Dhanashree Verma और युजवेंद्र चहल का तलाक हुआ तो कैसे तय होगी एलिमनी? क्या कहता है कानून? जानें सच
Dhanashree Verma: इस समय फेमस कोरियोग्राफर धनश्री वर्मा और भारतीय क्रिकेटर युवेंद्र चहल के तलाक की खबर ने हंगामा मचा रखा है। कहा जा रहा है कि दोनों एक दूसरे से अलग हो चुके हैं और जल्द ही तलाक लेने वाले हैं।
युजवेंद्र चहल और धनश्री वर्मा का रिलेशन
पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर कई मशहूर हस्तियों के तलाक की ही खबरें नजर आ रही हैं और अब इस कड़ी में धनश्री वर्मा और युजवेंद्र चहल का नाम भी जुड़ गया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि युजवेंद्र चहल अपनी पत्नी धनश्री वर्मा से सच में तलाक ले रहे हैं या नहीं।

धनश्री पति का घर छोड़कर मायके में हुईं शिफ्ट
वहीं कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक धनश्री और युजवेंद्र जल्द ही तलाक ले सकते हैं। कई रिपोर्ट्स में ये दावा किया जा रहा है कि दोनों ने एक दूसरे से अलग होने का फैसला कर लिया है और ऐसे में धनश्री पति का घर छोड़कर मायके में शिफ्ट हो गई हैं।
धनश्री वर्मा को मिलेगी कितनी एलिमनी?
आपको बता दें कि अगर टीम इंडिया के क्रिकेटर युजवेंद्र चहल का उनकी पत्नी धनश्री वर्मा से तलाक होता है तो उन्हें धनश्री वर्मा को कितनी एलिमनी यानी गुजारा भत्ता देना होगा। आइए आपको बताते हैं कि एलिमनी को लेकर क्या कहता है कानून।
युजवेंद्र चहल और धनश्री वर्मा का तलाक
भारतीय क्रिकेटर युजवेंद्र चहल अगर अपनी पत्नी धनश्री वर्मा से तलाक लेते हैं, तो ऐसे में उन्हें धनश्री को अच्छी खासी एलिमनी देनी होगी। लेकिन अगर उनकी पत्नी धनश्री एलिमनी लेने से मना करें तो युजवेंद्र को एक पैसा भी नहीं दोना होगा। ऐसा ही साउथ की फेमस एक्ट्रेस सामंथा रुथ प्रभु और एक्टर नागा चैतन्य के तलाक केस में हुआ था।
एलिमनी को लेकर क्या कहता है कानून?
आपको बता दें तलाक के केस में पति अपनी पत्नी को कितनी एलिमनी यानी गुजारा भत्ता देगा, ये कोर्ट निर्धारित करता है। कोर्ट इसके लिए कई पहलुओं को देखता है, जैसे कि पति की कमाई कितनी है, पत्नी के खर्चे किस तरह के हैं। ऐसे ही और तथ्यों के आधार पर एलिमनी की रकम तय की जाती है।
क्या होता है एलिमनी या गुजारा भत्ता
-जब एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को उसके बेसिक खर्चों और जरूरतों के लिए कोई रकम देता है यानी उसे आर्थिक तौर पर सपोर्ट करता है, जो उसे गुजारा भत्ता या फिर एलमिनी कहते हैं और ये तलाक के बाद दिया जाता है। इसे मेंटेनेंस भी कहा जाता है। इन बेसिक जरूरतों में खाना, कपड़ा, बीमारी, घर और एजुकेशन जैसी चीजें आती हैं।
-हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 के अनुसार, एलिमनी को दो तरह का बताया गया है। एक स्थायी यानी परमानेंट गुजारा भत्ता और दूसरा अंतरिम यानी अस्थाई गुजारा भत्ता। अंतरिम गुजारा भत्ता, आवेदक को कोर्ट का फैसला आने तक मिलता रहता है। कोर्ट की कार्यवाही के वक्त शुरुआती खर्चों के लिए अगर शिकायतकर्ता के पास पैसे हीं हैं, तो यह भत्ता दिया जाता है।
-वहीं, तलाक के बाद मिलने वाले गुजारा भत्ता को एलिमनी या परमानेंट गुजारा भत्ता कहते हैं। ये एक फिक्स अमाउंट होता है, जो कई बिंदुओं पर विचार करते हुए कोर्ट तय करता है।
कितनी एलिमनी मांग सकती है पत्नी
-सुप्रीम कोर्ट के अनुसार पत्नी अपने पति से कितना भी गुजारा भत्ता नहीं मांग सकती है और अगर वह मांगती भी है, तो कोर्ट कई सारी चीजों को देखते हुए ये तय करता है कि पत्नी को कितना गुजारा भत्ता मिलना चाहिए।
-पति की आर्थिक स्थिति क्या है, उस पर क्या जिम्मेदारियां हैं और पत्नी कामकाजी है या नहीं, ये सारी चीजें देखते हुए ही गुजारा भत्ता या एलिमनी तय की जाती है।
-गुजारा भत्ता तय करते समय कोर्ट पति की आर्थिक स्थिति, उसकी कमाई और उस पर आश्रित लोगों की डिटेल्स भी देखता है। इतना नहीं ही, पत्नी और आश्रित बच्चों की जरूरतें क्या हैं और उनकी योग्यता क्या है, इस पर भी कोर्ट जानकारी लेता है।












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