प्रदूषण के खिलाफ अन्य राज्यों के लिए सीख है सीएम केजरीवाल की नीति

पिछले दिनों दिल्ली का बढ़ता प्रदूषण स्तर सरकार और नगर निकायों के लिए एक बड़ी चुनौती से बनकर उभरा है। दिल्ली सरकार ने हाल ही में एक बड़ा निर्णय लिया। जिसके तहत दीपावली को पटाखे जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का बढ़ता प्रदूषण स्तर सरकार और नगर निकायों के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। त्यौहारों के मौसम में लोगों की आउटिंग बढ़ने से दिल्ली में सांस लेना मुश्किल हो जाता है। समस्या गंभीर है। लिहाजा कदम भी मजबूती से आगे बढ़ाए जा रहे हैं। दिल्ली सरकार ने हाल ही में एक बड़ा निर्णय लिया है। जिसके तहत दीपावली पर पटाखे जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। दिल्ली की आम आदमी पार्टी नेतृत्व वाली सरकार पहली सरकार है, जिसने दिल्ली में दीपावली के उत्सव में पटाखों के प्रयोग प्रतिबंध जैसा कड़ा निर्णय लिया है। हालांकि इसको लेकर दिल्ली सरकार की आलोचना भी हो रही है। लेकिन सरकार की ओर से साफ कहा गया है कि हमारी प्राथमिकता में लोगों की जान की सुरक्षा सबसे ऊपर है।

arvind kejriwal

पिछले दिनों दिल्ली में जिस तर वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ा उससे प्रदेश सरकार की चिंताएं बढ़ गईं। रविवार को दीपावली से एक दिन पहले की बात करें तो दिल्ली का AQI (Air Quality Index) पांच प्रमुख इलाकों में 300 से ऊपर पहुंच गया। सबसे अधिक एक्यूआई स्तर डीयू के नार्थ कैंपस का रहा। यहां का एयर क्वालिटी इंडेक्स 326 दर्ज किया गया जबकि दिल्ली के अन्य इलाके एनएसआईटी द्वारका 319, आरके पुरम में 311, नेहरू नगर 306 और जहांगीरपुरी का एक्यूआई 306 दर्ज किया गया। दिल्ली का ये हाल दीपावली से एक दिन पहले का है। जो दिल्ली के व्यस्ततम इलाके दिपावली से पहले की खरीददारी के लिए होने वाली भीड़-भाड़ की वजह से दिखा। लेकिन दीपावली के दिन राजधानी में प्रदूषण का स्तर क्या हो जाता है इसका अंदाजा लगाने से भी डर लगता होगा। लेकिन अब दिल्ली सरकार एक अहम निर्णय से दिल्लीवासियों की टेंशन काफी हद तक कम हो गई है।

दिल्ली सरकार को राष्ट्रीय राजधानी में पटाखों की बिक्री और प्रयोग पर प्रतिबंध लगाने के बाद कड़ी आलोचना भी झेलनी पड़ी। जिसके जवाब में मंत्री गोपाल राय ने कहा कि जो राजनीति करना चाहते हैं वे कर सकते हैं। लोगों की जान बचाना हमारी प्राथमिकता है। इस मामले को लेकर कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट भी गए थे और कोर्ट के फैसले के बाद अब इस मामले में बहस की कोई गुंजाइश नहीं बची है। जब हमारे पूर्वजों ने दिवाली मनाई थी, तब पटाखे नहीं थे, क्योंकि तब पटाखे नहीं बनते थे। लोगों की जान बचाना हर धर्म की प्राथमिकता है। राय ने कहा कि सरकार का फोकस लोगों को जागरूक करना है। उन्होंने दिल्ली के आसपास रिपोर्ट की गई पराली जलाने की घटनाओं पर भी चिंता जताई। राय ने कहा कि दिवाली के बाद पराली जलाने की घटनाएं बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में हम खेतों में बायो डीकंपोजर का छिड़काव कर रहे हैं, लेकिन दिल्ली के अलावा पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी पराली जलाने का काम किया जाता है। इसे रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं।

दिल्ली सरकार के पटाखों पर प्रतिबंध लगाने पर आलोचना करना राजनीति दलों की विवशता या फिर विचारधारा की लड़ाई हो सकती है। लेकिन राजनीतिक दलों की आलोचना की ये प्रवृत्ति शायद दिल्लीवासियों की समस्याओं से कहीं दूर है। जिस शहर में प्रदूषण का स्तर पिछले कई वर्षों से समस्या का कारण बना हो वहां कड़े कदम तो उठाने ही पड़ेंगे और दिल्ली सरकार ने वही किया। तो अब आलोचना का औचित्य क्या है? हमें इस विषय पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यता है। सरकार के निर्णय पर पर सवाल उठाए जा सकते हैं। लोकतंत्र की ये खूबसूरती भी बनी रहनी चाहिए लेकिन इसमें जनता का हित सर्वोपरि होना चाहिए।

दिल्ली को प्रदूषण मुक्त करने के लिए दिल्ली की आम आदमी पार्टी की नेतृत्व वाली सरकार अपने पहले कार्यकाल से ही संघर्ष कर रही है। दिल्ली में वाहनों से निकलने वाले धुएं से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण की व्यवस्था के साथ दिल्ली और उससे सटे आसपास के इलाकों में पराली को डिकम्पोज करने की तकनीकि पर काम शुरू किया है। दिल्ली में पराली जलाने पर रोक के बाद इसे किसानों के अब फायदे का सौदा बनाने की तैयारी है। दिल्ली सरकार खेतों में बायो डीकंपोजर का छिड़काव करवा रही है।

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