मेट्रो नहीं, अब पूरा शहर बदलेगा ‘नमो भारत’ के साथ! NCRTC-SPA की साझेदारी से स्टेशन के आसपास होगा बड़ा खेल
Namo Bharat Corridor: दिल्ली-NCR की तस्वीर आने वाले वर्षों में पूरी तरह बदलने वाली है। 'नमो भारत' ट्रेन कॉरिडोर अब सिर्फ तेज रफ्तार सफर तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इनके आसपास पूरे इलाके को नए सिरे से बसाने की तैयारी शुरू हो गई है।
इसी दिशा में नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (SPA), दिल्ली के बीच एक अहम समझौता हुआ है। इस करार का मकसद है ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट यानी TOD को जमीन पर उतारना।

स्टेशन के आसपास बदलेगी ज़िंदगी
इस साझेदारी के तहत SPA दिल्ली, NCRTC को तकनीकी और शैक्षणिक सहयोग देगा, ताकि नमो भारत कॉरिडोर और स्टेशनों के आसपास का विकास योजनाबद्ध, टिकाऊ और यात्रियों के अनुकूल हो सके। TOD मॉडल के तहत स्टेशन के पास घनी आबादी, मिश्रित उपयोग वाली इमारतें, ऑफिस, दुकानें, घर और जरूरी सुविधाएं एक ही दायरे में विकसित की जाएंगी। इसका सीधा फायदा यह होगा कि लोगों को निजी वाहनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
पैदल चलना आसान, आखिरी सफर होगा छोटा
अधिकारियों के मुताबिक, इस प्लानिंग से लास्ट माइल कनेक्टिविटी बेहतर होगी। स्टेशन तक पैदल पहुंच आसान होगी, सार्वजनिक जगहें बढ़ेंगी और आसपास ही रोजमर्रा की जरूरतें पूरी हो सकेंगी। इसका असर ट्रैफिक जाम, प्रदूषण और ईंधन खर्च पर भी पड़ेगा।
जमीन से कमाई, प्रोजेक्ट होंगे मजबूत
NCRTC और SPA मिलकर लैंड यूज एफिशिएंसी पर भी काम करेंगे। जमीन की सही प्लानिंग से सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिलेगा, जिसे इंफ्रास्ट्रक्चर में दोबारा लगाया जा सकेगा। इसके लिए 'लैंड वैल्यू कैप्चर' जैसे मॉडल पर भी विचार किया जाएगा, जिससे प्रोजेक्ट आर्थिक रूप से मजबूत बनें।
छह बिंदुओं वाला मास्टर प्लान
इस सहयोग के तहत एक छह सूत्रीय फ्रेमवर्क तैयार किया गया है, जिसमें TOD कॉरिडोर की पहचान, प्रभाव क्षेत्र की अधिसूचना, लोकल एरिया प्लान, जमीन और संपत्तियों की सूची, विकास की संभावनाओं का आकलन और नीतिगत सहयोग शामिल है। SPA दिल्ली, शहरी नियोजन में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस होने के नाते सर्वे, डेटा एनालिसिस और स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन में अहम भूमिका निभाएगा।
नमो भारत का अगला पड़ाव
दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर पहले से चालू है, जहां TOD को शुरुआत से ही प्लान का हिस्सा बनाया गया है। वहीं दिल्ली-गुरुग्राम-बावल और दिल्ली-पानीपत-करनाल जैसे कॉरिडोर मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले समय में जैसे-जैसे नए कॉरिडोर जुड़ेंगे, यह मॉडल पूरे NCR में शहरी विकास की नई कहानी लिखेगा।












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