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Delhi Coaching: 'कार ड्राइवर मस्तीखोर, उसके मजे के कारण हादसा हुआ', जमानत के विरोध में दिल्ली पुलिस की दलील

Delhi Coaching Incident: ओल्ड राजेंद्र नगर की RAU IAS कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में 27 जुलाई को पानी भरने से तीन छात्रों की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे के बाद से दिल्ली नगर निगम और दिल्ली पुलिस लगातार एक्शन में है। पुलिस ने इस पूरे मामले में कोचिंग मालिक और कॉर्डिनेटर सहित 7 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें एक थार वाहन चालक भी शामिल है। जिसका जमानत का दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में विरोध किया।

दरअसल, कोचिंग हादसे से जुड़ा एक फुटेज सामने आया, जिसमें एक थार गाड़ी दिखाई दे रही है और कोचिंग सेंटर के बाहर भरे पानी से तेज रफ्तार से निकली थी। स्थानीय लोगों के मुताबिक थार के वहां से गुजरने के बाद ही कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी घुसना शुरू हुआ था।

Thar Owner court

मालूम हो कि थार की स्पीड के बाद पानी के प्रेशर से कोचिंग सेंटर के गेट को नुकसान पहुंचा था। ऐसे में पुलिस ने वीडियो के आधार पर थार ड्राइवर को आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया, जिसे तीस हजारी कोर्ट में पेश किया, जहां आरोपी की ओर से जमानत याचिका दाखिल की गई, जिसका दिल्ली पुलिस ने कड़ा विरोध किया।

थार के ड्राइवर मनोज कथूरिया की जमानत का विरोध करते हुए दिल्ली पुलिस ने दावा किया कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और इस बात की प्रबल संभावना है कि आरोपी गवाहों को प्रभावित कर सकता है। जिसके बाद कार ड्राइवर के वकील ने बचाव में सवाल किया, "दिल्ली पुलिस मामले से जुड़े नहीं लोगों को गिरफ्तार कर रही है, तो मुझे घटना के लिए कैसे दोषी ठहराया जा सकता है?"

'कार ड्राइवर मस्तीखोर, उसके मजे के कारण हादसा हुआ'

जिस पर सरकारी वकील ने कहा, "वह मस्तीखोर है। मौज-मस्ती करते हुए उसने यह घटना की।" ड्राइवर के वकील ने अपनी दलील में कहा कि उनके मुवक्किल को एफआईआर की कॉपी नहीं दी गई। उनका ना तो कोई इरादा था और ना ही उसे मौत का कारण बनने का ज्ञान था।

वकील ने दी ये दलीलें

वकील ने पूछा कि "गली खुली थी। यह 30 फीट की सड़क थी, पानी 2.5 फ़ीट ऊंचा था, गति सिर्फ 15 किलोमीटर प्रति घंटा थी, मैं सड़क के बीचों-बीच गाड़ी चला रहा था। मीडिया को खुश करने और छात्रों को यह दिखाने के लिए आम लोगों को गिरफ़्तार किया गया है कि कुछ हो रहा है। किसी सरकारी अधिकारी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। किसी अपराध के लिए इरादा और जानकारी होना जरूरी है। मुझे कैसे पता चलेगा कि बेसमेंट में छात्र मौजूद थे?"

उन्होंने आगे कहा, "मेरे आगे अन्य गाड़ियां जा रही थीं और मेरे पीछे अन्य (गाड़ियां) आईं। पानी अन्य घरों तक क्यों नहीं पहुंचा? दोष संस्थानों और (सरकारी) विभागों का है। दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के अधिकारियों को क्यों नहीं गिरफ्तार किया गया?"

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