दिल्ली की इन 10 सीटों पर BJP से नहीं, कांग्रेस से है AAP को खतरा? केजरीवाल को परेशान कर सकता है ये समीकरण!

Delhi Election 2025: दिल्ली में विधानसभा चुनावों के लिए वोटिंग पांच फरवरी को होनी है। नतीजे आठ फरवरी को आएंगे। दिल्ली की 70 सीटों के लिए इस बार मुकाबला आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच है। हालांकि दिल्ली में 2015 और 2020 के विधानसभा चुनावों में एक भी सीट नहीं जीत पाने वाली कांग्रेस ने इस चुनावों में नए जोश और उत्साह के साथ कदम रखा है।

कांग्रेस ने खुद को इस चुनाव में आम आदमी पार्टी के लिए चुनौती के तौर पर पेश किया है, न कि भाजपा के लिए, जो पिछले दो कार्यकालों से दिल्ली विधानसभा में एकमात्र विपक्ष थी। कांग्रेस के नेता आप संयोजक अरविंद केजरीवाल और उसके अन्य नेताओं पर निशाना साध रहे हैं।

Delhi Election 2025

वैसे तो दिल्ली की 70 सीटों में से ज्यादातर पर त्रिकोणीय मुकाबला है, लेकिन कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में असली लड़ाई AAP और कांग्रेस के बीच है। ये दस सीटें ऐसी हैं, जहां कांग्रेस से आप को खतरा है, भाजपा से नहीं। दिल्ली चुनाव में संघर्ष कर रही कांग्रेस रणनीतिक रूप से दिल्ली की 20-25 सीटों पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

Delhi Chunav 2025: कांग्रेस का दलित और मुस्लिम बहुल सीटों पर ज्यादा फोकस!

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दलित और मुस्लिम बहुल सीटों पर अपनी रैलियों के जरिए संविधान और आरक्षण पर जोर देते हुए भाषण दिए। राहुल गांधी ने अभियान के दौरान 2020 के दिल्ली दंगों से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा भी किया।

कांग्रेस, जानबूझकर दलितों और मुसलमानों को वापस जीतने की कोशिश कर रही है, जो कभी उसके पारंपरिक मतदाता थे जो वोटर अब आप को ट्रांसफर हो गए हैं। इन समुदायों के वर्चस्व वाली लगभग 10 दिल्ली विधानसभा सीटों पर कांग्रेस आम आदमी पार्टी को कड़ी टक्कर दे रही है। ये एक ही तरह के वोटर्स आधार के लिए दो इंडिया ब्लॉक सहयोगियों के बीच एक दिलचस्प मुकाबला है।

दिल्ली की वो 10 सीटें, जहां AAP और कांग्रेस में दिलचस्प मुकाबला!

राहुल गांधी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए अपनी पहली रैली सीलमपुर में की। सीलमपुर उत्तर-पूर्वी दिल्ली की एक सीट है, जहां 57% मतदाता मुस्लिम समुदाय के हैं। यह कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था। हालांकि AAP 2015 और 2020 ये सीट जीती थी। ​​सीलमपुर में AAP के चौधरी जुबैर अहमद का मुकाबला कांग्रेस के मौजूदा विधायक अब्दुल रहमान से है, जो हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए हैं।

'जय भीम जय संविधान' नामक राहुल की रैली का उद्देश्य दलितों को भी अपने पक्ष में करना था। इसी तरह मुस्लिम बहुल सीटों और समुदाय की अच्छी आबादी वाली सीटों पर, कांग्रेस AAP के खिलाफ मुख्य दावेदार के रूप में उभर रही है। इन सीटों में मटिया महल (60% मुस्लिम मतदाताओं के साथ), बल्लीमारान (50% मुस्लिम मतदाता), ओखला (52% मुस्लिम मतदाता ) और चांदनी चौक (30% मुस्लिम मतदाता) शामिल हैं। इन सीटों पर इस बार समीकरण कांग्रेस के पक्ष में भी जा सकते हैं और अगर ऐसा हुआ तो आप सुप्रीम केजरीवाल के लिए ये परेशानी का कारण बन सकता है।

अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीमापुरी और सुल्तानपुर माजरा सीटों पर भी कांग्रेस बड़ा दांव लगा रही है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल पर हमला किया और उनकी तुलना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से करते हुए कहा कि दोनों सीमापुरी में "चोर" हैं।

कांग्रेस दिल्ली की बादली, सुल्तानपुर माजरा, बाबरपुर और मुस्तफाबाद जैसी सीटों पर भी आप को कड़ी टक्कर दे सकती है। इन सभी सीटों पर प्रवासी मजदूरों, मुसलमानों और दलितों की एक बड़ी आबादी रहती है।

दिल्ली में, खास तौर पर इन अहम सीटों पर, कड़ी टक्कर देने में कांग्रेस पीछे नहीं हटी है। यहां तक ​​कि राहुल गांधी ने भी अरविंद केजरीवाल पर तीखे हमले किए हैं। कांग्रेस जानती है कि अस्तित्व की इस लड़ाई में बहुत कुछ दांव पर लगा है।

इन 10 सीटों पर कांग्रेस को AAP से खतरा!

  • 1. सीलमपुर
  • 2. मटिया महल
  • 3. बल्लीमारान
  • 4. ओखला
  • 5.चांदनी चौक
  • 6. सीमापुरी
  • 7. बादली
  • 8. सुल्तानपुर माजरा
  • 9. बाबरपुर
  • 10. मुस्तफाबाद

कांग्रेस अपने पारंपरिक वोट बैंक को हासिल करने में लगी!

कांग्रेस अपने पारंपरिक वोट बैंक को फिर से हासिल करने की कोशिश कर रही है। 2013 में दिल्ली के चुनावी मैदान में AAP के उतरने के बाद से कांग्रेस दिल्ली की राजनीति से जैसे गायब हो गई है। 2013 के दिल्ली चुनावों में AAP को 30% वोट मिले थे, जिससे कांग्रेस का वोट शेयर गिरकर 25% रह गया था। 2015 में कांग्रेस का वोट शेयर गिरकर 9.7% और 2020 में और भी गिरकर 4.3% हो गया। कांग्रेस के वोट शेयर गिरते रहे और आप के वोट शेयर बढ़ते रहे।

AAP ने 2015 में 54.3% और 2020 में 53.5% वोट प्रतिशत मिले। अब जब सत्ता विरोधी लहर और भ्रष्टाचार के आरोप AAP के खिलाफ काम कर रहे हैं, तो कांग्रेस को एक मौक मिला है। खासकर अल्पसंख्यक और दलित बहुल इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने का।

आंकड़े बताते हैं कि कांग्रेस एक दशक से पिछड़ रही है, फिर भी वह इन समुदायों से कुछ समर्थन बनाए रखने में कामयाब रही है। और वह वफादार मतदाता आधार का सही तरीके से इस्तेमाल करना चाहती है। यही कारण है कि इन सीटों पर आप और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है।

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