Delhi MCD Election 2022: पार्षदों को सैलरी कितनी मिलती है, फंड के अलावा बाकी सुविधाएं क्या हैं ? जानिए
दिल्ली के निगम पार्षदों को वेतन की जगह हर महीने बैठकों के हिसाब से भत्ता दिए जाने का प्रावधान है। उन्हें अपने क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए फंड भी उपलब्ध करवाए जाते हैं। पार्षद हर महीने 8-9 बैठकों में शामिल होते हैं।

Delhi MCD Election 2022 Update: दिल्ली एमसीडी के चुनाव नतीजे आने के बाद अब मेयर के चुनाव को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। लेकिन, दिल्ली वालों समेत देश के बाकी नागरिकों की भी इस बात में दिलचस्पी होगी कि आखिर इन निगम पार्षदों को अब सैलरी और बाकी सुविधाएं क्या मिलेंगी। उन्हें अपने क्षेत्र में नाली बनाने, साफ-सफाई, बिजली की व्यवस्था आदि के लिए कितना फंड मिलेगा? क्योंकि, आम जनता ने तो अबतक ज्यादातर निगम पार्षदों के चुनाव जीतते ही उनका रुतबा बदलते अक्सर देखा है। अपने देश में बाकी जनप्रतिनिधियों जैसे कि सांसदों और विधायकों का ना सिर्फ वेतन निर्धारित है, बल्कि वह बाकी सुविधाओं के नाम पर भी जनता के खजाने से अपने लिए मोटी व्यवस्था करवा चुके हैं। ऐसे में पार्षदों की कमाई के बारे में जानना आश्यक है।

दिल्ली में अब मेयर के चुनाव पर चर्चा
दिल्ली नगर निगम में कुल 250 वार्ड हैं। इसी हिसाब से बुधवार को जो चुनाव के नतीजे आए हैं, उसमें कुल 250 पार्षद चुने गए हैं। आम आदमी पार्टी ने एमसीडी में 15 साल से चल रहा भारतीय जनता पार्टी का राज खत्म किया है। उसे बहुमत के लिए आवश्यक 126 वार्ड से ज्यादा 134 सीटें मिली हैं। बीजेपी मजबूत विपक्षी की भूमिका में रहेगी, जिसके 104 पार्षद चुने गए हैं। कांग्रेस 9 सीटों पर सिमट गई है और तीन निर्दलीय जीते हैं, जिसे भाजपा सूत्र अपना ही बता रहे हैं। मौजूदा चुनाव परिणाम के मुताबिक ही सबकुछ चला तो दिल्ली का मेयर भी आम आदमी पार्टी का ही होगा। लेकिन, इसमें कुछ उपराज्यपाल द्वारा नामांकित सदस्य भी वोट करेंगे। दिल्ली के सात सांसदों का भी रोल होगा। इसलिए बीजेपी की ओर से दावे भी किए जाते रहे हैं कि महापौर उसी का होगा। खैर यह तो बाद में पता चलेगा। लेकिन, अभी यह जानना दिलचस्प है कि पार्षद बनने के लिए जिस तरह से उम्मीदवारों में टक्कर रहती है, आखिर उन्हें उसका अब फायदा क्या मिलेगा ?

एमसीडी के पार्षदों को फंड कितना मिलता है ?
सांसदों और विधायकों की तरह ही दिल्ली नगर निगम के पार्षदों को भी अपने क्षेत्र के विकास के लिए एरिया डेवलपमेंट फंड दिया जाता है। हालांकि, यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है कि यह फंड किस आधार पर दिया जाता है और वह रकम कितनी होती है। एमसीडी की जानकारी रखने वाले सूत्रों का कहना है कि पार्षदों को अपने क्षेत्र में विकास के कार्य को अंजाम देने के लिए सालाना 25 लाख रुपए से लेकर 1 करोड़ रुपए तक के फंड आवंटित किए जाते हैं। क्योंकि, यह आवश्यकता और समय के अनुसार से बदल जाता है।

एमसीडी पार्षदों को सैलरी कितनी मिलती है ?
2017 में जब बीजेपी दिल्ली की तीनों एमसीडी में सत्ता में आई थी, तब दक्षिणी दिल्ली नगर निगम ने पार्षदों और महापौर के लिए फिक्स सैलरी दिए जाने का प्रस्ताव पेश किया था। इसमें मेयर के लिए 15,000 रुपए और पार्षदों के लिए 10,000 रुपए मासिक वेतन का प्रस्ताव था। लेकिन, जानकारी के मुताबिक इसपर अमल नहीं हो पाया। वैसे भी अबतक तीनों नगर निगम मिलकर पहले की तरह एक हो चुके हैं। कुल मिलाकर कहें तो दिल्ली नगर निगम के पार्षदों को आय के नाम पर सिर्फ वह भत्ता ही मिलता है, जो उन्हें बैठकों में भाग लेने के लिए दिए जाते हैं।

दिल्ली नगर निगम के पार्षदों के भत्ते
कमाई के नाम पर दिल्ली के पार्षदों को सिर्फ काउंसिल और जोन की बैठकों में भाग लेने के लिए भत्ता ही मिलता है। जानकारी के अनुसार यह भत्ता हर एक पार्षद को प्रति बैठक 300 रुपए के हिसाब से दिए जाने की व्यवस्था है। दक्षिणी दिल्ली नगर निगम ने इस भत्ते को भी 1,000 रुपए प्रति बैठक करने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन, अभी तक पार्षदों को 300 रुपए प्रति बैठक मिलने की ही जानकारी है। महीने में इस तरह की बैठकें आमतौर पर 8 या 9 तक हो जाती हैं। पार्षदों की शुद्ध कमाई का आकलन इसी से किया जा सकता है। यही नहीं, इसमें भी एक सीलिंग की व्यवस्था है। यह भत्ता एक महीने में 3,000 रुपए से ज्यादा नहीं होगा।

एमसीडी के पार्षदों को मिलने वाली बाकी सुविधाएं
दिल्ली नगर निगम के पार्षदों को मिलने वाली बाकी सुविधाओं की बात करें तो उन्हें निगम उनके काम के लिए लैपटॉप और मोबाइल मुहैया करवा सकता है। हालांकि, यह हमेशा के लिए नहीं होता है और कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्हें इसे निगम को वापस सौंपने पड़ते हैं। पार्षदों को विधायकों की तरह सुविधाएं देने के लिए दक्षिणी दिल्ली नगर निगम ने स्टेशनरी के लिए 6000 रुपए, कंप्यूटर ऑपरेटर के लिए 5000 रुपए और रिफ्रेशमेंट के लिए भी 5000 रुपए प्रति महीने देने का प्रस्ताव दिया था।












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