Parvesh Verma: केजरीवाल को हराकर भी Delhi CM की रेस में कहां पिछड़ गए प्रवेश वर्मा? पढ़िए अंदर की 3 वजह
Parvesh Verma Cabinet Minister: नई दिल्ली सीट पर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को हराने के बाद एक आम धारणा बन रही थी कि बीजेपी प्रवेश वर्मा को ही दिल्ली की गद्दी सौंपेगी। वह पार्टी के दो बार के पूर्व सांसद और एक बार के पूर्व विधायक भी रहे हैं। लेकिन, फिर भी भाजपा ने रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया तो साफ हो गया कि कुछ न कुछ ऐसी वजहें रही होंगी, जिसमें प्रवेश वर्मा उनके मुकाबले सीएम की रेस में पिछड़ गए।
प्रवेश वर्मा भी रेखा गुप्ता की तरह ही संघ (RSS) के स्वयं सेवक हैं। दिल्ली और देश की राजनीति में प्रवेश वर्मा का गुप्ता से ज्यादा अनुभव है। उनका एक अपना बड़ा जनाधार है और वह एक बड़ी सियासी विरासत से निकलकर यहां तक पहुंचे हैं, लेकिन फिर भी अगर उनके बजाय भारतीय जनता पार्टी ने रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाना तय किया है तो इसके पीछे मुख्य रूप से अंदर की तीन वजहें ही मानी जा रही हैं।

Parvesh Verma Delhi Minister: 1) वंशवाद के आरोपों के डर से बीजेपी ने नहीं लिया चांस
प्रवेश वर्मा जाट बिरादरी से आते हैं। उनके पिता साहिब सिंह वर्मा बीजेपी की पहली सरकार में दिल्ली के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। माना जा रहा है कि प्रवेश वर्मा के परिवार की यही सियासी विरासत उनके खिलाफ चली गई।
क्योंकि, बीजेपी उन्हें मुख्यमंत्री बनाकर वंशवाद का आरोप नहीं झेलना चाहती थी। बीजेपी के लिए कांग्रेस और विपक्षी दलों के खिलाफ वंशवाद बहुत ही बड़ा मुद्दा है और अगर वर्मा को सीएम बनाती तो विपक्षी दलों के खिलाफ उसकी यह लड़ाई कमजोर पड़ने का डर था।
Parvesh Verma Delhi Cabinet Minister: 2) जीत के तुरंत बाद अमित शाह से मिलने पहुंचना निगेटिव चला गया!
बीजेपी सूत्रों का कहना है कि 'नई दिल्ली सीट पर केजरीवाल को 4,089 वोटों से हराने के बाद प्रवेश वर्मा इतने उत्साहित हो गए कि उन्हें पार्टी की शालीनता और शिष्टाचार वाली परंपरा का भी ख्याल नहीं रहा। वह तत्काल ही बिना समय लिए गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात के लिए पहुंच गए। हालांकि, अमित जी उनसे मिले भी। लेकिन, पार्टी के एक बड़े वर्ग में इससे अच्छा संदेश नहीं गया। क्योंकि, भाजपा एक ऐसी अनुशासित पार्टी है, जो संकेतों और संदेशों को हमेशा बहुत अधिक महत्त्व देती है।'
बीजेपी सूत्र के अनुसार इससे 'कुछ मीडिया वालों को इस तरह की कयासबाजी का मौका मिल गया कि भाजपा प्रवेश वर्मा को ही मुख्यमंत्री बनाने जा रही है। बिना किसी तथ्य के कुछ बड़े मीडिया चैनल लगातार उन्हें मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे बताने लगे। एक अभियान चला दिया गया। जबकि, बीजेपी में शिष्टाचार की बहुत ही ज्यादा अहमियत है और हर फैसला लेने से पहले सभी बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया जाता है और पार्टी अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं से काफी मर्यादित आचरण की उम्मीद करती है।'
Parvesh Verma News: 3) प्रवेश वर्मा की जीत के बाद परिवार का मीडिया में लगातार मुखर रहना
नई दिल्ली सीट पर प्रवेश वर्मा के चुनाव अभियान में उनकी पत्नी और बेटियां त्रिशा और सानिधि सिंह वर्मा ने बहुत मेहनत की थी। जब उन्होंने केजरीवाल को हरा दिया तो स्वाभाविक रूप से मीडिया वालों ने उनकी बेटियों का इंटरव्यू लेना शुरू कर दिया। वैसे तो इस दौरान त्रिशा और सानिधि ने बहुत ही शालीनता का परिचय दिया।
लेकिन, जिस तरह से प्रवेश वर्मा के सीएम पद की दावेदारी को लेकर बहुत कुरेदने पर उन्होंने यह कहना शुरू किया कि 'पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी उनके पिता उसे निभाएंगे।' सूत्रों का कहना है कि इसे कहीं न कहीं एक तरह से दबाव की राजनीति समझा गया और कार्यकर्ताओं और नेताओं को यह पसंद नहीं आया।












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