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Delhi Teen Case: 'स्कूल बुलिंग' से आत्महत्या? दिल्ली टीन सुसाइड केस ने खोली स्कूल सिस्टम की पोल, उठे सवाल

Delhi Teen Case: दिल्ली के एक प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ने वाले कक्षा 10 के एक 16 वर्षीय छात्र ने संदिग्ध परिस्थितियों में आत्महत्या कर ली जिसके बाद पूरे देश में स्कूलिंग सिस्टम सवालों के घेरे में हैं। वेस्ट दिल्ली के एक मेट्रो स्टेशन से कूदकर जान देने वाले छात्र के बैग से पुलिस को एक हैंडरिटेन नोट मिला है, जिसमें उसने अपने टिचर्स और हेडमिस्ट्रेस पर लगातार मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया।

घटना सामने आने के बाद पूरा स्कूल प्रशासन सवालों के घेरे में है और दिल्ली सरकार ने तत्काल उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। लेकिन कई ऐसे सवाल अब भी बाकी हैं जो एजुकेशन सिस्टम को रडार पर रखते हैं।

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हैंडरिटेन नोट में गंभीर आरोप

दिल्ली पुलिस के मुताबिक छात्र के बैग में एक पेज से अधिक का नोट मिला, जिसमें उसने अपने ऊपर हो रहे "टारगेटेड हैरासमेंट", शिक्षकों की धमकियों और हेडमिस्ट्रेस के व्यवहार को अपनी परेशानी की वजह बताया है। नोट में छात्र ने लिखा कि उसे महीनों से परेशान किया जा रहा था। कभी बात करने पर, कभी मामूली बातों पर, तो कभी बिना गलती के। यह लेटर सिर्फ शब्दों का नहीं, उस दर्द का प्रमाण है, जिसे शायद वह लंबे समय से जी रहा था।और शिकायतों पर स्कूल प्रबंधन ने कोई ध्यान नहीं दिया।

पुलिस ने इस आधार पर स्कूल स्टाफ के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 107 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 3(5) (साझी मंशा से अपराध) के तहत FIR दर्ज कर ली है। गुरुवार, 20 नंवबर को स्कूल की हेडमिस्ट्रेस सहित तीन शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

शिक्षा निदेशालय ने संयुक्त निदेशक हर्षित जैन की अध्यक्षता में पाँच सदस्यीय जांच समिति गठित की है, जो तीन दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। यह कमेटी स्टाफ की भूमिका, स्कूल की काउंसलिंग प्रणाली, छात्र से जुड़े घटनाक्रम और प्रशासनिक जिम्मेदारियों की जांच करेगी।

"महीनों से हो रहा था उत्पीड़न"-दोस्तों और परिवार का दावा

छात्र के दोस्तों और परिजनों का कहना है कि लड़का कई दिनों से "टारगेटेड बुलींग" का शिकार था। परिवार का आरोप है कि स्कूल ने बच्चे के व्यवहार में बदलाव के संकेतों को नजरअंदाज किया। एक सीनियर पुलिस ऑफिसर ने मामले की जांच को लेकर बताया कि स्कूल और मेट्रो स्टेशन दोनों की CCTV फुटेज इकट्ठी की जा रही हैं और कई छात्रों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।

लड़के के पिता ने बताया कि घटना से ठीक एक दिन पहले बेटे ने कहा था कि स्कूल में उसे बहुत परेशान किया जा रहा है। पिता ने उसे समझाया बोर्ड परीक्षा के बाद तुम्हारा स्कूल बदल देंगे। पर उन्हें अंदाजा नहीं था कि बच्चा उस स्तर पर पहुंच चुका है जहां उसे सहारा नहीं, बल्कि बचाव की जरूरत थी।

काउंसलर ने नजरअंदाज किया?

छात्र के पिता ने दावा किया कि बेटे के दोस्तों ने बताया है कि उसने अपने "सुसाइडल थॉट्स" स्कूल की काउंसलर को बताए थे, लेकिन उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया। छात्र के चाचा ने भी आरोप लगाया कि काउंसलर ने बच्चे की बातों को "डिसमिस" कर दिया। कुछ क्लासमेट्स ने पुलिस को बताया कि छात्र को कुछ शिक्षकों द्वारा बुली किया जा रहा था और उसी के आधार पर उसने नोट लिखा था। वे दो-तीन दिनों में हेडमिस्ट्रेस को शिकायत देने वाले थे।

परिवार का कहना है कि घटना से एक दिन पहले भी बच्चे ने बताया था कि उसे परेशान किया जा रहा है। पिता ने यह भी कहा कि स्कूल की ओर से कई बार धमकी दी गई कि उसे निष्कासित कर दिया जाएगा।

CCTV फुटेज में दिखा कि घटना से ठीक पहले छात्र ने प्लेटफॉर्म पर मौजूद एक महिला को रास्ता दिखाया। चाचा के अनुसार, लड़के ने बैग रखा, प्लेटफॉर्म पर कुछ देर चला, फिर गार्ड से बात की-और जैसे ही गार्ड ने पल भर के लिए नजर हटाई, छात्र ने छलांग लगा दी। फिलहाल पुलिस, शिक्षा निदेशालय और दिल्ली मेट्रो की टीम घटना की अलग-अलग स्तर पर जांच कर रही है। परिवार ने कहा है कि वे बच्चे को न्याय दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।

क्या हमारा बच्चा स्कूल में सुरक्षित है?

यह घटना सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि उस सिस्टम की नाकामी भी है जो यह मानकर चलता है कि बच्चे शिकायत नहीं करते, इसलिए वे ठीक हैं। यह घटना बता गई है कि कई बार बच्चे चुप नहीं होते हम ही सुनना भूल जाते हैं।

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