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Durg: CSVTU की बढ़ी मुश्किलें, भूमि हस्तांतरण के बाद भी नहीं मिला UGC का ग्रांट, PhD की सीटें हुई कम

छत्तीसगढ़ के एकमात्र तकनीकी विश्वविद्यालय की मुश्किलें कम होने का नाम नही ले रही हैं। एक समस्या से निजात मिलते ही दूसरी समस्या से प्रबंधन घिरा नजर आता है।

दुर्ग, 25 अगस्त। छत्तीसगढ़ के एकमात्र तकनीकी विश्वविद्यालय की मुश्किलें कम होने का नाम नही ले रही हैं। एक समस्या से निजात मिलते ही दूसरी समस्या से प्रबंधन घिरा नजर आता है। दुर्ग जिले में स्थित स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय को भिलाई इस्पात संयंत्र ने लंबे टालमटोल के बाद भूमि हस्तांतरित तो कर दी है लेकिन अब उस भूमि के दस्तावेजों की जानकारी राजस्व विभाग में ही उपलब्ध नही है। इसके चलते विश्विद्यालय प्रबंधन को यूजीसी से मिलने वाले ग्रांट के रूप में करोड़ो का नुकसान झेलना पड़ रहा है।

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हस्तांतरित भूमि का रिकॉर्ड ही नही
विश्विद्यालय के नवीन भवन के निर्माण के 12 साल बाद बीएसपी प्रबन्धन ने राज्य सरकार को जमीन हस्तांतरित की है। इस बीच बीएसपी अधिकारियों के कई शर्तों की वजह से भूमि हस्तान्तरण अटका रहा। अब किसी तरह जमीन का विवाद सुलझने के बाद भूमि के रिकार्ड के नाम पर एक नया विवाद सामने आ रहा है। जिन 10 गांवों की जमीन हस्तांतरित की है, उसका राजस्व विभाग के पास रिकॉर्ड ही नहीं है। जबकि साल 2008 में अनुबंध के अनुसार 250 एकड़ भूमि 41 करोड़ 29 लाख में छत्तीसगढ़ तकनीकी शिक्षा संचनालय को दी गई थी।

बीएसपी और विश्विद्यालय प्रबन्धन के बीच शर्तों की दीवार
इससे पहले जमीन हस्तांतरण को लेकर बीएसपी और सीएसवीटीयू के बीच शर्तों के पालन को लेकर विवाद की स्थिति निर्मित हुई थी। जिसे विश्विद्यालय ने मान लिया, जिसमें बीएसपी कर्मचारी के बच्चों को के लिए 10 प्रतिशत सीटों का आरक्षण, सीएसवीटीयू के कार्य परिषद में बीएसपी के दो अधिकारियों की उपस्थिति मुख्य मांग थी।उसे अब सुलझा लिया गया है। विवि कार्य परिषद में बीएसपी के सीईओ और पीएंडए को शामिल किया गया है।

भुइयां पोर्टल में नही हुआ अपलोड
विश्वविद्यालय के कुलसचिव केके वर्मा का कहना है कि बीएसपी द्वारा हस्तांतरित भूमि का दस्तावेज मिल चुका है। लेकिन राज्य सरकार के भुइयां पोर्टल में इसका नक्शा और खसरा नंबर अपलोड नहीं किया गया है। राजस्व विभाग में तीन से चार बार अपील करने के बाद भी अब तक अधिकारियों द्वारा नक्शा और खसरा अपलोड नहीं किया गया है। जिसके कारण परेशानियां बढ़ गई है। वहीं तहसीलदार कहते हैं कि बीएसपी द्वारा हस्तांतरित भूमि के दस्तावेज नहीं हैं ऐसे 10 गांव हैं जिनका दस्तावेज राजस्व विभाग में नहीं है जिस कारण यह परेशानियां हो रही है। उन्हें राजस्व विभाग में पहल करनी चाहिए।

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CSVTU को हो रहा 425 करोड़ का नुकसान
इसकी वजह से अभी तक सीएसवीटीयू के हाथों से तीन सीएसआर प्रोजेक्ट छूट गए हैं। विश्विद्यालय में पीएचडी की सीटें 15 से कम होकर 10 हो गईं और भूमि क्लियरेंस नही होने की वजह से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की तकनीकी शाखा से मिलने वाली 425 करोड़ की राशि भी अटक गई। इस तरह बीएसपी को जमीन की राशि देने, बीएसपी से जमीन हस्तांतरित होने के बाद भी तकनीकी विवि को नुकसान हो रहा है।

फंड के आभाव में ये सभी काम अटके
तकनीकी विश्विद्यालय में कुल 4 अध्ययन शालाएं बनाई जानी हैं। इनमें से अभी एक ही कम्प्लीट हो पाया है। दो निर्माणाधीन है, और चौथे की सिर्फ बेस ही रखी जा सकी है। वहीं तकनीकी विश्वविद्याल परिसर में तालाब के पास बालक छात्रावास व बालिका छात्रावास बनाया जाना है, लेकिन यह काम भी फंड के अभाव में रुक गया है। विशविद्यलय के छात्रों के लिए यहां करीब तीन करोड़ की लागत से आधुनिक तकनीक की ई-बुक्स और ई-रिसोर्सयुक्त आधुनिक लाइब्रेरी बनाया जाना है। इसी तरह फंड के अभाव में विवि में इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रानिक्स विषय के छात्रों के लिए प्रयोगशाला बनाया जाना है। लेकिन काम रुका हुआ है।

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