'बप्पी दा 'के जाने से दुखी अमिताभ ने लिखी भावुक पोस्ट-'धीरे-धीरे सभी छोड़कर चले जाते हैं'
नई दिल्ली, 17 फरवरी। मशहूर सिंगर और कंपोजर बप्पी लहरी के जाने से पूरा बॉलीवुड शोक में डूबा हुआ है। फिल्मी दुनिया का हर इंसान अपने प्यारे बप्पी दा को अपने अंदाज में याद कर रहा है। बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन ने भी बप्पी लहरी को याद करते हुए एक भावुक पोस्ट लिखी है। अमिताभ ने अपनी सुपरहिट फिल्मों जैसे 'शराबी', 'नमक हलाल', 'आज का अर्जुन' में संगीत देने वाले 'बप्पी लहरी' को असाधरण प्रतिभा का मालिक बताया है।

बप्पी के गाने हमेशा अमर रहेंगे...
अपने ब्लॉ़ग में अमिताभ ने लिखा है कि 'बप्पी के निधन से बहुत ज्यादा हैरान हूं और इतनी जल्दी-जल्दी लोगों के गुजरने की दुखद घटनाओं से सहमा हूं। उनके बनाए गाने हमेशा अमर रहेंगे। उन्हें संगीत के बारे में सबकुछ पता था और वो ये बखूबी जानते थे कि लोगों को पसंद क्या है? मेरी फिल्मों के गीतों को रोचक बनाने वाले बप्पी दा के सारे गानों को आज की जनरेशन भी बड़े प्यार और चाव से सुनती है और आगे भी सुनती रहेगी।'

'धीरे सभी छोड़कर चले जाते हैं
अमिताभ ने लिखा है कि 'बप्पी असाधारण थे, वो हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगे। उन्होंने साथ ही एक किस्सा भी शेयर किया है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि एक बार वो और बप्पी दोनों लंदन से मुंबई लौट रहे थे लेकिन जब वो हीथ्रो एयरपोर्ट पर थे तो उन्होंने मुझसे कहा कि आपकी यह फिल्म बहुत सफल होगी और मैंने जो गाने दिए हैं इन्हें सालों तक याद किया जाएगा', वह सही थे... उनके घर पर, रिहर्सल्स में बहुत कुछ सीखने को मिला, धीरे-धीरे सभी छोड़कर चले जाते हैं।'

अमिताभ की इमोशनल पोस्ट वायरल
अमिताभ की ये इमोशनल पोस्ट इस वक्त वायरल हो रही है। अमिताभ के शब्दों में उनकी पीड़ा को महसूस किया जाता है। आपको बता दें कि बप्पी लहरी का अंतिम संस्कार आज मुंबई के विले पार्ले के पवन हंस शमशान घाट में कर दिया गया। उनके बेटे बप्पा ने उन्हें मुखाग्नि दी। वो अमेरिका में थे और आज सुबह ही इंडिया लौटे थे, उनके आने का ही इंतजार हो रहा था, उनके आने के बाद ही बप्पी लहरी का अंतिम संस्कार किया गया।

'बप्पी दा' की पहली फिल्म बंगाली थी
गौरतलब है कि 'बप्पी दा' की पहली फिल्म बंगाली थी, जिसमें उन्होंने पहली बार गीत गाया था। उस फिल्म का नाम दादू (1972) था। इसके बाद साल 1973 में उन्होंने पहली बार हिंदी फिल्म 'नन्हा शिकारी' में गाना गाया था, हालांकि उन्हें बॉलीवुड में असली पहचान 1975 की फिल्म 'जख्मी' से मिली थी।
इंडो-पॉप के सरताज
इसके बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा को डिस्को और रॉक म्यूजिक से अवगत कराया और देखते ही देखते बप्पी दा इंडो-पॉप के सरताज बन गए। उनके जाने से पूरे बॉलीवुड की आंखे नम हैं, सभी अपने इसे प्यारे संगीतकार और गायक के जाने से बहुत ज्यादा दुखी हैं।












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