मुस्लिम बहुल इलाके में फहराया भगवा, कौन हैं BJP के मोहन सिंह बिष्ट जिन्होंने मुस्तफाबाद में दर्ज की प्रचंड जीत
Who is Mohan Singh Bisht: दिल्ली विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को बड़ी सफलता मिली है। मुस्लिम बहुल मुस्तफाबाद सीट पर बीजेपी ने जीत दर्ज की, जहां मोहन सिंह बिष्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के उम्मीदवार अदील अहमद खान को 17,578 वोटों के अंतर से हराया।
मुस्तफाबाद विधानसभा सीट पर 39.5% मुस्लिम आबादी है और इस सीट पर आमतौर पर गैर-बीजेपी पार्टियों का दबदबा रहा है। लेकिन इस बार बीजेपी ने यहां आक्रामक रणनीति अपनाई और मोहन सिंह बिष्ट जैसे अनुभवी नेता को मैदान में उतारकर यह जीत अपने नाम कर ली।

मोहन सिंह बिष्ट को करावल नगर से क्यों हटाया गया?
मोहन सिंह बिष्ट दिल्ली की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं और वह पहले करावल नगर विधानसभा सीट से विधायक थे। 1998 में उन्होंने पहली बार यह सीट जीती थी और लगातार 2015 तक इस सीट पर काबिज रहे। हालांकि, 2015 के चुनाव में उन्हें आम आदमी पार्टी (AAP) के कपिल मिश्रा ने हरा दिया।
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पांच साल बाद, 2020 के चुनाव में बिष्ट ने करावल नगर सीट पर वापसी की और AAP के दुर्गेश पाठक को हराकर फिर से विधायक बने। लेकिन इस बार बीजेपी ने करावल नगर से कपिल मिश्रा को टिकट दे दिया, जिससे बिष्ट नाराज हो गए और इसे पार्टी की "बड़ी गलती" बताया।
बीजेपी के आंतरिक सर्वेक्षण में यह पाया गया कि करावल नगर के मतदाता कपिल मिश्रा को ज्यादा पसंद कर रहे थे, क्योंकि वह हिंदुत्व और पूर्वांचली समुदाय के मजबूत नेता माने जाते हैं। इससे बीजेपी ने रणनीति बदली और बिष्ट को मुस्तफाबाद से टिकट देकर वहां जीत की उम्मीद जताई।
मुस्तफाबाद क्यों था चर्चा में?
मुस्तफाबाद सीट इस बार चुनाव से पहले ही चर्चा का केंद्र बनी रही। यहां AIMIM ने आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद और 2020 दिल्ली दंगों के आरोपी ताहिर हुसैन को टिकट दिया था।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली का यह इलाका 2020 के दंगों में सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ था, जिसमें कम से कम 53 लोगों की जान गई थी। इन दंगों के कारण यह विधानसभा सीट राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बन गई थी।
बीजेपी ने यहां एक मजबूत उम्मीदवार की जरूरत को समझा और मोहन सिंह बिष्ट को मैदान में उतारा, क्योंकि वह इस इलाके में पहले भी सक्रिय रहे हैं और जनता के बीच उनकी अच्छी पकड़ है।
मोहन सिंह बिष्ट कौन हैं?
मोहन सिंह बिष्ट दिल्ली की राजनीति में एक अनुभवी और जमीनी नेता माने जाते हैं। उन्होंने 1998 में करावल नगर से अपना पहला चुनाव जीता था और इसके बाद लगातार चार बार (1998-2008) विधायक बने।
2015 में आम आदमी पार्टी की लहर के कारण उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 2020 में उन्होंने फिर वापसी की और विधायक बने। इस बार बीजेपी ने उन्हें मुस्तफाबाद भेजकर एक नई जिम्मेदारी सौंपी, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया और जीत हासिल की।
बीजेपी के वरिष्ठ नेता उन्हें "जनता के बीच आसानी से पहुंच रखने वाला नेता" मानते हैं। बिष्ट ने अपने पिछले कार्यकाल में कई विकास योजनाओं को लागू करने और जनता की समस्याओं को हल करने में अहम भूमिका निभाई।
बिष्ट पर 2020 दंगों में लगे थे आरोप
मोहन सिंह बिष्ट का नाम 2020 दिल्ली दंगों के दौरान विवादों में भी आया था। एक महिला ने उन पर आरोप लगाया था कि उन्होंने एक भीड़ का नेतृत्व किया था और उसकी दुकान में आग लगवाई थी। हालांकि, उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं हुआ और कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई।
इसके बावजूद, बीजेपी ने उनके राजनीतिक अनुभव और स्थानीय पकड़ को देखते हुए उन्हें मुस्तफाबाद से उम्मीदवार बनाया, और उनका यह दांव सफल रहा।
मुस्तफाबाद में बीजेपी की जीत का क्या मतलब है?
मुस्तफाबाद सीट पर जीत बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सीट मुस्लिम बहुल इलाका होने के कारण आमतौर पर गैर-बीजेपी पार्टियों के पक्ष में जाती रही है।
मोहन सिंह बिष्ट की जीत दिखाती है कि बीजेपी की रणनीति कारगर रही और उन्होंने मुस्तफाबाद में अपने वोट बैंक को मजबूत किया। इस जीत से बीजेपी को दिल्ली में और मजबूती मिलेगी, जबकि AAP और AIMIM को अपने प्रदर्शन पर फिर से विचार करना पड़ेगा।
अब देखना यह होगा कि विधायक बनने के बाद मोहन सिंह बिष्ट इस इलाके में क्या बदलाव लाते हैं और जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतरते हैं।
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