भिलाई में आकार ले रहा छत्तीसगढ़ का इकोफ्रेंडली IIT कैंपस, प्रधानमंत्री मोदी के हाथों होगा लोकार्पण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2018 में भिलाई आकर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी भिलाई के नए कैम्पस का भूमिपूजन कर छत्तीसगढ़ को एक बड़ी सौगात दी थी। जिसके बाद इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी भिलाई का स्थायी भवन
दुर्ग 14 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2018 में भिलाई आकर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी भिलाई के नए कैम्पस का भूमिपूजन कर छत्तीसगढ़ को एक बड़ी सौगात दी थी। जिसके बाद इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी भिलाई का स्थायी भवन का काम शुरू किया गया। इसके पहले चरण का काम दिसंबर माह तक पूरा कर लिया जाएगा। साल 2023 के जनवरी माह से छात्र यहां पढ़ाई कर सकेंगे। इस कैंपस का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों कराया जाएगा। फिलहाल रायपुर सेजबहार में जीईसी कैंपस में आईआईटी का संचालन किया जा रहा है। अब छात्रों को अपने नए कैंपस में शिफ्ट होने का बेसब्री से इंतजार है।

इन सुविधाओं से लैस होगा आईआईटी कैम्पस
इसके पहले चरण में 18 लैक्चर हॉल, क्लासरूम, इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट व साइंस डिपार्टमेंट के दो-दो भवन, मेस ब्लॉक, विवाहित छात्रावास, लाइब्रेरी, आईटीआईएस भवन के साथ लेक्चर रूम, सेंट्रल प्रोटोटाइप फैसिलिटी, सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन फैसिलिटी, कनेक्टिविटी कॉरिडोर, फैकल्टी एवं स्टाफ के लिए आवास, लाइब्रेरी एंड डाटा सेंटर, शॉपिंग सेंटर, स्वास्थ्य केंद्र, संस्थान क्लब और गेस्ट रूम का काम नवम्बर माह तक पूरा कर लिया जाएगा। आईआईटी के स्थायी कैम्पस में हाइटेक लेबोरेट्री से लेकर नई मशीने इंस्टॉल कर पूरा सेटअप डाला जाएगा। ताकि देश के दूसरे आईआईटी की तरह ये सुविधाएं आईआईटी भिलाई में पढ़ने वाले छात्रों को भी मिले।

700 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा इकोफ्रेंडली कैम्पस
पहले चरण में सरकार ने एलएन्डटी को 700 करोड़ रुपए दिए थे। आईआईटी भिलाई के डायरेक्टर डॉ. रजत मूना ने बताया कि पहले चरण के लिए सरकार से 700 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया था। निर्माण की जिम्मेदारी लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड कंपनी एलएंडटी) को दी गई है। कंपनी को निर्माण की सारी जिम्मेदारी दी गई है। इस कैंपस के निर्माण में प्रकृति के संरक्षण का खास ध्यान रखा गया है। कैंपस में पहले से मौजूद पेड़ व तालाबों को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। उन्हें प्राकृतिक रूप से ही सजाया जा रहा है। आवश्यक रूप से काटे गए पेड़ों की जगह कैंपस में और पेड़ लगाए जाएंगे। जिससे पूरी तरह से आईआईटी कैम्पस का वातावरण इको फ्रेंडली बना रहे।

कड़े संघर्षो के बाद भिलाई में बना आईआईटी
दरअसल दुर्ग जिले से पहले अभनपुर के करीब भरेगाभांठा गांव में आईआईटी कैम्पस का निर्माण होना था । लेकिन आईआईटी भिलाई के आने में उस अशासकीय संकल्प की बड़ी भूमिका रही। जिसे प्रेमप्रकाश पांडेय ने विस अध्यक्ष रहते हुए विधानसभा में पारित करवाया था। मोदी के पीएम बनने के बाद मंत्री ने सीएम को मांगपत्र सौंपा था। उसके बाद प्रदेश में आईआईटी की घोषणा हुई। पूर्व उच्च शिक्षा व राजस्व मंत्री प्रेम प्रकाश पांडेय ने पूर्व सीएम डॉ रमन सिंह की कैबिनेट में इसे दुर्ग के सिरसाखुर्द व कुटेलाभांठा गांव में बनाने का प्रस्ताव पास कराया। जिसके बाद केंद्रीय उच्च शिक्षा मंत्रालय की टीम ने यहां का सर्वे कर निर्माण के प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगाई।

भिलाई के 543 एकड़ में हो रहा कैम्पस का निर्माण
निर्माण एजेंसी एलएंडटी ने कुटेला घाटा, खपरी और सिरसा खुर्द की भूमि का परीक्षण किया और इसके बाद दुर्ग जिले के कुटेला भाटा और सिरसा खुर्द गांव में निर्माण कार्य शुरू किया गया। एजेंसी के अनुसार इन गांव की 534 एकड़ भूमि पर कैंपस का निर्माण हो रहा है। जिसमें लगभग एक लाख ब्यालीस हजार वर्ग मीटर में भवनों का निर्माण किया जा रहा है। पहले चरण में 32 प्रतिशत क्षेत्र में हॉस्टल, 26 प्रतिशत हिस्से पर रेसीडेंशियल एरिया और 42 प्रतिशत हिस्से पर एकेडमिक बिल्डिंग के साथ इंजीनियरिंग एंड साइंस ब्लॉक का निर्माण किया गया है।
पहला चरण दो साल में पूरा करने का रखा था लक्ष्य
निर्माण एजेंसी को पहले चरण का काम दो साल में पूरा करने का लक्ष्य दिया गया था। जिसके लिए एजेंसी को 181.93 हेक्टेयर जमीन आईआईटी के लिए दी गई। जिसमें 21 भवनों का निर्माण पहले चरण के तहत किया गया है। वहीं काम की शुरुआत 08 जुलाई 2020 को की गई। कंपनी को प्रथम चरण के सारे काम को 8 जुलाई 2022 तक दो साल के भीतर पूरा करना था। लेकिन स्थानीय तकनीकी कारणों से आईआईटी कैम्पस के निर्माण में समय बढ़ा दिया गया ।












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