगों को पसंद आ रही है।

Maa Review

क्या है फिल्म 'मां' की कहानी

-फिल्म 'मां' की कहानी पश्चिम बंगाल के एक काल्पनिक कस्बे चंद्रपुर की है। यहां एक रहस्यमयी परंपरा के तहत लड़कियों की बलि दी जाती है। सालों बाद, जब इस परिवार की बहू काजोल अपनी बेटी को लेकर यहां आती हैं, तो रहस्य और डरावने घटनाक्रम शुरू हो जाते हैं।

-उस गांव की लड़कियां एक-एक कर गायब होने लगती हैं और इन घटनाओं के पीछे छिपे राक्षस का सच सामने आता है। फिल्म इस सवाल का जवाब ढूंढती है कि मां अपने बच्चे के लिए कहां तक जा सकती है।

कैसी है ये फिल्म?

-फिल्म 'मां' एक मध्यम गति से चलने वाली मूवी है जिसमें रहस्य, पौराणिकता और थोड़ी-बहुत डरावनी झलकियां मौजूद हैं। इसकी कहानी में कई मोड़ आते हैं जो दर्शकों को कहानी से जोड़े रखते हैं। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसके अंत के 10 मिनट हैं, जो इमोशनल और प्रभावशाली हैं। हालांकि, ट्रेलर जितनी झलक इसमें पूरी फिल्म में नहीं दिखती, लेकिन फिर भी ये एक औसत से बेहतर अनुभव देती है।

-फिल्म का हॉरर एलिमेंट बहुत गहरा या डरावना नहीं है, इसलिए अगर आप ज्यादा डरावनी फिल्में देखना पसंद करते हैं, तो ये फिल्म आपको कुछ हल्की लग सकती है। लेकिन अगर आपको माइथोलॉजिकल कहानियों और लोक कथाओं में दिलचस्पी है, तो ये एक अच्छी सिंगल-टाइम वॉच हो सकती है।

फिल्म की स्टारकास्ट और उनकी एक्टिंग

-काजोल ने एक मां के रोल में शानदार काम किया है। उनकी बॉडी लैंग्वेज, डायलॉग डिलीवरी और आंखों से भावनाओं को जाहिर करने की काबिलियत इस रोल को खास बनाती है।

-रोनित रॉय ने मुख्य विलेन के किरदार में जबरदस्त परफॉर्मेंस दी है।

-इंद्रनील सेनगुप्ता ने पति के किरदार में संतुलित अभिनय किया है।

-दिब्येंदु भट्टाचार्य ने हमेशा की तरह अपने रोल में जान डाल दी है। बंगाली किरदार उनके लिए सहज और दमदार बन पड़ा है।

-केरिन शर्मा (काजोल की बेटी) और सूर्यशीखा दास ने भी अपने-अपने किरदारों में प्रभाव छोड़ा है। खासकर सूरजशीखा का काजोल पर चिल्लाने वाला सीन काफी ध्यान खींचता है। गोपाल सिंह का अभिनय भी काबिले तारीफ है।

फिल्म की कहानी, स्क्रीनप्ले और निर्देशन

-फिल्म की स्क्रिप्ट अजीत जगताप, आमिल कियान खान और सायविन कद्रास ने लिखी है। निर्देशन की कमान विशाल फुरिया ने संभाली है। फिल्म की लेखनी में और अधिक गहराई हो सकती थी, कई जगहों पर सवाल अधूरे रह जाते हैं और कुछ घटनाएं थोड़ी असंगत भी लगती हैं। डायरेक्शन साफ-सुथरा है लेकिन कुछ दृश्यों को और प्रभावशाली बनाया जा सकता था।

-'मां' एक ऐसी फिल्म है जो अलग जोनर में कुछ नया कहने की कोशिश करती है। ये हर किसी की पसंद की फिल्म नहीं है, लेकिन अगर आप हॉरर में माइथोलॉजिकल और इमोशनल टच पसंद करते हैं, तो यह आपको निराश नहीं करेगी। ऐसे में आप इसे एक बार देख सकते हैं।

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