सीएम भूपेश बघेल ने पशुचलित बुलट्रैक किया लांच, कल्टीवेटर व प्लांटर के लिए किसानो को मिलेगा अनुदान
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज दुर्ग जिले के ग्राम करसा में आयोजित किसान सम्मेलन में शामिल होने पहुंचे। मुख्यमंत्री ने हरेली त्यौहार के मौके पर किसानो के कृषि कार्य को आसान बनाने वाले दो तरह के कृषि यंत्रों की लॉन्चिंग की
दुर्ग, 28 जुलाई। छत्तीसगढ़ में आज हरेली का पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जा रहा है। हरेली का पर्व किसान अपने खेतों में फसल लगाने के बाद पशुधन और कृषि में प्रयुक्त होने वाले औजारों की पूजा पाठ कर मनाता है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज दुर्ग जिले के ग्राम करसा में आयोजित किसान सम्मेलन में शामिल होने पहुंचे। मुख्यमंत्री ने हरेली त्यौहार के मौके पर किसानो के कृषि कार्य को आसान बनाने वाले दो तरह के कृषि यंत्रों की लॉन्चिंग की और नामकरण भी किया। मुख्यमंत्री ने यहाँ पशुचलित बैटरी ऑपरेटेड कल्टीवेटर और प्लांटर को लॉन्च किया और उसे बुलट्रैक नाम भी दिया।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में तैयार किया गया है यंत्र
मुख्यमंत्री द्वारा लांच किए गए दोनों कृषि यंत्र इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय के वैज्ञानिकों ने बनाया है। इन यंत्रों को बनाने के लिए मुख्यमंत्री के कृषि सलाहकार प्रदीप शर्मा का विशेष मार्गदर्शन रहा है। इन यंत्रों की लॉन्चिंग मौके पर इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल भी मौजूद थे।
किसानों को मिलेगा लाभ
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इन यंत्रों के इस्तेमाल से किसानों को कृषि कार्य में लगने वाले समय में कमी आएगी साथ ही लागत में भी कमी होगी। दूसरी ओर बैटरी ऑपरेटेड कल्टीवेटर और प्लांटर के उपयोग से पशुओं पर भी बोझ कम पड़ेगा। बैटरी सह मोटर के उपयोग से मवेशियों को यंत्र को खींचने में बल कम लगता है, जिससे मवेशियों को थकान कम लगेगी।
सीएम ने ऐसे किया नामकरण
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ग्राम करसा में आयोजित किसान सम्मेलन में कृषि यंत्रों के स्टॉल में इन दोनों यंत्रों को लॉन्च करते हुए कहा कि इन यंत्रों के माध्यम से किसान कम लागत में खेती कर पाएंगे। यह यंत्र बैलों की मदद से चलित होगा इसलिए बुल और ट्रैक्टर के पार्ट्स लगे होने के कारण ट्रैक यानी इसे अब बुलट्रैक नाम से जाना जाएगा।
कल्टीवेटर की यह है विशेषता
सामान्यतः जुताई के कार्य के लिए कृषक देसी हल का उपयोग करते हैं। इसके पश्चात पाटा का उपयोग किया जाता है। इस दौरान खेत में ढेले टूट नहीं पाते। इससे बीज बोने वाले यंत्र को चलाने में कठिनाई होती है। ऐसे में द्वितीयक जुताई के लिए पशुचलित बैटरी ऑपरेटेड कल्टीवेटर कृषकों की समस्या का निदान कर सकता है। इस यंत्र में 750 वॉट (1एचपी) का मोटर लगा है और 48 वोल्ट पॉवर की बैटरी लगाई गई है। इस कल्टीवेटर की सहायता से 1 हेक्टेयर खेत को 5-7 घंटे में एक बार द्वितीयक जुताई की जा सकती है। इससे जहाँ मवेशियों को कम बल लगाना पड़ेगा तो वहीं कृषक भी सीट पर बैठकर आसानी से पूरे यंत्र को संचालित कर सकता है। इस पूरे यंत्र की लागत क़रीब 55-60 हज़ार रुपये बतायी जा रही है।
कतारबद्ध बुआई के काम आएगा प्लांटर
इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक द्वारा पशुचलित बैटरी ऑपरेटेड प्लांटर भी बनाया गया है। इसकी सहायता से कतारबद्ध बीज से बीज की दूरी बनाए रखते हुए बुआई की जा सकेगी। इस प्लांटर को कतार से कतार के बीच की दूरी फसल के अनुसार 20 से 50 सेन्टीमीटर तक व्यवस्थित कर सकते हैं। प्लांटर की लागत लगभग 20-25 हज़ार रुपये बताई जा रही है।












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