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सुप्रीम कोर्ट ने लगाई बर्खास्त बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव को फटकार, वाराणसी से नामांकन पर्चा खारिज होने के मामले में सुरक्षित रखा फैसला

दिल्ली। वाराणसी से 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने उम्मीदवार के तौर पर उतरे बीएसएफ से बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव का नामांकन पर्चा खारिज होने के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में डाली गई याचिका वहां से भी खारिज कर दी गई थी। हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ तेज बहादुर यादव ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को हुई सुनवाई में तेज प्रताप यादव को फटकार लगाते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया है। वाराणसी से तेज बहादुर यादव ने नामांकन पर्चा भरा था लेकिन निर्वाचन अधिकारी ने उसे यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि बीएसएफ के अनापत्ति प्रमाणपत्र वो समय पर जमा नहीं कर पाए जिसमें यह लिखा हो कि उनको भ्रष्टाचार या द्रोह जैसे आचरण के लिए बर्खास्त नहीं किया गया। वहीं तेज बहादुर यादव का आरोप था कि निर्वाचन अधिकारी ने उनको प्रमाणपत्र लाने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया।

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    Supreme Court reserves order on petition of dismissed BSP Jawan Tej Bahadur Yadav

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आप कानून का दुरुपयोग कर रहे हैं तेज बहादुर

    सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायधीश एसए बोबडे की खंडपीठ के सामने तेज बहादुर यादव के वकील प्रदीप कुमार यादव पेश हुए। वकील इस बात का सबूत नहीं पेश कर पाए कि तेज बहादुर यादव ने बीएसएफ से अनापत्ति प्रमाणपत्र लाने के लिए रिटर्निग ऑफिसर से समय मांगा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे पेश हुए। खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई स्थगित करने के तेज बहादुर यादव के वकील के अनुरोध को अस्वीकारते हुए फटकार लगाई और कहा कि आप कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहे हैं। मुख्य न्यायधीश ने कहा कि पहले ही सुनवाई तीन बार स्थगित की जा चुकी है, इस मामले को इस तरह से नहीं खींचा जा सकता है क्योंकि इसमें प्रतिवादी देश के प्रधानमंत्री हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपने फैसले को सुरक्षित रख लिया है।

    Supreme Court reserves order on petition of dismissed BSP Jawan Tej Bahadur Yadav

    पर्चा खारिज होने के बाद हाईकोर्ट में डाली थी चुनाव याचिका

    पर्चा खारिज होने के बाद तेज बहादुर यादव ने निर्वाचन आयोग के इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट में डाली गई अर्जी में तेज बहादुर यादव ने कहा था कि उन्होंने नॉमिनेशन पेपर के साथ बीएसएफ से बर्खास्त किए जाने के दस्तावेज भी दिए थे जिसमें लिखा था कि अनुशासनहीनता की वजह से उनके खिलाफ एक्शन हुआ और जिस दस्तावेज को लाने के लिए कहा गया उसके लिए रिटर्निंग ऑफिसर ने उचित समय नहीं दिया गया। अर्जी में यह भी आरोप लगाया था कि रिटर्निंग ऑफिसर ने यह फैसला वाराणसी क्षेत्र में उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को लाभ पहुंचाने के लिए लिया क्योंकि तेज बहादुर यादव की उम्मीदवारी मजबूत मानी जा रही थी और उनको प्रदेश की बड़ी पार्टी सपा का भी समर्थन मिला था।

    हाईकोर्ट के फैसले को दी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तेज बहादुर यादव की अर्जी के औचित्य पर सवाल उठाते हुए उसे खारिज कर दिया था कि वे वाराणसी के मतदाता नहीं थे और चुनाव में उम्मीदवार भी नहीं। हाईकोर्ट ने यह कहा था कि जो चुनाव लड़ चुका हो वही दूसरे के निर्वाचन के खिलाफ चुनाव याचिका डाल सकता है। इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में डाली याचिका में तेज बहादुर यादव ने कहा कि हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का ध्यान नहीं रखा जिसमें यह कहा गया है कि अगर किसी का नामांकन पर्चा निर्वाचन अधिकारी निरस्त करता है तो इस आधार पर ही वह चुनाव याचिका दायर कर सकता है।

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