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Delhi Rapid Rail: गुरुग्राम से नोएडा का सफर सिर्फ 38 मिनट में! रैपिड रेल कॉरिडोर से कैसे बदलेगी NCR की तस्वीर?

Delhi NCR Rapid Rail: दिल्ली-एनसीआर (Delhi NCR) में यातायात को तेज, सुविधाजनक और जाम मुक्त बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया जा रहा है। रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) के तहत एनसीआर में चार बड़े कॉरिडोर विकसित करने की तैयारी चल रही है।

जिनके जरिए आठ प्रमुख शहरों को हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने का प्रस्ताव है। इनमें सबसे अहम और चर्चित प्रोजेक्ट नोएडा से गुरुग्राम रैपिड रेल कॉरिडोर माना जा रहा है।

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नमो भारत (RRTS) के विस्तार के साथ अब गुरुग्राम, नोएडा, फरीदाबाद और गाजियाबाद जैसे शहर एक-दूसरे के इतने करीब आ जाएंगे कि घंटों का सफर मिनटों में सिमट जाएगा।

Gurgaon-Noida RRTS DPR: गुरुग्राम-नोएडा रैपिड रेल को लेकर तेज हुई कवायद

नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने गुरुग्राम के इफ्को चौक से ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर तक रैपिड रेल कॉरिडोर की डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) हरियाणा सरकार को सौंप दी है। इसे दिल्ली-एनसीआर में हाई-स्पीड पब्लिक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

इस कॉरिडोर के बनने से भविष्य में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (IGI Airport) और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) को भी हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ा जा सकेगा, जिससे यात्रियों को सीधी और तेज कनेक्टिविटी मिलेगी।

Delhi-NCR Rapid Rail 4 corridors: 4 नए कॉरिडोर से शहर को होने वाले फायदे

1. गुरुग्राम-नोएडा कॉरिडोर: दो एयरपोर्ट्स का 'महामिलन'

प्रस्तावित गुरुग्राम-नोएडा रैपिड रेल कॉरिडोर का रूट कई बड़े औद्योगिक और रिहायशी इलाकों को कवर करेगा। यह कॉरिडोर गुरुग्राम सेक्टर-54 से शुरू होकर फरीदाबाद के बाटा चौक से गुजरेगा और इसके बाद सेक्टर 85-86 के चौराहे से होते हुए नोएडा सेक्टर 142 से सेक्टर 168 के बीच से गुजरकर ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर तक पहुंचेगा।

इस पूरे रूट पर 6 स्टेशन प्रस्तावित किए गए हैं। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 15,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह हरियाणा से होकर गुजरने वाला तीसरा 'नमो भारत' रैपिड रेल प्रोजेक्ट होगा।

2. दिल्ली-पानीपत-करनाल कॉरिडोर

हरियाणा के उत्तरी हिस्से को दिल्ली से जोड़ने के लिए यह कॉरिडोर बेहद महत्वपूर्ण है। यह सराय काले खां से शुरू होकर पानीपत और करनाल तक जाएगा। इस प्रोजेक्ट पर ₹33,000 करोड़ का खर्च अनुमानित है। केंद्र सरकार से मंजूरी मिलते ही इस पर काम और तेज होगा

3. दिल्ली-गुरुग्राम-मानेसर-बावल कॉरिडोर

औद्योगिक क्षेत्रों को कनेक्टिविटी देने के लिए यह रूट लाइफलाइन साबित होगा। ₹32,000 करोड़ की लागत वाले इस रूट को भविष्य में गुरुग्राम-नोएडा कॉरिडोर से भी जोड़ा जाएगा। इस कॉरिडोर के जरिए इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को हाई-स्पीड नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।

4. गाजियाबाद-जेवर एयरपोर्ट RRTS कॉरिडोर

उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र मिलकर गाजियाबाद से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) तक सीधी कनेक्टिविटी का प्लान कर रहे हैं। सूरजपुर इस नेटवर्क का एक प्रमुख जंक्शन होगा, जहाँ गाजियाबाद-जेवर लाइन और गुरुग्राम-नोएडा लाइन का मिलन हो सकता है। दोनों ही रूट के सराय काले खान से शुरू होने की संभावना है, जहां से पहले से ही दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल का नेटवर्क मौजूद है।

गुरुग्राम-नोएडा RRTS कॉरिडोर को दिल्ली-बावल कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा। इस रूट पर IGI एयरपोर्ट में भी एक स्टेशन प्रस्तावित है। गाजियाबाद-जेवर कॉरिडोर में सूरजपुर स्टेशन अहम कनेक्टिंग प्वाइंट होगा। इससे दिल्ली-एनसीआर में एयरपोर्ट ट्रैवल बेहद आसान और तेज हो जाएगा।

Delhi Rapid Rail से.समय और ट्रैफिक जाम से मिलेगी बड़ी राहत

रैपिड रेल कॉरिडोर के पूरा होने के बाद यात्रा समय में भारी कमी आने की उम्मीद है। इफ्को चौक से फरीदाबाद का सफर अब सिर्फ 22 मिनट में और इफ्को चौक से नोएडा की दूरी लगभग 38 मिनट में पूरी हो सकेगी। इससे दिल्ली-गुरुग्राम, दिल्ली-नोएडा और गुरुग्राम-नोएडा जैसे रूट्स पर लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम से काफी हद तक राहत मिलेगी। रोजाना लाखों यात्रियों को इसका सीधा फायदा होगा।

हरियाणा सरकार और NCRTC में क्यों है मतभेद?

गुरुग्राम-नोएडा रैपिड रेल को लेकर एलिवेटेड बनाम अंडरग्राउंड रूट पर मतभेद सामने आए हैं। NCRTC का प्रस्ताव है कि कॉरिडोर को एलिवेटेड (सड़क के ऊपर) बनाया जाए। हरियाणा सरकार चाहती है कि गुरुग्राम में रूट अंडरग्राउंड हो। हरियाणा सरकार का तर्क है कि एलिवेटेड कॉरिडोर से भविष्य में फ्लाईओवर, पुल और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में दिक्कतें आ सकती हैं।

सिर्फ 3-5 किलोमीटर के रूट के लिए लोग रैपिड रेल नहीं अपनाएंगे। अभी से भविष्य के विस्तार को ध्यान में रखकर योजना बनानी जरूरी है। इस मुद्दे पर NCRTC, हरियाणा सरकार और अन्य संबंधित एजेंसियों की बड़ी बैठक जल्द होने वाली है। आने वाले सालों में यह हाई-स्पीड नेटवर्क दिल्ली-एनसीआर को मेगापोलिस ट्रांसपोर्ट मॉडल की ओर ले जाएगा, जहां शहरों के बीच दूरी मिनटों में सिमट जाएगी।

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