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क्या है दिल्ली का Carbon Credit Yojana? इस नीति से घटेगा प्रदूषण और बढ़ेगी कमाई, मास्टर प्लान तैयार

Carbon Credit Yojana Delhi: दिल्ली में हवा को साफ करने की जंग अब सिर्फ पर्यावरण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे सरकार की कमाई भी होने वाली है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है, जो पर्यावरण सुरक्षा और आर्थिक फायदे दोनों को एक साथ जोड़ता है।

दिल्ली सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में 'कार्बन क्रेडिट मोनेटाइजेशन फ्रेमवर्क' को मंजूरी दे दी गई है। इसके बाद दिल्ली अपने ग्रीन प्रोजेक्ट्स से होने वाली प्रदूषण में कमी को पैसों में बदल सकेगी।

Carbon Credit Delhi

🟡 क्या है कार्बन क्रेडिट योजना का असली खेल (what is Carbon Credit Yojana)

सरल शब्दों में कहें तो जब कोई सरकार या संस्था ऐसे काम करती है जिससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है, तो उसकी उस बचत को 'कार्बन क्रेडिट' कहा जाता है।

अब दिल्ली सरकार अपनी इलेक्ट्रिक बसें, सोलर एनर्जी, बड़े स्तर पर पौधारोपण और कचरा प्रबंधन जैसी योजनाओं से जो प्रदूषण कम कर रही है, उसे वैज्ञानिक तरीके से मापा जाएगा। इसके बाद इस बचत को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार कार्बन क्रेडिट के रूप में रजिस्टर किया जाएगा और फिर इन क्रेडिट्स को राष्ट्रीय और वैश्विक कार्बन मार्केट में बेचा जाएगा।

🟡 कैबिनेट के फैसले से खुले कमाई के नए रास्ते

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस नई नीति से सरकार को एक अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा, जिससे विकास योजनाओं को और मजबूती मिलेगी।

इस मॉडल के तहत मिलने वाला पैसा सीधे राज्य के समेकित कोष यानी Consolidated Fund of the State में जाएगा और इसका इस्तेमाल जनहित से जुड़ी योजनाओं में किया जाएगा। इसका मतलब है कि साफ हवा के साथ-साथ शहर को बेहतर सड़क, ट्रांसपोर्ट और अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी।

🟡 दिल्ली बनेगी कार्बन मार्केट की बड़ी खिलाड़ी

सरकार का मानना है कि इस पहल से दिल्ली देश का ऐसा पहला बड़ा राज्य बन सकता है जो कार्बन मार्केट का पूरा फायदा उठाएगा। इससे भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को मजबूती मिलेगी और दुनिया के सामने दिल्ली एक जिम्मेदार और टिकाऊ शहर के रूप में उभरेगी। पर्यावरण विभाग को इस पूरी योजना का नोडल विभाग बनाया गया है, जो अलग-अलग विभागों की ग्रीन योजनाओं को कार्बन क्रेडिट में बदलने की जिम्मेदारी निभाएगा।

🟡 इलेक्ट्रिक बस से लेकर सोलर पैनल तक सब बनेगा कमाई का जरिया

दिल्ली में पहले से ही हजारों इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं। शहर में बड़े पैमाने पर पेड़ लगाए जा रहे हैं, सोलर एनर्जी को बढ़ावा दिया जा रहा है और कचरे से ऊर्जा बनाने जैसे प्रोजेक्ट चल रहे हैं। अब इन सभी पहलों से जो प्रदूषण घटेगा, उसे आंकड़ों के जरिए मापा जाएगा और कार्बन क्रेडिट के रूप में बाजार में उतारा जाएगा।

🟡 सरकार को बिना खर्च किए होगी कमाई

इस नीति की सबसे दिलचस्प बात इसका फाइनेंशियल मॉडल है। पर्यावरण विभाग एक पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया के जरिए एक विशेषज्ञ एजेंसी चुनेगा। यही एजेंसी यह तय करेगी कि किन योजनाओं से कितने कार्बन क्रेडिट बन सकते हैं, उनका रजिस्ट्रेशन कराएगी और उन्हें मार्केट में बेचेगी।

यह पूरा सिस्टम रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल पर चलेगा, यानी दिल्ली सरकार को एक भी पैसा पहले से खर्च नहीं करना होगा। बिक्री से जो रकम आएगी, उसका बड़ा हिस्सा सरकार के पास जाएगा और थोड़ा हिस्सा एजेंसी को मिलेगा।

🟡 खजाने में सीधे जाएगा पैसा

कार्बन क्रेडिट से मिलने वाली पूरी कमाई सीधे राज्य के संचित कोष में जमा होगी और सरकार के आधिकारिक खातों में दिखाई जाएगी। इससे पारदर्शिता बनी रहेगी और यह पैसा फिर से दिल्ली के विकास और पर्यावरण सुधार में लगाया जा सकेगा।

इस तरह दिल्ली सरकार ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं। हवा भी साफ होगी और सरकार की कमाई भी बढ़ेगी। आने वाले समय में यह मॉडल बाकी राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।

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