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JNU Protest क्यों हो रहा? UGC नियम को लेकर यूनिवर्सिटी में क्या चल रहा है, 500 छात्रों का मार्च समझें मामला?

JNU Protest TimeLine: दिल्ली का जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (Jawaharlal Nehru University) एक बार फिर सुर्खियों में है। 26 और 27 फरवरी की दरम्यानी रात से शुरू हुआ तनाव 26 फरवरी दोपहर हिंसक झड़पों में बदल गया। सवाल यही है कि आखिर आग किस बात से भड़की। यूजीसी नियमों को लागू करने की मांग, कुलपति के इस्तीफे का दबाव या छात्रसंघ पदाधिकारियों के निष्कासन का गुस्सा। करीब 400 से 500 छात्र कैंपस से शिक्षा मंत्रालय तक लॉन्ग मार्च पर अड़े थे और पुलिस ने बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद हालात बेकाबू हो गए।

▶️ JNU विरोध की पृष्ठभूमि क्या है? (Background of Protest)

जेएनयू छात्रसंघ ने रोहित एक्ट लागू करने, संशोधित यूजीसी नियमों को लागू करने और कुलपति शांतिश्री धुलीपुडी पंडित (Santishree Dhulipudi Pandit) के इस्तीफे की मांग को लेकर मार्च का ऐलान किया था। प्रशासन का कहना है कि यूजीसी के जिन नियमों को लागू करने की मांग की जा रही है, उन पर सुप्रीम कोर्ट की रोक है और विश्वविद्यालय के स्तर पर उन्हें लागू करना संभव नहीं है।

JNU Protest TimeLine

तनाव की एक और वजह पांच छात्रसंघ पदाधिकारियों का निष्कासन बताया जा रहा है। अंबेडकर लाइब्रेरी में सीसीटीवी तोड़फोड़ के आरोप में प्रॉक्टोरियल जांच के बाद कार्रवाई हुई थी। छात्रसंघ का आरोप है कि यह कार्रवाई बदले की भावना से की गई।

▶️ मार्च और टकराव की टाइमलाइन (JNU Clash Timeline)

  • 26 फरवरी दोपहर करीब 3 बजकर 20 मिनट पर सैकड़ों छात्र मुख्य गेट की ओर बढ़े। कैंपस के बाहर भारी पुलिस बल तैनात था। Delhi Police के साथ RAF और CRPF की टीमें भी मौजूद थीं। प्रशासन ने साफ किया था कि कैंपस से बाहर प्रदर्शन की अनुमति नहीं है।
  • पुलिस के मुताबिक छात्रों ने बैरिकेड तोड़े, बैनर और डंडे फेंके, जूते उछाले और कुछ जवानों से हाथापाई की। यहां तक कि कुछ पुलिसकर्मियों को काटने तक के आरोप लगे। करीब 25 पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं।
  • छात्रसंघ का दावा अलग है। उनका कहना है कि पुलिस ने मुख्य गेट पर जंजीरें लगा दीं, जबरन धक्का दिया और लाठीचार्ज जैसा बल प्रयोग किया। कई छात्र घायल हुए और कुछ को बिना मेडिकल सहायता के हिरासत में लिया गया।
  • सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए हैं। आरोप है कि एक वीडियो में पूर्व जेएनयूएसयू अध्यक्ष नीतीश कुमार दीवार पर चढ़कर छात्रों को उकसाते दिख रहे हैं। दूसरे वीडियो में श्रेय नाम का छात्र पुलिसकर्मी को थप्पड़ मारता नजर आता है। एक और क्लिप में सुरक्षाकर्मियों पर डंडा फेंकने और गालीगलौज के दृश्य हैं। पुलिस इन वीडियो के आधार पर पहचान कर रही है।
JNU Protest

▶️ UGC नियम क्यों है विवादित?

UGC ने कुछ नए नियम (UGC Regulations) जारी किए हैं, जिन्हें छात्रों और छात्रसंघ का कहना है कि वे असमान और लागू करने योग्य नहीं हैं। इसका उदाहरण रोहित एक्ट और संशोधित नियम हैं जिन पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है। प्रशासन का कहना है कि इस स्थिति में विश्वविद्यालय खुद से उन नियमों को लागू नहीं कर सकता। छात्रों का कहना है कि ये नियम शिक्षा के अधिकार और न्यायसंगत नीति के खिलाफ हैं।

▶️ JNU विरोध मामले में अब तक 14 लोगों की गिरफ्तारी हुई?

अब तक 14 लोगों की गिरफ्तारी की पुष्टि हुई है। इनमें पूर्व अध्यक्ष नीतीश कुमार, मौजूदा अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष गोपिका बाबू और संयुक्त सचिव दानिश अली शामिल हैं। 50 से ज्यादा छात्रों को हिरासत में लिया गया था, जिनमें कई को 14 घंटे से अधिक समय तक थाने में रखा गया। मामला वसंत कुंज नॉर्थ थाने में दर्ज हुआ है और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।

JNU Teachers' Association ने पुलिस कार्रवाई को कठोर बताया और हिरासत में लिए गए छात्रों की रिहाई की मांग की। छात्रसंघ का आरोप है कि अंबेडकर की तस्वीर को नुकसान पहुंचा, हालांकि पुलिस ने इसे खारिज किया है।

JNU Protest

▶️ पुलिस और छात्रों के बीच आरोप-प्रत्यारोप

पुलिस का कहना:

  • - छात्रों ने बैरिकेड्स तोड़े और हिंसा की।
  • - पुलिसकर्मियों सहित लगभग 25 अधिकारी घायल हुए।
  • - प्रदर्शन बिना अनुमति और नियमों का उल्लंघन करते हुए किया गया।

छात्रसंघ का कहना:

  • - पुलिस ने पहले उन्हें रोक दिया और आगे निकलने नहीं दिया।
  • - लाठीचार्ज और धक्का-मुक्की की गई।
  • - घायल छात्रों को उचित चिकित्सा नहीं दी गई और कुछ को अनजान स्थानों पर ले जाया गया।

▶️ अगला कदम और क्या उम्मीद की जा रही है?

स्थिति फिलहाल तनावपूर्ण बनी हुई है। पुलिस की जांच जारी है और हिरासत में रखे गए छात्रों को रिहा करने की मांग तेज़ हो रही है। जेएनयू के शिक्षक संघ (JNUTA) ने पुलिस कार्रवाई की निंदा की है और छात्रों की रिहाई की मांग की है।

संक्षेप में, जेएनयू में प्रोटेस्ट केवल एक मुद्दा नहीं है बल्कि कई मुद्दों का संगम है - UGC नियमों पर सवाल, प्रशासन और छात्रों के बीच भरोसे की कमी और सुरक्षा बलों के साथ टकराव।

▶️ असली चिंगारी क्या थी (What Sparked It)

मामला केवल एक मांग तक सीमित नहीं है। यूजीसी नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, कुलपति के कथित बयान, विश्वविद्यालय फंड में कटौती और निष्कासन की कार्रवाई ने मिलकर माहौल को बारूद बना दिया। मार्च उस बारूद पर चिंगारी साबित हुआ।

फिलहाल कैंपस में सुरक्षा कड़ी है, गेट पर बैरिकेड हैं और जांच जारी है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या संवाद से रास्ता निकलेगा या जेएनयू की सियासत फिर लंबी लड़ाई की ओर बढ़ेगी। फिलहाल इतना तय है कि 500 छात्रों का यह मार्च सिर्फ एक दिन की घटना नहीं, बल्कि लंबे समय से सुलग रहे असंतोष का विस्फोट था।

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