Ghoomer Film Review: सैयामी खेर के लॉजिक और अभिषेक बच्चन के मैजिक का कमाल, आंखों में आंसू ला देगी 'घूमर'
Ghoomer Film Review: बॉलीवुड एक्टर अभिषेक बच्चन और एक्ट्रेस सैयामी खेर की फिल्म 'घूमर' आज यानी 18 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। इस फिल्म को दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। इस फिल्म में असंभव को संभव कर दिखाने वाली एक प्रेरणादायी कहानी बताई गई है, जो मुश्किल से मुश्किल हालात में भी हार न मानने की सीख देती है। कहानी एक हाथ न होने पर भी ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीतने का कारनामा करने वाले शूटर कैरोली टकाक्स की असल जिंदगी से प्रेरित है। इस फिल्म में अनीना (सैयामी खेर) का सपना क्रिकेटर बनना है। अनीना भारतीय क्रिकेट टीम में देश के लिए खेलना चाहती है।
अनीना अपनी मेहनत और बैटिंग के दम पर नेशनल टीम में जगह भी बना लेती है। मगर जब वह अपने इस सपने से बस एक कदम दूर होती है तो वह एक हादसे में अपना दायां हाथ गवां बैठती है। अब एक हाथ से कैसे कोई क्रिकेट खेल सकता है? इसी सवाल के जवाब को पर्दे पर अच्छे से दर्शाया गया है।

फिल्म 'घूमर' का रिव्यू
बॉलीवुड के फेमस डायरेक्टर आर बाल्कि की खासियत रही है कि वह दर्शकों के सामने हमेशा कुछ अलग कहानी ही परोसते हैं। फिल्म 'घूमर' में उन्होंने एक इमोशनल करने वाली बेहद इंटेस कहानी को चुना है लेकिन फिर भी हंसी मजाक के पल खूब जुटाए गए हैं। अनीना के एक हाथ वाले क्रिकेटर बनने के सफर में उसका गुरु बनता है बेहद अतरंगी पदम सिंह सोढ़ी उर्फ पैडी (अभिषेक बच्चन) जो कि शराब में डूबा पूर्व टेस्ट क्रिकेटर है।
सभी किरदार आपस में जुड़े हुए हैं
वहीं अनीना के घर पर उसका पूरा परिवार, खासतौर से उसकी दादी शबाना आजमी और बचपन का प्यार जीत (अंगद बेदी) उसके सपोर्ट सिस्टम बनकर सामने आते हैं। ये सभी किरदार आपस में जुड़े हुए हैं और एक दूसरे की मदद करते नजर आते हैं। इस फिल्म के दमदार डायलॉग्स भी इसे एक बेहतरीन मूवी बनाते हैं। 'जिंदगी जब आपके मुंह पर दरवाजा बंद करती है, तो उसे खोलना नहीं, तोड़ना पड़ता है'...इस तरह के शानदार डायलॉग्स इस फिल्म में भरे हुए हैं।
फिल्म में कलाकारों की दमदार एक्टिंग
बॉलीवुड एक्ट्रेस सैयामी खैर ने अपने दमदार किरदार को जबरदस्त तरीके से निभाया है। उन्होंने इस रोल में ढलने के लिए भरपूर मेहनत की है और वह फिल्म में साफ नजर आता है। हालांकि किरदार में दमदार जुनून दिखाने के लिए थोड़ी और मेहनत की जा सकती थी। वहीं अभिषेक बच्चन ने पैडी के रूप में बेहतरीन पारी खेली है। ऐसा लगता है कि मणिरत्नम के बाद आर बाल्कि ही ऐसे डायरेक्टर हैं, जो अभिषेक के भीतर छिपे एक्टर को निचोड़कर बहार लाए हैं। वहीं दादी बनीं शबाना आजमी ने तो एक्टिंग के मामले में सबको क्लीन बोल्ड ही कर दिया है। उनकी जितनी तारीफ करें, कम होगी। अंगद बेदी और इवांका दास ने भी बहुत ही बढ़िया काम किया है।
फिल्म में नजर आएगी ये कमी
फिल्म को दर्शकों से लेकर समीक्षकों तक से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। हालांकि फिल्म में कुछ कमियां भी हैं। फिल्म देखते वक्त कई सवाल आपके मन में उठ सकते हैं जैसे कि क्या क्रिकेट नियमों के आधार पर ये संभव है कि कोई एक हाथ वाला खिलाड़ी नेशनल टीम में चुना जा सके। क्या गोल गोल घूमकर बॉलिंग की जा सकती है। फिल्म के डायरेक्टर आर बाल्कि ने इन कमियों को दूर करने की कोशिश भी की है, लेकिन उनके तर्क लोगों को सही नहीं लगे। फिल्म की कहानी अच्छी है लेकिन क्लाइमैक्स का क्रिकेट वाला हिस्सा बेहद नाटकीय हो गया है। जिस तरह लोग महिला क्रिकेट के दीवाने दिखाए गए हैं, ऐसा रियल लाइफ में नहीं है।












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