Chhattisgarh : गरीबों के लिए चिरायु योजना बनी वरदान, दिल की बीमारी से पीड़ित मासूमो को मिला नया जीवन
दुर्ग, 19 सितम्बर। छत्तीसगढ़ सरकार के स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से चलाई जा रही योजना अब उन लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है जिनके लिए अपने नवजात का इलाज करा पाना नामुमकिन था। दुर्ग जिले में राज्य शासन की चिरायु योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम आंगनबाड़ी और स्कूलों में कैम्प लगाकर हृदय रोग से पीड़ित बच्चों की जांच कर रही है। जिसके माध्यम से 47 बच्चों में हृदय सबंधी रोग पाए गए हैं। जिनका इलाज अब राज्य सरकार के माध्यम से हो रहा है।

19 नवजातों का किया गया सफल ऑपरेशन
दुर्ग जिले में बीते पांच महीनों में तक पांच माह के दौरान आंगनबाड़ी और स्कूलों में स्वास्थ्य जांच कैंप लगाए गए। जिसमें जन्मजात ह्रदय रोग के पीड़ित 47 बच्चे मिले हैं। इनमें से ह्दय रोग से पीड़ित 19 बच्चों का सफल ऑपरेशन किया जा चुका है जिनका इको नॉर्मल मिला है। शेष 28 बच्चों की सर्जरी के लिए प्रक्रिया जारी है।

चिरायु के तहत डीआईसी सेंटर में होती है जांच
जिला अस्पताल के डीआईसी सेंटर पर किये गए जांच के लिए एसएमसी हार्ट इंस्टिट्यूट से डॉ अजय चौरसिया और डॉ तुषार मलेवार जिला अस्पताल पहुँचे थे। स्थानीय डॉक्टरों और चिरायु की टीम दावरा पहले बच्चों का चयन किया गया जिसके बाद हार्ट इंस्टिट्यूट के डॉक्टरों को बुलाया गया। जिन 28 बच्चों की सर्जरी बाकी है। इनमें से 5 बच्चे तत्काल सर्जरी के लायक हैं। इन बच्चो को 6 माह के ऑब्जर्वेशन में रखा गया है। जिनकी दूसरी जांच के बाद ऑपरेशन किया जाना तय किया जाएगा।

चिरायु योजना के तहत निशुल्क होती है सर्जरी
जिन बच्चों में इस तरह की हृदय सबंधी परेशानी पाई जाती है इसे चिन्हित कर उसके जांच से लेकर सर्जरी तक सभी सुविधाएं निशुल्क होती है। बच्चों को आवश्यकता अनुसार अलग अलग सर्जरी के लिए रेफर किया जाता है। इस योजना से जिले में रहने वाले आर्थिक तौर पर कमजोर वर्ग के परिवारों को बड़ी मदद मिली है। जिले में 1,043 आंगनबाड़ी और 429 स्कूलों तक चिरायु की टीम पहुंची। जहां 1,15,778 बच्चों की स्क्रिनिंग की गई। बच्चों में जन्म से कोई बीमारी तो नहीं है, इसकी जांच की गई। इसमें से आशंकित बच्चों को रेफर किया गया।
44 तरह की बीमारियों का किया जाता है इलाज
चिरायु योजना के तहत आंगनबाड़ी व स्कूलों में पढ़ रहे 18 साल तक के सभी बच्चों का नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण व इलाज किया जा रहा है। इसमें 44 तरह की बीमारियों का उपचार किया जाता है। जिसमें आंख में कम दिखाई देना, कानों से कम सुनाई देना, विटामिन की कमी, एनीमिया, हृदय रोग जैसी बीमारियों की पहचान कर उनका इलाज किया जाता है।
इलाज के बाद 18 बच्चों का इको मिला नॉर्मल
दुर्ग सीएमएचओ डॉ जेपी मेश्राम ने बताया कि जिले में चिरायु की 10 टीम स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्रों में स्क्रीनिंग कर रही है। दुर्ग जिला अस्पताल में हृदय रोग से सबंधित बच्चों के लिए शिविर लगाया गया था। जिसमें अब तक 47 बच्चे हृदय रोग से सबंधित पाए गए। इनमें से सर्जरी के बाद 18 बच्चो का इको नॉर्मल मिला है। बाकी बच्चों की सर्जरी के लिए प्रक्रिया की जा रही है।












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