OPINION: दिल्ली की औद्योगिक नीति का मास्टर प्लान, 10 साल का मसौदा विकास के लिए अहम
दिल्ली सरकार प्रदूषण पर नियंत्रण के प्रयासों के साथ औद्योगिक विकास की नीति पर भी फोकस कर रही है। सरकार ने नई औद्योगिक विकास नीति को लेकर एक श्वेत पत्र में जारी किया है। जिसे दिल्ली औद्योगिक एवं आर्थिक विकास नीति 2023-33 नाम दिया गया। दिल्ली सरकार का मानना है कि पुरानी अद्योगिक नीति में कुछ अहम सुधारों के साथ लाई जाने वाली नई नीति राज्य के आर्थिक विकास के साथ पर्यावरणीय क्षति को भी रोकने में सक्षम होगी।
दिल्ली की आम आदमी पार्टी नेतृत्व वाली सरकार नई विकास नीति औद्योगिक, आर्थिक और आइटी क्षेत्र पर केंद्रित होगी। केजरीवाल सरकार ने इस नीति का नीति का मसौदा अगले 10 साल की स्थितियों को देखते हुए तैयार किया है। इस नीति की उद्देश्य नीति का उद्देश्य सेवा क्षेत्र से संबंधित औद्योगिक को बढ़ावा देना है। नई नीति को लेकर सरकार ने जनता से भी सुझाव मांगे हैं। ऐसे में नीति एक पारदर्शी तरीके लागू करने की योजना है। नई नीति का उद्देश्य सेवा क्षेत्र और उच्च प्रौद्योगिकी से संबंधित औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना है।

दिल्ली की नई औद्योगिक नीति का मसौदा केजरीवाल सरकार की ओर जारी श्वेत पत्र के माध्यम से देखा जा सकता है। इसके लिए उद्योग विभाग की वेबसाइट www.industries.delhigovt.nic.in पर क्लिक करना होग। यहां लोग अपना सुझाव भी दे सकते हैं। जिसके आधार पर सरकार नीति में बदलाव की करने पर विचार कर सकती है। नई औद्योगिक गतिविधि दिल्ली के मास्टर प्लान के अनुसार संचालित की जा सकेगी। जिसमें नई औद्योगिक गतिविधि हाई-टेक क्षेत्रों और सेवा आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने पर फोकस किया जाएगा।
केजरीवाल सरकार यूं ही ये नीति नहीं ला रही। दरअसल, दिल्ली में महाराष्ट्र को छोड़कर अन्य सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में सबसे अधिक कंपनियां हैं। ऐसे में अगर व्यवस्थित रूप से आद्योगिक नीति लागू की जाए तो इंडस्ट्रियल क्षेत्र में दिल्ली की हिस्सेदारी कई गुना बढ़ सकती है। इन्हीं मुद्दों को लेकर दिल्ली सरकार पिछले 5 साल से इस क्ष्रेत्र में गंभीरता से काम कर रही है।
दिल्ली सरकार कंझावला और बापरोला संयुक्त रूप से इंडस्ट्रियल एरिया के विकास के लिए 1220 एकड़ भूमि अधिगृहीत कर रही है। जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी और इससे संबंधित इकाइयां, खाद्य प्रसंस्करण, मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार, कपड़ा, बिजली के सामान और उपकरण, ऑटोमोबाइल, फर्नीचर और मशीनरी आदि से संबंधित इकाइयां संचालित की जा सकेंगी।
वहीं औद्योगिक क्षेत्रों का विकास में किसी प्रकार की कानूनी बाधा का समाधान किया जा सके इसके लिए दिल्ली सरकार ने नई इंडस्ट्रियल एरिया के विकास के लिए हाल में एक सलाहकार नियुक्त किया है। दावा किया जा रहा है कि दिल्ली सरकार के इस प्लान ने राज्य में बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। कंझावला और बापरोला दोनों औद्योगिक क्षेत्रों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कुल मिलाकर करीब 10 लाख से अधिक नौकरियों के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे।












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