कोयले की कमी से जूझ रहा बीएसपी उत्पादन में पिछड़ा, दो दिनों का बचा स्टॉक, संकट का कारण बना रेलवे
सेल (SAIL) की ध्वजवाहक इकाई भिलाई इस्पात संयंत्र ( Bhilai Steel Plant) कोयले की कमी से जूझ रहा है। जिसके चलते आज ब्लास्ट फर्नेस -6 को बंद करना पड़ा। ब्लास्ट फर्नेस -1 को कोकिंग कोल की कमी के कारण पहले ही बंद किया जा चुका
दुर्ग, 21 जुलाई। एशिया के सबसे बड़े इस्पात संयंत्र के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि जब दो ब्लास्ट फर्नेसों को शट डाउन कर दिया गया है। इसका प्रमुख कारण कोयले की कमी को माना जा रहा है। दरअसल कुछ महीनों से सेल (SAIL) की ध्वजवाहक इकाई भिलाई इस्पात संयंत्र ( Bhilai Steel Plant) कोयले की कमी से जूझ रहा है। जिसके चलते आज ब्लास्ट फर्नेस -6 को बंद करना पड़ा। ब्लास्ट फर्नेस -1 को कोकिंग कोल की कमी के कारण पहले ही बंद किया जा चुका है।

आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से आयात होता है कोयला
बीएसपी में कोक बनाने के लिए आस्ट्रेलिया , न्यूजीलैंड जैसे देशों से आयातित कोयला उपयोग करता है। विदेशी कोल में राख की मात्रा स्वदेशी कोयले से काफी कम होती है। इसलिए ब्लास्ट फर्नेस में विदेशी कोयले से बने ही कोक का उपयोग होता है। भिलाई इस्पात संयंत्र को प्रतिदिन 15 हजार टन कोयले की आवश्यकता होती है।
कोयला संकट दूर होने तक उत्पादन में कटौती
पिछले 10 दिनों में भिलाई इस्पात संयंत्र के हाट मेटल उत्पादन में 3000 टन प्रतिदिन तक की कमी आ चुकी है। अभी भी लोहा उत्पादन के लिए ब्लास्ट फर्नेस में 85 फीसद तक आयातित कोकिंग कोल उपयोग किया जाता है। ब्लास्ट फर्नेस एक और छह के बंद होते ही अब भिलाई इस्पात संयंत्र का हाट मेटल प्रोडक्शन काफी कम हो गया है। महज 8 से 10 दिनों में ही 15 हजार टन प्रतिदिन के उत्पादन से घटकर 11- 12 हजार टन तक पहुंच गया है।
कोयले की कमी की वजह बन रेलवे
भिलाई इस्पात संयंत्र को कोयले की आपूर्ति समय पर इसलिए नही हो पा रही है क्योंकि उसे विदेशी कोल को भिलाई तक लाने के लिए पर्याप्त संख्या में वैगन नही मिल पा रहे है। बताया जा रहा है 5 लाख टन कोकिंग कोल विशाखापट्टनम पोर्ट पर पहुंच चुका है लेकिन उसे लाने के लिए रेलवे की ओर से एक्सट्रा रैक उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं।
तीन ब्लास्ट फर्नेस से ही हो रहा उत्पादन
कोल संकट के कारण बीएसपी प्रबंधन को 28 जून को फर्नेस नंबर एक को शटडाउन करना पड़ा। उसके बाद 3 जुलाई को फनेंस नंबर 6 को शटडाउन में लिया गया। बीएसपी में केवल तीन फर्नेस ही उत्पादन में रह गए हैं। भिलाई इस्पात संयंत्र की दूसरी सबसे बड़ी ब्लास्ट फर्नेस पिछले साल अगस्त से कैपिटल रिपेयर में है। जब तक कोयला संकट दूर नहीं होता तब तक मात्र ब्लास्ट फर्नेस 4 ,5 और 8 से ही उत्पादन होगा। यदि अधिकतम उत्पादन भी देखें तो तीनों फर्नेस का उत्पादन 12000 प्रतिदिन से अधिक नही होगा। जिसमें ज्यादातर हिस्सा ब्लास्ट फर्नेस -8 का होगा। जहां ब्लास्ट फर्नेस 4 और 5 से अधिकतम 3000 टन इस्पात उत्पादन होता है। महामाया ब्लास्ट फर्नेस आठ से 8000 प्रतिदिन होता है।
लगातार बना हुआ है कोयला संकट, प्रोडक्शन प्रभावित
कोयले का संकट पिछले करीब 2 महीनों से लगातार बना हुआ है। पहला भी संकट की वजह से प्रोडक्शन प्रभावित रहा। इसके बाद पुनः यह समस्या सामने आई है। बीएसपी के अधिकारियों ने इसे लेकर रेलवे प्रबंधन से बात की है। साथ ही रैक उपलब्ध कराने कहा है। ताकि संयंत्र के लिए पर्याप्त कोयले की आपूर्ति हो सके।












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