केजरीवाल ने मोदी से राशन की होम डिलीवरी पर लगी रोक को हटाने की अपील की
नई दिल्ली, 6 जून: केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच कई सालों से चली आ रही टकरार अभी भी जारी है। जल्द ही केजरीवाल सरकार ने 'घर-घर राशन' योजना शुरू करने का प्लान बनाया था, लेकिन केंद्र ने आपत्ति जताते हुए इसे रोक दिया। ऐसे में अब दिल्ली सरकार और आम आदमी पार्टी ने फैसले का विरोध जताते हुए केंद्र पर राजनीति करने का आरोप लगाया है। इसके लिए रविवार सुबह मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। साथ ही पूछा कि जब पिज्जा-बर्गर की होम डिलीवरी हो सकती है तो राशन की क्यों नहीं?

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सीएम केजरीवाल ने कहा कि अगले हफ्ते से घर-घर राशन पहुंचाने का काम शुरू होने वाला था। सारी तैयारी हो गई थी और अचानक केंद्र ने 2 दिन पहले इसे क्यों रोक दिया? ये कह के इसे खारिज किया गया है कि हमने केंद्र सरकार से इसकी मंजूरी नहीं ली। ये बात पूरी तरह से गलत है। सीएम के मुताबिक दिल्ली सरकार ने एक बार नहीं बल्कि 5 बार केंद्र से मंजूरी ली है। कानूनन किसी मंजूरी की जरूरत नहीं है। राशन की होम डिलिवरी क्यों नहीं होनी चाहिए? आप राशन माफिया के साथ खड़े होंगे तो गरीबों के साथ कौन खड़ा होगा? उन 70 लाख गरीबों का क्या होगा जिनका राशन ये राशन माफिया चोरी कर लेते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि मैं दिल्ली के 70 लाख गरीबों की ओर से हाथ जोड़कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से निवेदन करता हूं कि वो घर-घर राशन योजना को ना रोकें। ये पूरा मामला राष्ट्रहित से जुड़ा हुआ है। इसमें किसी तरह की कोई राजनीति नहीं है। इस योजना से सिर्फ और सिर्फ दिल्ली में रहने वाले गरीबों को ही लाभ होगा।
क्या है केंद्र की आपत्ति?
केंद्र ने केजरीवाल की राशन योजना पर दो प्रमुख आपत्तियां लगाई हैं। इसमें पहला है कि एनएफएस अधिनियम 2013 के तहत प्रदान किए जा रहे खाद्यान्न का उपयोग किसी राज्य-विशिष्ट योजना को चलाने के लिए नहीं किया जा सकता है, जबकि दूसरा है कि दिल्ली सरकार एनएफएसए खाद्यान्न के वितरण से जुड़ी योजना का नाम नहीं बदल सकती है।












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