Asha Bhosle Death: मौत से ठीक पहले क्या हो गई थी आशा भोसले की हालत? डॉ.प्रतीत समदानी ने सामने रखा पूरा सच
Asha Bhosle Death: भारतीय संगीत जगत से एक बेहद दुखद और दिल तोड़ देने वाली खबर सामने आ रही है। अपनी अद्वितीय आवाज से सात दशकों तक श्रोताओं के दिलों पर राज करने वाली महान गायिका आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं। 92 वर्ष की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया है। उनके निधन की खबर फैलते ही देशभर में शोक की लहर दौड़ गई है और संगीत प्रेमियों की आंखें नम हो गई हैं।
मुंबई के अस्पताल में ली आखिरी सांस
जानकारी के अनुसार आशा भोसले को गत 11 अप्रैल 2026 को मुंबई के मशहूर ब्रीच कैमडी हॉस्पिटल (Breach Candy Hospital) में भर्ती कराया गया था। उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की टीम लगातार उनका इलाज कर रही थी। तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और उन्होंने अस्पताल में ही अंतिम सांस ली।

सिंगर की मौत को लेकर डॉ. प्रतीत समदानी का बड़ा बयान
-अस्पताल में आशा भोसले का इलाज कर रहे डॉक्टर प्रतीत समदानी ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए बताया है कि सिंगर का निधन मल्टी-ऑर्गन फेलियर के कारण हुआ है यानी उनके शरीर के कई अहम अंगों ने एक साथ काम करना बंद कर दिया था।
-डॉक्टर ने कहा- जब आशा भोसले को अस्पताल लाया गया था, वह तभी काफी कमजोर ल रही थीं। मौत से पहले भी उनकी हालत काफी ज्यादा खराब हो गई थी। उम्र के इस पड़ाव पर शरीर ने उनका साथ छोड़ दिया, जिससे ये अपूरणीय क्षति हुई।
बेटे आनंद भोसले ने कही ऐसी बात
वहीं आशा भोसले के बेटे आनंद भोसले ने भी इस दुखद खबर की पुष्टि की है। आशा ताई के निधन से पहले पूरा देश उनके जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया पर उनके स्वास्थ्य लाभ की कामना की थी। हालांकि नियति को कुछ और ही मंजूर था।
नम आंखों से आशा भोसले को दी जा रही है श्रद्धांजलि
-अब सोशल मीडिया पर हर तरफ श्रद्धांजलियों का सैलाब उमड़ पड़ा है। फिल्म इंडस्ट्री, राजनीतिक जगत और आम लोगों तक, हर कोई इस खबर से गहरे सदमे में है। आशा भोसले केवल एक गायिका नहीं थीं बल्कि भारतीय संगीत की आत्मा थीं। उन्होंने अपने करियर में हजारों गीतों को आवाज दी और हर दौर के संगीत प्रेमियों के दिलों में अपनी अलग जगह बनाई।
-'पिया तू अब तो आजा' की चुलबुली अदा, 'दम मारो दम' का बेफिक्र अंदाज और 'इन आंखों की मस्ती की' गहराई, उनकी आवाज में हर रंग देखने को मिलता था। मेरा कुछ सामान जैसे गीतों ने ये साबित किया था कि वे केवल मस्ती भरे गानों तक सीमित नहीं थीं बल्कि गंभीर और भावनात्मक गायकी में भी बेजोड़ थीं।
सम्मानों से सजा शानदार करियर
आशा भोसले को भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान 'दादा साहब फाल्के' पुरस्कार सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा गया था लेकिन उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान उनके प्रशंसकों का प्यार था, जो उन्हें उम्र के अंतिम पड़ाव तक मिलता रहा। अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर के निधन के बाद वे भारतीय संगीत की सबसे मजबूत आवाज़ों में से एक थीं।
हमेशा जिंदा रहेगी 'आशा' की आवाज
भले ही आज आशा भोसले हमारे बीच शारीरिक रूप से नहीं हैं लेकिन उनकी आवाज हमेशा हर महफिल, हर धुन और हर दिल में जिंदा रहेगी। उनका संगीत आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अनमोल विरासत बनकर रहेगा।












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