दिल्ली मेयर के फैसले को एलजी ने पलटा, वार्ड समितियों का चुनाव आज कराने का दिया निर्देश
दिल्ली में लंबे समय से नगर निगम वार्ड समिति के चुनाव लंबित हैं, लेकिन अब भी चुनाव को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। दिल्ली की मेयर शेली ओबरॉय के दफ्तर ने मंगलवार रात तकरीबन 9 बजे घोषणा की कि उन्होंने पीठासीन अधिकारियों की नियुक्ति करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने अपनी अंतरात्मा" का हवाला देते हुए कहा कि वे अलोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया का समर्थन नहीं कर सकतीं।
ओबेरॉय ने एमसीडी आयुक्त अश्विनी कुमार को चुनाव प्रक्रिया फिर से शुरू करने का निर्देश दिया और नामांकन के लिए कम से कम एक हफ्ते का समय देने को कहा है। मेयर के इस आदेश के तुरंत बाद अश्विनी कुमार ने आधिकारिक निर्देश जारी किया, जिसमे उन्होंने कहा कि माननीय एलजी के आदेश के अनुसार चुनाव तय शेड्यूल के अनुसार ही कराए जाएंगे।

चुनाव की घोषणा के बाद दो आप पार्षद तिलोत्तमा चौधरी और प्रेम चौहान ने नामांकन दाखिल करने के लिए समय सीमा बढ़ाने की मांग करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। जिसपर कोर्ट ने कहा कि आप याचिका दायर करने के बजाय अपना नामांकन दाखिल कर सकते थे। बाद में उन्होंने अपनी याचिका वापस ले ली और उसी दिन अपना नामांकन दाखिल कर दिया।
गौर करने वाली बात है कि सुप्रीम कोर्ट के 5 अगस्त को अपने फैसले में दिल्ली नगर निगम के वार्ड समिति चुनाव कराने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि केंद्र द्वारा नियुक्त उपराज्यपाल दिल्ली सरकार से परामर्श किए बिना 10 पार्षदों को मनोनीत कर सकते हैं।
जिसके बाद चुनाव की घोषणा 28 अगस्त को हुई थी, चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने का समय 30 अगस्त तक दिया गया था। हालांकि ओबेरॉय ने अश्विनी कुमार को लिखे अपने पत्र में तर्क दिया कि इस कार्यक्रम ने कई पात्र पार्षदों को नामांकन दाखिल करने के उनके कानूनी अधिकार से वंचित कर दिया है।
ओबेरॉय ने कहा कि नामांकन की अवधि चुनाव की घोषणा के ठीक एक दिन बाद शुरू हुई थी और उसी शाम को नामांकन की अवधि समाप्त होने वाली थी। उन्होंने दावा किया कि यह समय अनुचित था और इसने कई लोगों को चुनाव में भाग लेने से वंचित कर दिया।
भाजपा और कांग्रेस ने मेयर शेली ओबेरॉय के काम की आलोचना की है। एमसीडी में भाजपा के नेता प्रतिपक्ष राजा इकबाल सिंह ने आप पर नगर निगम के दो साल के काम को बर्बाद करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि वार्डों में विकास रुक गया है और संवैधानिक प्रावधानों का अनुपालन जरूरी है। दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने ओबेरॉय को बर्खास्त करने की मांग करते हुए दावा किया कि उन्होंने मेयर बने रहने का अपना संवैधानिक और नैतिक अधिकार खो दिया है।
एमसीडी में कांग्रेस के नेता और पूर्व मेयर फरहाद सूरी ने भी ओबेरॉय के फैसले की निंदा की। उन्होंने कहा, "मेयर कह रही हैं कि वे चुनाव स्थगित कर रही हैं क्योंकि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया जा रहा है, लेकिन कोर्ट पहले ही इस मामले पर अपनी राय दे चुका है, इसलिए स्थगित करने का उनका निर्देश अपने आप में लोकतंत्र का उल्लंघन है।"
ओबेरॉय ने पिछले चुनाव कार्यक्रमों का उल्लेख किया, जहां नोटिस जारी करने और चुनाव की तारीखों के बीच अधिक समय दिया गया था। 2017 में 12 दिन; 2018 में 17 दिन; 2019 में 11 दिन; 2020 में 14 दिन; और 2021 में 12 दिन का समय दिया गया था। इस साल केवल सात दिन दिए गए। उन्होंने तर्क दिया कि यदि कार्यक्रम पहले से सूचित किए जाते तो पात्र व्यक्ति उसके अनुसार योजना बना सकते थे।
अश्निनी कुमार को लिखे अपने पत्र में ओबेरॉय ने कहा कि उन्होंने नामांकन दाखिल करने के लिए औपचारिक रूप से समयसीमा बढ़ाने का अनुरोध किया था, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने लोकतांत्रिक अखंडता को कमजोर करने के बारे में चिंता व्यक्त की और सवाल किया कि क्या इन कार्रवाइयों के पीछे कोई अंतर्निहित एजेंडा है।












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