Delhi Missing Girls: 15 दिन में 807 लोग गायब! दिल्ली में क्या हो रहा है? NHRC ने सरकार-पुलिस से मांगी रिपोर्ट
Delhi Missing Girls: दिल्ली में अचानक सामने आए लापता लोगों के आंकड़ों ने सिस्टम को हिला कर रख दिया है। जनवरी 2026 के सिर्फ पहले 15 दिनों में राजधानी से 807 लोगों के गायब होने की खबर पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने इस मामले में दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
NHRC ने स्वतः संज्ञान क्यों लिया? (NHRC Suo Motu Cognisance)
NHRC ने एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर स्वतः संज्ञान लिया है, जिसमें दिल्ली पुलिस के आंकड़ों का हवाला दिया गया था। आयोग ने साफ कहा कि अगर रिपोर्ट में सामने आए तथ्य सही हैं, तो यह मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करता है। इसी आधार पर दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव और पुलिस कमिश्नर को जवाब देने को कहा गया है।

807 में कौन-कौन हैं गायब? (Missing Persons Data Delhi)
- दिल्ली पुलिस के अनुसार 1 से 15 जनवरी के बीच लापता हुए 807 लोगों में
- 191 नाबालिग
- 616 वयस्क शामिल हैं।
- इनमें से पुलिस अब तक 235 लोगों को ढूंढ चुकी है, जबकि 572 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। औसतन देखें तो राजधानी में हर दिन 54 लोग गायब हो रहे हैं, जो अपने आप में डराने वाला आंकड़ा है।
पिछले साल की तस्वीर क्या कहती है? (Delhi Missing Cases 2025)
- रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि साल 2025 में कुल 24,508 लोग दिल्ली में लापता हुए थे।
- इनमें से 60 प्रतिशत महिलाएं थीं।
- पुलिस ने 15,421 मामलों को सुलझाया, लेकिन
- 9,087 केस अब भी अनसुलझे हैं।
- ये आंकड़े दिखाते हैं कि समस्या सिर्फ हालिया नहीं, बल्कि लंबे समय से बनी हुई है।
किशोर और लड़कियां सबसे ज्यादा जोखिम में क्यों? (Missing Teenagers India)
डेटा के मुताबिक 2016 से हर साल 5,000 से ज्यादा किशोर दिल्ली में लापता हो रहे हैं। इनमें करीब 3,500 लड़कियां शामिल होती हैं। यह ट्रेंड बताता है कि किशोरों, खासकर लड़कियों के लिए राजधानी अब भी सुरक्षित नहीं मानी जा सकती।
दिल्ली पुलिस का जवाब क्या है? (Delhi Police Statement)
6 फरवरी को जारी एक आधिकारिक बयान में दिल्ली पुलिस ने दावा किया कि जनवरी 2026 में लापता लोगों की रिपोर्टिंग पिछले वर्षों की तुलना में कम रही है। हालांकि, NHRC के नोटिस के बाद अब पुलिस और सरकार को यह बताना होगा कि इतने बड़े आंकड़ों के बावजूद जमीनी स्तर पर क्या कदम उठाए गए।
अब आगे क्या होगा? (Human Rights Investigation)
NHRC ने दो हफ्ते की समयसीमा तय की है। रिपोर्ट आने के बाद आयोग आगे की कार्रवाई तय करेगा। साफ है कि यह मामला सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सुरक्षा, पुलिसिंग और मानवाधिकारों पर बड़ी बहस को जन्म दे सकता है।












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