Chhattisgarh: लम्पी वायरस को लेकर जारी अलर्ट, कामधेनु विवि ने बनाई टीम, वेटनरी डॉक्टरों की छुट्टी कैंसल

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्थित कामधेनु विश्वविद्यालय ने राजस्थान में लम्पी वायरस से गायों की मौत को देखते हुए 15 वेटनरी डॉक्टरों की एक टीम बनाई है।राज्य सरकार ने सभी वेटनरी डॉक्टरों की छुट्टियां निरस्त कर दी गई है।

दुर्ग, 07 अगस्त। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्थित कामधेनु विश्वविद्यालय ने राजस्थान में लम्पी वायरस से गायों की मौत को देखते हुए 15 वेटनरी डॉक्टरों की एक टीम बनाई है जो राज्य के सभी जिलों के गौशालाओं में जाकर लम्पी वायरस से बचाव को लेकर जानकारी देंगे, साथ ही जानवरों की जांच भी करेंगे। इस लम्पी वायरस के चलते राज्य सरकार ने सभी वेटनरी डॉक्टरों की छुट्टियां निरस्त कर दी गई है। जिलों में वेटनरी डॉक्टरों को इस वायरस के संबंध में एक्टिव रहने कहा गया है।

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छ.ग. में पशुपालन विभाग हुआ अलर्ट
छत्तीसगढ़ में भले अभी तक लम्पी वायरस के एक भी केस सामने नहीं आया है। लेकिन पशुपालन विभाग पूरी तरह अलर्ट है। छत्तीसगढ़ सरकार ने सभी जिलों के अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने को कहा है. राज्य के सभी वेटनरी डॉक्टरों की छुट्टियां निरस्त कर दी गई है। दरअसल छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश के रतलाम में गायों में इसके लक्षण पाए गए हैं।जिनकी जांच लैब में चल रही है। वही राजस्थान और गुजरात के पशुओं में भी सबसे अधिक मामले लंबी वायरस के पाए जा रहे हैं।
कामधेनु विवि ने बनाई डॉक्टरों की टीम
राजस्थान में लम्पी वायरस के कारण हो रही गौवंश की मौत के बाद अब छत्तीसगढ़ सरकार के पशुपालन विभाग के निर्देश पर दुर्ग स्थित स्व वासुदेव चंद्राकर कामधेनू विश्वविद्यालय की तरफ से एक टीम बनाई गई है। जिसमें 15 वेटनरी डॉक्टरों व विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। यह टीम प्रदेश के सभी जिलों के गौशालाओं में जाकर पशुपालकों व गौशालाओं में इसकी जानकारी व बचाब के उपाय बताएंगे।

अब तक नही मिला लम्पी का इलाज
कामधेनु विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉक्टर एसके मैथी ने बताया कि गुजरात और राजस्थान में इस वायरस से गायें अधिक संक्रमित हो रहे हैं। यह पॉक्स वायरस मच्छर मक्खी आदि के माध्यम से पशुओं में जल्दी फैलता है। लम्पी वायरस से दूधारू पशु जल्दी संक्रमित हो रहें है। इसके लक्षण जैसे गायों के शरीर पर छोटे छोटे चकते जैसी गांठें बनकर घाव बन जाना, गाय का कमजोर होना, गाय को भूख न लगना हैं। इसका अभी तक कोई भी इलाज नहीं है लेकिन कुछ इंजेक्शन और दवाइयों के जरिए इस बीमारी का इलाज किया जाता है।
बचाव के लिए पशुओं को करें कवारन्टीन
डॉक्टर मैथी के अनुसार लम्पी वायरस की रोकथाम के लिए सबसे पहले संबंधित जानवर को क्वारन्टीन किया जाता है। समय-समय पर जानवर का ऑक्सीजन लेवल और अन्य चीजें चेक की जाती हैं. इसके बाद जानवरों को ग्लूकोज और अन्य चीजें चढ़ाई जाती हैं। लम्पी वायरस होने पर जनावर की दूध कम होने लगता है। वायरस से संक्रमित जानवर का दूध पीने से किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नहीं है. ऐसा इसलिए है क्योंकि दूध आने के बाद उसे तत्काल हर घर में उबाला जाता है. उबालने से उसमें मौजूद विषाणु और कीटाणु नष्ट हो जाते है। इसलिए इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है।

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