Delhi Fire: मुशर्रफ अली के दोस्त मोनू ने कहा- मजहब हमारे बीच कभी नहीं आया, बच्चों की हमेशा करूंगा सुरक्षा

दिल्ली। 8 दिसंबर को दिल्ली के अनाज मंडी बाजार में लगी भीषण आग में 43 लोगों की मौत हो गई, जबकि 17 लोग बुरी तरह झुलस गए थे। इस आग में कई जिंदगियां खाक हो गईं तो कई घरों में तो पेट भरने वाला एक मात्र सहारा भी नहीं बचा। आग की लपटों में धुएं के बीच आखिरी सांस के लिए तड़पते हुए अंदर फंसे लोगों ने जो किया उसे जानकर किसी का भी कलेजा फट जाए। अंदर फंसे लोगों में कुछ लोग ऐसे थे जिन्‍होंने सामने से मौत को आता देख अपने परिवार, मित्रों से आखिरी बार बात कर अलविदा कहा।

परिवार और बच्चों की करूंगा सुरक्षा: मोनू अग्रवाल

परिवार और बच्चों की करूंगा सुरक्षा: मोनू अग्रवाल

दरअसल, भीषण आग में फंसे मुशर्रफ अली ने अपने बचपन के 33 वर्षीय दोस्त मोनू अग्रवाल से आखिरी बार फोन पर बातचीत की थी। मोनू अग्रवाल ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया था कि उनकी मुशर्रफ अली के साथ करीब सात मिनट तक मुझसे फोन पर आखिरी बातचीत हुई थी, ‘संयोग से रिकॉर्ड' फोन में सेव हो गई। रिकॉर्डिंग सामने आने के बाद कई लोगों की आंखों में आंसू आ गए थे। वहीं, मोनू अग्रवाल ने कहा कि वह मेरा सबसे अच्छा दोस्त था। हम दोनों ही एक दूसरे का हर कदम पर साथ देते थे। उसने अपने अंतिम पल में मुझे अपने परिवार की जिम्मेदारी सौंपी है। मैं मरते दम तक उसके परिवार और बच्चों की सुरक्षा करूंगा।

ये थे मुशर्रफ अली के आखिरी शब्द

ये थे मुशर्रफ अली के आखिरी शब्द

फोन पर की गई बातचीत को बाद में टीवी चैनलों ने प्रसारित किया था और इसे सोशल मीडिया पर साझा किया गया है। अली की जहरीले धुएं के कारण मौत हो गई। उन्होंने अग्रवाल से उनकी मौत के बाद उनके परिवार-बुजुर्ग मां, पत्नी और आठ साल से कम उम्र के दो बच्चों-का ध्यान रखने को कहा था। बता दें कि सोमवार को मोनू अग्रवाल अपने दोस्त का शव लेने के लिए लोकनायक अस्पताल पहुंचा। यहां उन्होंने अपने मन की पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि अब तक उत्तर प्रदेश सरकार ने उनके दोस्त के परिवार के लिए मदद की कोई घोषणा नहीं की है। वे दोनों ही बिजनौर जिला निवासी हैं।

मजहब हमारे बीच कभी नहीं आया

मजहब हमारे बीच कभी नहीं आया

बिजनौर जिले के रहने वाले अली और अग्रवाल अच्छे और बुरे वक्त के साथी थे। अग्रवाल ने बताया, 'हमारे घर एक ही गली में हैं। हम घंटों बात करते थे। हम हर बात पर चर्चा करते थे, हमारे बीच में कुछ भी छुपा हुआ नहीं था। हम सुख-दुख में एक साथ रहते थे।' उन्होंने कहा, 'मुशर्रफ मेरे लिए भाई से बढ़कर था। मजहब हमारे बीच कभी नहीं आया। ईद पर, उनका परिवार हमारी मेहमान नवाजी करता था और दिवाली पर मैं।' उन्होंने अपने आंसुओं को रोकने की कोशिश करते हुए कहा कि उनके बच्चे अब मेरे बच्चे हैं।

मानो मेरे सामने खड़ी हो मौत

मानो मेरे सामने खड़ी हो मौत

उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ से अपील करते हुए कहा कि वह अपने दोस्त के परिवार की जिम्मेदारी हमेशा उठाएगा, लेकिन सरकार को भी मुशर्रफ के बच्चों के लिए कुछ करना चाहिए। शोभित बताते हैं, मेरा दोस्त बहुत अच्छा था। वह काफी समय से यहां काम कर रहा था। वह हमेशा पूरी लगन के साथ काम करता और ज्यादा से ज्यादा रुपए कमा कर अपने बच्चों को अच्छी परवरिश देना चाहता था। पूरे परिवार में मेरा दोस्त इकलौता कमाने वाला था। मोनू ने बताया कि मौत से पहले उसने जो दर्द बयान किया, वह याद कर मैं सहम जा रहा हूं। उसकी बातें ऐसी थी कि मानो मेरे सामने मौत खड़ी हो।

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